मिशन 'स्कूल चलो अभियान' 2026: चंदौली में 1.71 लाख छात्रों को सत्र के पहले दिन ही बच्चों को मिलेंगी नई किताबें

 

चंदौली जिले के 1185 परिषदीय स्कूलों में नए शिक्षा सत्र का शानदार आगाज हो रहा है। 1 अप्रैल से स्कूल खुलते ही छात्र-छात्राओं को नई पुस्तकें वितरित की जाएंगी, जिसके लिए बीएसए ने सभी बीआरसी को निर्देश जारी कर दिए हैं।

 
 

पहले दिन बच्चों को मिलेंगी नई किताबें

कलेक्ट्रेट से 'स्कूल चलो अभियान' का आगाज

16 लाख से अधिक पुस्तकों की डिमांड

80 फीसदी से ज्यादा किताबें प्राप्त

अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक वितरण लक्ष्य

चंदौली जिले के परिषदीय विद्यालयों में नए शिक्षा सत्र 2026-27 का भव्य आगाज 1 अप्रैल से होने जा रहा है। इस बार बेसिक शिक्षा विभाग ने विशेष तैयारी की है ताकि निजी स्कूलों की तर्ज पर सरकारी स्कूलों के बच्चों को भी सत्र की शुरुआत में ही अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जा सके। जिले के 1185 परिषदीय विद्यालयों में नामांकित लगभग 1 लाख 71 हजार छात्र-छात्राओं को स्कूल खुलते ही नई पुस्तकें वितरित की जाएंगी।

16 लाख पुस्तकों की डिमांड, 14 लाख की खेप पहुंची
बेसिक शिक्षा विभाग ने शासन से कक्षा 1 से 8 तक के लिए कुल 16 लाख 30 हजार पुस्तकों की मांग की थी। इसके सापेक्ष जिले को अब तक 14 लाख से अधिक पुस्तकें प्राप्त हो चुकी हैं। इसमें हिंदी, गणित, संस्कृत, अंग्रेजी और विज्ञान जैसे मुख्य विषयों के साथ-साथ कार्यपुस्तिकाएं (Workbooks) भी शामिल हैं। विभाग द्वारा गठित टीम ने इन पुस्तकों का भौतिक सत्यापन कर लिया है और 80 प्रतिशत से अधिक किताबें ब्लॉक संसाधन केंद्रों (BRC) पर भेज दी गई हैं।

कलेक्ट्रेट से होगा 'स्कूल चलो अभियान' का श्रीगणेश
शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए 1 अप्रैल को जिलाधिकारी (DM) द्वारा कलेक्ट्रेट से 'स्कूल चलो अभियान' का औपचारिक उद्घाटन किया जाएगा। यह अभियान दो चरणों में चलेगा:

प्रथम चरण: 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक, जिसमें नामांकन बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।

द्वितीय चरण: 1 जुलाई से 15 जुलाई तक, जिसमें ड्रॉपआउट बच्चों को वापस स्कूल लाने का प्रयास होगा।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पारदर्शी वितरण प्रक्रिया
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) सचिन कुमार ने बताया कि विभाग का लक्ष्य अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक शत-प्रतिशत पुस्तक वितरण सुनिश्चित करना है। बीआरसी से स्कूलों तक किताबें पहुँचाने की प्रक्रिया युद्ध स्तर पर जारी है। सरकार की मंशा है कि गरीब से गरीब बच्चा भी उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और संसाधनों से वंचित न रहे। स्कूलों में पठन-पाठन का माहौल बेहतर बनाने के लिए शिक्षकों को भी नए सत्र के माइक्रो-प्लानिंग के निर्देश दिए गए हैं।

इस बार किताबों के साथ-साथ विभाग का पूरा जोर स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति और नामांकन बढ़ाने पर है, ताकि सरकारी स्कूलों की ओर अभिभावकों का भरोसा और मजबूत हो सके।