साहब लोग केवल ऑफिस में बैठकर बनाते रहे रिपोर्ट और चंदौली में घट गया काले धान की खेती का रकबा

चंदौली में काला धान की खेती का रकबा 20 हेक्टेयर तक सिमटा। बाजार और मिलिंग की कमी से किसान परेशान। ओडीओपी में शामिल पौष्टिक काला चावल को एमडीएम में शामिल करने का प्रस्ताव।
 

चंदौली में काले चावल की खेती सिमटी

बाजार न मिलने से ODOP योजना पर संकट

मिलिंग और मार्केटिंग की समस्या से किसान हुए विमुख

अधिकारी भी नहीं दिए समस्याओं के समाधान में वांछित सहयोग

उत्तर प्रदेश के 'धान के कटोरा' के नाम से प्रसिद्ध चंदौली जिले में कभी उम्मीद जगाने वाले काला धान (Black Rice) की खेती का क्षेत्रफल अब नाम मात्र का रह गया है। 2018 में मणिपुर से बीज मंगाकर 30 किसानों के साथ पायलट प्रोजेक्ट के तहत इसकी शुरुआत हुई थी, जिसने जल्द ही पूरे क्षेत्र में अपनी पहचान बना ली। इस पौष्टिक और पूरी तरह ऑर्गेनिक उत्पाद को सरकार की एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में भी शामिल किया गया और 2020-21 में इसे प्रधानमंत्री का उत्कृष्टता पुरस्कार भी मिला। इन सबके बावजूद, आज इसकी खेती का रकबा सिमटकर महज 15 से 20 हेक्टेयर रह गया है, जो 2019-20 के 50-60 हेक्टेयर के मुकाबले काफी कम है।

बाजार न मिलने से किसानों को लगा झटका

काले धान की खेती में आई गिरावट का मुख्य कारण बाजार और बेहतर मूल्य का न मिलना है। चंदौली कृषक समिति के चेयरमैन शशिकांत राय ने बताया कि 2021-22 में समिति ने एक हजार क्विंटल धान तो खरीद लिया, लेकिन बाद में बाजार नहीं मिलने के कारण किसानों को भारी नुकसान हुआ। मजबूरन इस धान को ओडिशा और नोएडा की एक कंपनी को 75 रुपये प्रति किलोग्राम के कम दाम पर बेचना पड़ा। इस करारे झटके के बाद किसानों का रुझान इस खेती से कम हो गया और वे इससे मुंह मोड़ने लगे।

मिलिंग और अपमिश्रण की चुनौती

शशिकांत राय ने मिलिंग (चावल बनाने) की समस्या को सबसे बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि काला धान से चावल बनाने के लिए यहां पर राइस मिल उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा अपमिश्रण (मिलावट) भी एक बड़ी समस्या है। वर्तमान में वे इंडिया गेट राइस कंपनी के संपर्क में हैं, जो धान खरीदकर चावल तैयार कर बाजार में आपूर्ति करती है। इस बार भी धान का नमूना कंपनी को भेजा जाएगा।

एमडीएम में शामिल करने का प्रस्ताव

किसानों को राहत देने और काले धान की मांग बढ़ाने के लिए प्रशासन ने एक सकारात्मक कदम उठाया है। जिला कृषि अधिकारी विनोद यादव ने बताया कि मुख्य विकास अधिकारी ने काले धान से तैयार चावल को स्कूलों में एमडीएम (मिड-डे-मील) में शामिल करने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। मेन्यू के अनुसार एक दिन बच्चों को खीर दी जाती है। इस चावल से खीर तैयार करने की अनुमति मांगी गई है। यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत हो जाता है, तो इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। इससे काले धान की मांग बढ़ेगी और किसानों को एक स्थायी बाजार उपलब्ध होगा।