राजस्व और पुलिस मामलों में लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त, जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग ने अधिकारियों को दी कड़ी चेतावनी

 

चंदौली में आयोजित 'संपूर्ण समाधान दिवस' में जिलाधिकारी ने राजस्व, पुलिस और विकास संबंधी शिकायतों के पारदर्शी निस्तारण के आदेश दिए। तीन साल से पुराने लंबित मामलों को प्राथमिकता पर सुलझाने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

 
 

शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण

तीन साल पुराने लंबित प्रकरणों पर फोकस

आईजीआरएस पोर्टल की शिकायतों को प्राथमिकता

राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम करेगी निरीक्षण

वरासत के निर्विवाद मामलों का तत्काल समाधान

उत्तर प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप जन समस्याओं के त्वरित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए शनिवार को चंदौली जिले की सभी तहसीलों में 'संपूर्ण समाधान दिवस' का आयोजन किया गया। सदर तहसील सभागार में जिलाधिकारी चन्द्र मोहन गर्ग और पुलिस अधीक्षक आदित्य लांग्हे की अध्यक्षता में फरियादियों की समस्याओं को सुना गया। इस दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि शिकायतों के निस्तारण में केवल कागजी खानापूर्ति नहीं, बल्कि धरातलीय परिणाम दिखने चाहिए।

समय सीमा और गुणवत्ता पर विशेष जोर
समाधान दिवस के दौरान जिलाधिकारी ने सभी विभागीय अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि प्राप्त शिकायतों का निस्तारण एक निर्धारित समय सीमा के भीतर किया जाए। उन्होंने कहा, "शिकायतकर्ता को अपने काम के लिए कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें, यह सुनिश्चित करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है।" निस्तारण के समय गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने को कहा गया है ताकि एक ही समस्या को लेकर फरियादी दोबारा न आए।

पुराने मामलों के लिए 'डेडलाइन' तय
जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारी (SDM) और तहसीलदारों को निर्देशित किया कि जो भी प्रकरण 3 वर्ष से अधिक पुराने हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर अतिशीघ्र निस्तारित किया जाए। विशेष रूप से निर्विवाद वरासत और भूमि विवाद से जुड़े मामलों को तत्काल सुलझाने के निर्देश दिए गए हैं। आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों को भी प्राथमिकता सूची में रखने को कहा गया है।

मौके पर निस्तारण और संयुक्त टीम का गठन
सदर तहसील में आयोजित इस दिवस में कुल 30 प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 03 का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया। शेष शिकायतों में से 02 संवेदनशील मामलों के लिए पुलिस और राजस्व की संयुक्त टीम गठित की गई, जिन्हें स्थलीय निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। अधिकांश शिकायतें भूमि विवाद, विकास विभाग, सिंचाई, विद्युत और पुलिस प्रशासन से संबंधित रहीं।

इस अवसर पर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, उप जिलाधिकारी दिव्या ओझा, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, तहसीलदार और अन्य जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे। जिलाधिकारी ने अंत में दोहराया कि जनता की सेवा में लापरवाही बरतने वाले किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।