मत्स्य पालन योजना में महिलाओं को सुनहरा मौका, एयरेशन सिस्टम के लिए 7 जनवरी तक करें आवेदन..ये होंगे लाभ

 

चंदौली जिले में महिला मत्स्य पालकों के लिए "सघन मत्स्य पालन एयरेशन योजना" के तहत ऑनलाइन आवेदन का पोर्टल पुनः खोल दिया गया है। 7 जनवरी 2026 तक आवेदन कर महिलाएं अपने तालाबों में आधुनिक ऑक्सीजन सिस्टम लगवा सकती हैं।

 
 

महिला मत्स्य पालकों के लिए विशेष अवसर

29 दिसंबर से 7 जनवरी तक आवेदन

एयरेशन सिस्टम से बढ़ेगा मछली उत्पादन

तालाबों में ऑक्सीजन स्तर सुधारने की योजना

पट्टाधारकों और निजी स्वामियों को लाभ

चंदौली जिले में भी उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित "सघन मत्स्य पालन एयरेशन योजना" में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। जनपद चंदौली के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य,  रामलाल निषाद ने जानकारी दी है कि महिला लाभार्थियों की कम संख्या को देखते हुए विभागीय पोर्टल को एक बार फिर ऑनलाइन आवेदन के लिए खोल दिया गया है।

पोर्टल पुनः खुलने की समय सीमा
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए इस योजना में पहले 24 जुलाई से 31 अगस्त 2025 तक आवेदन मांगे गए थे। पर्याप्त महिला आवेदन प्राप्त न होने के कारण अब 29 दिसम्बर 2025 से 07 जनवरी 2026 तक पोर्टल (http://fisheries.up.gov.in) पुनः सक्रिय रहेगा। इच्छुक महिलाएं इस अवधि के भीतर अपनी पात्रता के अनुसार आवेदन सुनिश्चित कर सकती हैं।

क्या है एयरेशन सिस्टम और इसके लाभ?
मत्स्य पालन में जल की गुणवत्ता और ऑक्सीजन का स्तर सबसे महत्वपूर्ण होता है। सघन मत्स्य पालन के दौरान तालाब में मछलियों की संख्या अधिक होने से ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। एयरेशन सिस्टम (Aeration System) के माध्यम से तालाब के जल में घुलित ऑक्सीजन (Dissolved Oxygen) का स्तर मानक के अनुसार बनाए रखा जाता है। इससे न केवल मछलियों का विकास तेजी से होता है, बल्कि रोगों और रोगजनकों का खतरा भी कम हो जाता है। यह तकनीक 4-5 टन प्रति हेक्टेयर की वर्तमान उत्पादकता को और अधिक बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी।

पात्रता और शर्तें

  1.  मुख्य कार्यकारी अधिकारी रामलाल निषाद ने योजना की पात्रता के संबंध में निम्नलिखित शर्तें स्पष्ट की हैं:
  2.  महिला केंद्रित: यह परियोजना पूर्णतः महिला मत्स्य पालकों के लिए संचालित है।
  3.  भूमि का स्वामित्व: निजी क्षेत्र के तालाब या ग्राम सभा के पट्टे पर आवंटित तालाब, जिनकी पट्टा अवधि कम से कम 5 वर्ष शेष हो।
  4.  बुनियादी सुविधाएं: लाभार्थी के पास तालाब पर विद्युत कनेक्शन या जनरेटर की उपलब्धता अनिवार्य है।
  5.  हैचरी स्वामी: मत्स्य बीज हैचरी संचालित करने वाली महिला हैचरी स्वामी भी इसके लिए पात्र होंगी।

यंत्रों का विवरण: 0.50 हेक्टेयर के तालाब के लिए 2 हॉर्सपावर का एक 'काड पैडिल व्हील एरियेटर' और 1.00 हेक्टेयर या उससे बड़े तालाब के लिए अधिकतम दो एरियेटर पर अनुदान दिया जाएगा।

आवेदन प्रक्रिया और संपर्क
इच्छुक महिला लाभार्थी विभागीय वेबसाइट http://fisheries.up.gov.in पर जाकर विस्तृत विवरण देख सकती हैं और ऑनलाइन फॉर्म भर सकती हैं। इसके अतिरिक्त, किसी भी तकनीकी सहायता या जानकारी के लिए कार्य दिवसों में सहायक निदेशक मत्स्य, जनपद कार्यालय में उपस्थित होकर संपर्क किया जा सकता है। प्रशासन का लक्ष्य है कि इस आधुनिक तकनीक के माध्यम से जिले की महिलाएं मत्स्य पालन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनें और उत्पादन में क्रांतिकारी वृद्धि हो।