सिंचाई विभाग में कमीशनखोरी का बोलबाला: सत्ता पक्ष के करीबियों को मिले ठेके, ठगा महसूस कर रहे अन्नदाता
बरहनी विकास खंड में माइनरों की सफाई में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। किसान नेताओं का दावा है कि जेई और रसूखदार ठेकेदारों की जुगलबंदी ने सरकारी धन का बंदरबांट कर दिया है, जिससे खेतों तक पानी पहुँचना अब नामुमकिन लग रहा है।
माइनरों की सफाई में भारी कमीशनखोरी
सत्ता पक्ष से जुड़े रसूखदार ठेकेदार
सिर्फ कागजों तक सीमित सफाई कार्य
सिंचाई विभाग के अधिकारियों की चुप्पी
किसानों ने की उच्चस्तरीय जाँच की मांग
जनपद चंदौली के बरहनी विकास खंड अंतर्गत आने वाले धीना, जलालपुर और घोसवा माइनरों की सफाई व्यवस्था इन दिनों विवादों के घेरे में है। सिंचाई विभाग द्वारा प्रतिवर्ष की जाने वाली नहर सफाई इस बार महज कागजी खानापूर्ति बनकर रह गई है। किसान नेता मुन्ना सिंह, दीना नाथ श्रीवास्तव, योगेंद्र सिंह और संजय पाण्डेय ने विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि माइनरों की सफाई में इस बार भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं। विभाग के कनिष्ठ अभियंता (जेई) और ठेकेदारों के बीच ऐसी सांठगांठ है कि बिना धरातल पर काम किए ही सरकारी बजट के बंदरबांट की तैयारी कर ली गई है।
सत्ता पक्ष के रसूखदार ठेकेदारों का बोलबाला
किसान नेताओं ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सदर तहसील क्षेत्र में जिन नहरों और माइनरों की सफाई के ठेके दिए गए हैं, उनमें से अधिकांश ठेकेदार सत्ता पक्ष के प्रभावशाली व्यक्तियों से जुड़े हुए हैं। ये ठेकेदार अपनी पहुंच लखनऊ तक होने का दावा करते हुए अधिकारियों पर दबाव बनाते हैं। रसूख का आलम यह है कि ग्रामीणों और किसानों की वास्तविक शिकायतों को सिंचाई विभाग के जिम्मेदार अधिकारी अनसुना कर रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि विभाग के अधिकारी इन राजनीतिक रसूख वाले ठेकेदारों के सामने पूरी तरह नतमस्तक हो चुके हैं और क्षेत्र की जनता के हितों की बलि दी जा रही है।
पुरानी तस्वीरों के सहारे भुगतान की तैयारी
क्षेत्र के किसानों का कहना है कि वे स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। ठेकेदारों द्वारा कार्य स्थल पर लेबर भेजने के बजाय केवल औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। आरोप है कि ठेकेदार पुरानी फोटो या किसी अन्य साफ जगह की प्रतीकात्मक तस्वीरें खींचकर पोर्टल पर अपलोड कर रहे हैं ताकि बिना वास्तविक खुदाई और झाड़ियों की सफाई के ही भुगतान प्राप्त किया जा सके। यदि समय रहते इन माइनरों की गहराई से सफाई नहीं हुई, तो टेल (नहर के अंतिम छोर) तक पानी पहुँचना असंभव होगा और किसानों को एक बार फिर अपनी फसलों को बचाने के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर काटने होंगे।
नहर में पानी आते ही दब जाएगा भ्रष्टाचार
किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि जैसे ही रोस्टर के अनुसार नहरों में पानी छोड़ा जाएगा, सफाई में हुई सारी खानापूर्ति पानी के नीचे दब जाएगी। इसी मौके का फायदा उठाकर विभाग और ठेकेदार मिलीभगत कर भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर लेंगे। इस संबंध में जब सिंचाई विभाग के अभियंता हरेंद्र कुमार से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि उन्हें भ्रष्टाचार और लापरवाही की शिकायतें प्राप्त हुई हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि मामले की तकनीकी जाँच कराई जाएगी और यदि मापदंडों के विपरीत कार्य पाया गया या सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि हुई, तो संबंधित ठेकेदार और दोषी कर्मचारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।