चंदौली कॉन्क्लेव: मिशन शक्ति को लेकर स्नेहा तिवारी ने पेश किए आंकड़े, यातायात नियमों के '4E' फार्मूले से थमेगी सड़क दुर्घटनाएं
चंदौली कॉन्क्लेव के दूसरे दिन महिला सुरक्षा और सड़क सुरक्षा पर बड़ा अपडेट सामने आया। जहां मिशन शक्ति के जरिए 1800 से अधिक महिलाओं की समस्याओं का समाधान हुआ, वहीं पुलिस ने दुर्घटनाएं रोकने के लिए '4E' सिद्धांत का रोडमैप साझा किया।
मिशन शक्ति केंद्रों से 1891 शिकायतों का निस्तारण
पीड़िताओं को निःशुल्क विधिक सहायता और काउंसलिंग
118 महिला बीट में पुलिसकर्मियों की तैनाती
सड़क सुरक्षा के लिए 4E प्रबंधन सिद्धांत
स्कूलों में बच्चों को यातायात शिक्षा पर जोर
चंदौली जिले में आयोजित तीन दिवसीय कॉन्क्लेव के दूसरे दिन का सत्र महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा पर केंद्रित रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ एडिशनल एसपी स्नेहा तिवारी और स्वामी लोकेशानंद ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान एएसपी स्नेहा तिवारी ने मिशन शक्ति की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पिछले छह महीनों में जिले के केंद्रों पर प्राप्त कुल 1891 शिकायतों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया गया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ये केंद्र केवल शिकायत दर्ज करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यहाँ पीड़िताओं को मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग और सरकारी योजनाओं का लाभ भी दिलाया जा रहा है। एसिड अटैक, गैंगरेप और अन्य गंभीर अपराधों की पीड़िताओं को मिशन शक्ति के माध्यम से आर्थिक सहायता और पुनर्वास में मदद दी जा रही है।
कानूनी सहायता और महिला बीट का सशक्त नेटवर्क
जिले में न्याय प्रक्रिया को सुलभ बनाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के समन्वय से जरूरतमंद महिलाओं को निःशुल्क वकील और कोर्ट में पैरवी की सुविधा प्रदान की जा रही है। एएसपी ने बताया कि जिले को 118 महिला बीट में विभाजित किया गया है। इन बीटों पर तैनात महिला पुलिसकर्मी सीधे ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर महिलाओं की समस्याओं को सुनती हैं और उनका मौके पर ही समाधान करने का प्रयास करती हैं। 'ऑपरेशन कन्विक्शन' के माध्यम से अपराधियों को त्वरित और सख्त सजा दिलाने की दिशा में भी कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।
यातायात प्रबंधन का '4E' सिद्धांत
कॉन्क्लेव के दूसरे सत्र में यातायात क्षेत्राधिकारी (सीओ) कृष्ण मुरारी शर्मा ने सड़क सुरक्षा पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं का मुख्य कारण जागरूकता का अभाव है। इसे दूर करने के लिए पुलिस '4E' सिद्धांत (Engineering, Education, Enforcement, Emergency Care) पर काम कर रही है।
पहले चरण में 'इंजीनियरिंग' के तहत सुरक्षित सड़कों के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है। वहीं, 'एजुकेशन' को सबसे महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस की टीमें स्कूलों और कॉलेजों में जाकर युवाओं को जागरूक कर रही हैं। जब नई पीढ़ी यातायात नियमों के प्रति अनुशासित होगी, तभी दुर्घटनाओं के ग्राफ को स्थायी रूप से नीचे लाया जा सकेगा। इस कॉन्क्लेव ने जिले के प्रशासनिक विजन और जन सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को एक नया मंच प्रदान किया है।