चंदौली में समय से पहले बंद हुए धान क्रय केंद्र: पोर्टल लॉक होने से हजारों किसानों का भविष्य अधर में, हो रही है कलेक्ट्रेट घेराव की तैयारी
चंदौली में 28 फरवरी तक खरीद के आश्वासन के बीच अचानक पोर्टल बंद होने से हाहाकार मच गया है। हजारों किसानों की फीडिंग न होने के कारण उनकी फसल का भुगतान फंसने की कगार पर है, जिसके खिलाफ अब किसान संगठन लामबंद हो गए हैं।
28 फरवरी तक खरीद का वादा निकला खोखला
लखनऊ से अचानक बंद किए गए सभी क्रय केंद्रों के पोर्टल
फीडिंग न होने से 50 गुना किसानों का भुगतान अधर में
कलेक्ट्रेट में जिलाधिकारी चंद्रमोहन गर्ग को सौंपा जाएगा ज्ञापन
शहाबगंज, बरहनी और सकलडीहा ब्लॉक में सबसे बुरा हाल
उत्तर प्रदेश के 'धान का कटोरा' कहे जाने वाले चंदौली जिले में इन दिनों अन्नदाता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। सरकार और प्रशासन द्वारा पहले घोषणा की गई थी कि धान क्रय केंद्रों पर खरीद की प्रक्रिया फरवरी महीने के अंत तक जारी रहेगी। लेकिन वास्तविकता इससे कोसों दूर नजर आ रही है। जिले भर के धान क्रय केंद्रों को समय से पहले बंद कर दिया गया है और पोर्टल लखनऊ से लॉक कर दिए गए हैं, जिसके कारण किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
भरोसा देकर पलट गए केंद्र प्रभारी, अधर में लटकी फीडिंग
किसानों का आरोप है कि क्रय केंद्र प्रभारियों ने उन्हें बार-बार यह कहकर आश्वस्त किया कि घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि खरीद 28 फरवरी तक होनी है। किसान इस आश्वासन के भरोसे बैठे रहे, लेकिन इस बीच न तो उनकी फीडिंग की गई और न ही धान की तौल हुई। अब स्थिति यह है कि जितने किसानों का धान बिका है, उससे 50 गुना अधिक किसानों की पोर्टल फीडिंग अभी बाकी है। बिना फीडिंग के किसानों को उनकी फसल की सरकारी कीमत (MSP) नहीं मिल पाएगी, जिससे उनकी साल भर की मेहनत की कमाई डूबने का खतरा पैदा हो गया है।
लखनऊ से पोर्टल बंद, किसानों में भय और अनिश्चितता
जिले के अधिकांश क्रय केंद्रों के पोर्टल लखनऊ मुख्यालय से बंद कर दिए गए हैं। पोर्टल बंद होने की खबर ने किसानों में अनिश्चितता और भय का माहौल पैदा कर दिया है। सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में शहाबगंज ब्लॉक, बरहनी ब्लॉक और सकलडीहा ब्लॉक शामिल हैं। ये जिले के वे क्षेत्र हैं जहाँ धान की सर्वाधिक पैदावार होती है। यहां के हजारों किसानों का धान अभी भी घरों या खलिहानों में पड़ा है, जबकि सरकारी आंकड़ों में खरीद की खिड़की बंद कर दी गई है।
संयुक्त किसान मोर्चा का कलेक्ट्रेट घेराव का ऐलान
प्रशासन की इस मनमानी और अव्यवस्था के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। मोर्चा के बैनर तले विभिन्न किसान संगठन एकजुट होकर चंदौली कलेक्ट्रेट पहुंचेंगे और जिलाधिकारी चंद्रमोहन गर्ग को अपनी समस्याओं से बिंदुवार अवगत कराएंगे। इस दौरान एक विस्तृत ज्ञापन भी सौंपा जाएगा, जिसमें पोर्टल को दोबारा खोलने और शेष किसानों की फीडिंग व तौल सुनिश्चित करने की मांग की जाएगी।
इन संगठनों ने मिलाया हाथ
इस आंदोलन को धार देने के लिए जिले के प्रमुख किसान संगठन एक साथ आए हैं, जिनमें कई संगठन शामिल हैं। इनमें किसान मजदूर संयुक्त यूनियन,
अखिल भारतीय किसान सभा, किसान विकास मंच, भारतीय किसान यूनियन, भारतीय किसान यूनियन (जनशक्ति) जैसे संगठन शामिल हैं।
कार्यकर्ताओं ने संभाली कमान
संयुक्त किसान मोर्चा चंदौली की संयोजक समिति के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं, जिनमें पारसनाथ विश्वकर्मा, गोपाल सिंह, रतन सिंह, कमलेश सिंह, श्रवण कुमार मौर्य और राम अवध सिंह प्रमुख हैं, ने इस कार्यक्रम का औपचारिक ऐलान कर दिया है। किसान नेताओं का कहना है कि जब तक आखिरी किसान का दाना-दाना नहीं खरीद लिया जाता, तब तक चैन से नहीं बैठेंगे। प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि आखिर किसके आदेश पर फरवरी समाप्त होने से पहले ही पोर्टल बंद किए गए।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
चंदौली के किसानों की यह समस्या अब एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक मुद्दे का रूप ले रही है। यदि समय रहते पोर्टल नहीं खोला गया और फीडिंग की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, तो किसानों का गुस्सा सड़कों पर उग्र रूप ले सकता है। अब सबकी निगाहें जिलाधिकारी के रुख और शासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।