अब गुरुजी खुद करेंगे स्कूलों की ग्रेडिंग, सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता जांचने के लिए नई व्यवस्था; गलत रिपोर्ट दी तो होगी कार्रवाई

 

चंदौली के 1,433 विद्यालयों में शिक्षा और सुविधाओं की हकीकत अब प्रधानाध्यापक खुद साझा करेंगे। शासन ने 'स्व-मूल्यांकन प्रणाली' लागू की है, जिसके तहत 31 जनवरी तक रिपोर्ट न देने या गलत जानकारी देने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

 
 

उत्तर प्रदेश विद्यालय मानक प्राधिकरण की नई पहल

प्रधानाध्यापकों द्वारा विद्यालय सुविधाओं का स्व-मूल्यांकन

योजनाओं के जमीनी असर की होगी डिजिटल जांच

गलत जानकारी देने वाले स्कूलों पर होगी कार्रवाई

चंदौली जनपद में परिषदीय और माध्यमिक विद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था और वहां उपलब्ध सुविधाओं की गुणवत्ता को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए शासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब विद्यालयों में संचालित योजनाओं की स्थिति और छात्र-छात्राओं को मिल रहे लाभ की हकीकत खुद प्रधानाध्यापक परखेंगे और उसकी रिपोर्ट विभाग को सौंपेंगे। इस नई व्यवस्था के तहत उत्तर प्रदेश विद्यालय मानक प्राधिकरण की ओर से एक विशेष स्व-मूल्यांकन प्रारूप (Self-Assessment Format) तैयार किया गया है, जिसे जिले के सभी संबंधित स्कूलों को भेज दिया गया है।

साढ़े तीन लाख से अधिक छात्रों के भविष्य पर शासन की नजर
चंदौली जनपद में वर्तमान में कुल 1,433 परिषदीय और माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। आंकड़ों के अनुसार, परिषदीय स्कूलों में करीब एक लाख 83 हजार छात्र-छात्राएं नामांकित हैं, जबकि माध्यमिक विद्यालयों में यह संख्या 1.26 लाख से भी अधिक है। इन बच्चों को शासन की ओर से मुफ्त यूनिफॉर्म, जूता-मोजा, स्वेटर और मिड-डे मील (MDM) जैसी तमाम बुनियादी सुविधाएं दी जा रही हैं। स्व-मूल्यांकन प्रणाली का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या ये सुविधाएं वास्तविक रूप से पात्र छात्रों तक पहुंच रही हैं और विद्यालयों में शैक्षणिक वातावरण का स्तर क्या है।

पायलट प्रोजेक्ट के तहत 31 जनवरी तक की समय सीमा
महानिदेशक स्कूल शिक्षा के निर्देशों के क्रम में इस व्यवस्था को फिलहाल एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया है। अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा की अध्यक्षता में हुई हालिया बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया कि प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, कंपोजिट और माध्यमिक स्कूलों को इस प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाए। जिला विद्यालय निरीक्षक देवेन्द्र सिंह ने बताया कि सभी प्रधानाध्यापकों को 31 जनवरी तक निर्धारित फॉर्म भरकर जानकारी साझा करने के निर्देश दिए गए हैं। इस प्रक्रिया के माध्यम से विभाग को जिले के हर स्कूल की एक विस्तृत प्रोफाइल प्राप्त होगी, जिससे भविष्य की योजनाएं बनाना आसान होगा।

गलत जानकारी पर कार्रवाई और बेहतर काम पर सम्मान
शासन ने इस प्रक्रिया को लेकर अत्यंत सख्त रुख अपनाया है। स्व-मूल्यांकन के बाद विभाग द्वारा रैंडम आधार पर विद्यालयों की जांच कराई जाएगी। यदि किसी विद्यालय की भौतिक स्थिति और प्रधानाध्यापक द्वारा दी गई रिपोर्ट में अंतर पाया जाता है, तो संबंधित प्रधानाध्यापक के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। वहीं दूसरी ओर, जो विद्यालय मानकों पर खरे उतरेंगे और अपनी रिपोर्ट के साथ-साथ धरातल पर भी बेहतर काम करेंगे, उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए पुरस्कृत भी किया जाएगा। इस पहल से स्कूलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ने की उम्मीद है।