चंदौली में बेलगाम पराली दहन: किसानों की मजबूरी के आगे सुप्रीम कोर्ट के निर्देश फेल
चंदौली जिले में धान की कटाई के साथ ही पराली जलाने की समस्या बेतहाशा बढ़ गई है, जिस पर स्थानीय अधिकारी और कर्मचारी उदासीन बने हुए हैं। बरहनी और कमालपुर इलाकों के निरीक्षण में दो दर्जन से अधिक जगहों पर पराली जलती पाई गई। गेहूं की बुआई के लिए जल्द खेत खाली करने की मजबूरी बताकर किसान पराली जला रहे हैं, और सरकार से वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग कर रहे हैं।
चंदौली में बेलगाम हुई पराली दहन की समस्या
सरकारी निर्देशों की उड़ रहीं धज्जियाँ
धान कटाई के बाद जमकर जल रही है पराली
चंदौली में पराली मैनेजमेंट का पूरा सिस्टम फोल
जिले में जारी है प्रदूषण का संकट
जमानिया मार्ग के किनारे कई गांवों में जलती दिखी पराली
चंदौली जनपद में इस समय धान की कटाई अपने पूरे जोर पर है, लेकिन कटाई के तुरंत बाद खेतों में शेष बची पराली जलाने की समस्या दिन-प्रतिदिन बेलगाम होती जा रही है। गंभीर चिंता का विषय यह है कि पर्यावरण और खेत की उर्वरता के लिए हानिकारक इस कृत्य को रोकने के लिए जिम्मेदार अधिकारी, गाँव और ब्लॉक स्तर के कर्मचारी पूरी तरह से उदासीन बने हुए हैं।
पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण और खेतों में मौजूद जैविक तत्वों के नुकसान से बचने के लिए सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने सभी राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासनों को सख्त निर्देश जारी किए थे। इन निर्देशों के बाद 2020 से पराली जलाने पर कानूनी कार्रवाई का सिलसिला शुरू भी हुआ था, लेकिन समय बीतने के साथ ही अधिकारियों और कर्मचारियों की उदासीनता बढ़ती चली गई, जिसका सीधा परिणाम अब जिले के खेतों में जलती हुई पराली के रूप में दिख रहा है।
देर रात और शाम को जलती दिखी पराली
चंदौली समाचार के संवाददाता ने सोमवार की शाम में जिले के कई इलाकों का दौरा किया, जहाँ दर्जनों स्थानों पर पराली जलती देखी गई। सैयदराजा-जमानिया मार्ग के दोनों ओर, विशेष रूप से बरहनी, अमड़ा, धीना, कमालपुर के साथ-साथ धानापुर विकासखंडों के कई गाँवों में, यह समस्या अत्यधिक गंभीर दिखी। संवाददाता को कम से कम दो से तीन दर्जन अलग-अलग इलाकों में धुआँ और आग की लपटें दिखाई दीं।
बरहनी विकासखंड के सैयदराजा जमानिया मार्ग के किनारे कई गाँवों में किसान धान काटने के तुरंत बाद बड़ी-बड़ी ढेरों में पराली जलाते हुए देखे गए। इस खुले उल्लंघन के बावजूद, प्रशासन या पुलिस की कोई भी टीम मौके पर मौजूद नहीं जा रही है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि स्थानीय स्तर पर निगरानी लगभग नगण्य है।
गेहूं की बुआई और नमी बनी किसानों की मजबूरी
संवाददाता ने जब मौके पर मौजूद किसानों से बात की, तो उन्होंने पराली जलाने के पीछे अपनी गहरी समस्या और मजबूरी बताई। किसानों का कहना था कि धान कटाई के बाद उन्हें तुरंत गेहूं की बुवाई करनी होती है, और खेत को जल्द से जल्द खाली करने के लिए उनके पास पराली जलाने के अलावा कोई दूसरा त्वरित विकल्प नहीं है। कुछ किसानों ने अपनी समस्या बताते हुए कहा कि वर्तमान में खेत में आवश्यकता से अधिक नमी है, और इसे जल्दी सुखाने के लिए वे पराली जला रहे हैं। नमी के कारण खेत में ट्रैक्टर चलाना मुश्किल होता है, इसलिए वे आग का सहारा लेते हैं।
संसाधन और वैकल्पिक व्यवस्था का अभाव
अधिकांश किसानों ने इस बात पर जोर दिया कि वे पर्यावरणीय नुकसान को समझते हैं, लेकिन उनके पास पराली प्रबंधन के लिए न तो पर्याप्त संसाधन हैं और न ही सरकार या प्रशासन की ओर से कोई ठोस वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। एक किसान ने कहा, "अगर सरकार इसके लिए कोई व्यवस्था करे और खेतों से पराली खुद उठा ले, तो हम इसे कभी नहीं जलाएंगे।"
किसानों का स्पष्ट मत है कि धान के बाद बचे इस कृषि अपशिष्ट (वेस्ट) को वे किसी काम का नहीं समझते हैं। पराली हटाने के लिए मशीनें महंगी हैं, और खेत में उसे सड़ाने में ज्यादा समय लगता है, जिससे उनकी अगली फसल की बुआई में देरी होती है। इसलिए, समय और लागत बचाने के लिए वे इसे जला दे रहे हैं।
जिला प्रशासन को लेनी होगी जिम्मेदारी
चंदौली जिले में इस अनियंत्रित होती समस्या पर अब जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, जिला पंचायती राज अधिकारी, और संबंधित ब्लॉक के उप जिलाधिकारी तथा खंड विकास अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
जिले के अधिकारियों को अब यह तय करना होगा कि क्या उन्होंने पराली जलाने की अघोषित छूट दे रखी है, या फिर उन्हें इस गंभीर पर्यावरणीय समस्या से निपटने के लिए जिला स्तर पर एक ठोस और प्रभावी रणनीति बनाने की कोशिश करनी होगी। यह रणनीति केवल कागजी आदेशों तक सीमित न रहकर, गाँव-गाँव में किसानों को सब्सिडी पर उपकरण उपलब्ध कराने, पराली खरीदने की व्यवस्था करने और वैकल्पिक तरीकों के बारे में जागरूक करने पर केंद्रित होनी चाहिए। केवल सख्ती दिखाने के बजाय, किसानों को व्यावहारिक समाधान उपलब्ध कराना ही इस समस्या का दीर्घकालिक हल हो सकता है।