पुलिस की मेहरबानी से जमानत पा गया जुआ सिंडिकेट सरगना और 50 हजार का इनामी देवता यादव, पढ़िए कोर्ट का आदेश

चंदौली में जुआ सिंडिकेट के सरगना और जिले के इनामी सुनील उर्फ देवता यादव ने पुलिस को चकमा देकर कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गयी है। इस घटना ने पुलिस की कार्यशैली और खुफिया तंत्र पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

50 हजार के इनामी देवता यादव ने कोर्ट से पायी अग्रिम जमानत

जुआ सिंडिकेट मामले में पुलिस को चकमा देने में रहा सफल

पुलिस की नरमी नहीं उतर पायी लोगों के गले

पुलिस अधिकारियों के पास नहीं थी मामले की सही-सही जानकारी

कोई कह रहा था सरेंडर किया और कोई कह रहा था गया जेल

चंदौली जिले के मुगलसराय थाना क्षेत्र में हुए हाई-प्रोफाइल जुआ कांड में मुख्य आरोपी देवता यादव उर्फ सुनील कुमार यादव को 15 अप्रैल को ही बड़ी कानूनी राहत मिली है। जनपद एवं सत्र न्यायालय, चन्दौली ने देवता यादव की द्वितीय अग्रिम जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया है।  इस पर जुआ अड्डा संचालित करने और प्रतिदिन भारी भरकम कमीशन यानी 'नाल' वसूलने का गंभीर आरोप था। पुलिस के लोगों ने यह मामला काफी दिनों तक दबाए रखा है। 

पेश है चंदौली समाचार के लिए फैजान अहमद व विनय तिवारी की खास और खोजी रिपोर्ट....

मुगलसराय पुलिस ने की थी छापेमारी 


मामले की शुरुआत 23 मार्च 2026 को हुई थी, जब मुगलसराय पुलिस, एसओजी और अन्य थानों की संयुक्त टीम ने मुखबिर की सूचना पर ग्राम सेमरा के पास एक बगीचे में स्थित मग्गू पटेल के घर पर छापेमारी की।  पुलिस को सूचना मिली थी कि वहाँ बड़े पैमाने पर जुआ खेला जा रहा है। छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से कुल 14 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया, जबकि कई अन्य भागने में सफल रहे। 

भारी मात्रा में नकदी और 52 वाहन बरामद 
पुलिस की इस कार्रवाई में मौके से ₹1,05,580 नकद, 208 ताश के पत्ते और 12 मोबाइल फोन बरामद किए गए थे।  सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि जुआरियों द्वारा छोड़ी गई कुल 52 मोटरसाइकिलें और स्कूटियां भी पुलिस ने अपने कब्जे में ली थीं।  पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों से जब पूछताछ की, तो उन्होंने खुलासा किया कि यह जुआ अड्डा देवता यादव (प्रधान) की देखरेख में चलता है।

₹70,000 प्रतिदिन 'नाल' वसूली का आरोप 
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, मौके से पकड़े गए आलोक कुमार कसेरा नाम के आरोपी ने बताया था कि देवता यादव जुआ खिलाने के बदले प्रतिदिन 'नाल' (कमीशन) के रूप में ₹70,000 लेता था।  यह भी आरोप लगाया गया था कि पुलिस से बचने के लिए ये लोग हर 15 दिन में जुए का ठिकाना बदलते रहते थे और पुलिस की लोकेशन ट्रैक करने के लिए मोबाइल फोन का सहारा लेते थे।

बचाव पक्ष और देवता यादव का तर्क 
अदालत में देवता यादव के वकील ने दलील दी कि उन्हें राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण झूठा फंसाया गया है।  उन्होंने कहा कि देवता यादव न तो मौके से पकड़े गए और न ही उनका इस मामले से कोई सीधा संबंध है।  उनके वकील ने यह भी तर्क दिया कि पुलिस द्वारा बताया गया उनका आपराधिक इतिहास निराधार है और किसी भी मामले में वे दोषी सिद्ध नहीं हुए हैं।

अदालत ने साफ कर दी हैं जमानत की शर्तें
 सत्र न्यायाधीश दिवाकर प्रसाद चतुर्वेदी ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि देवता यादव मौके से गिरफ्तार नहीं हुए थे।  अदालत ने यह भी संज्ञान लिया कि उन पर लगाए गए अपराधों में अधिकतम सजा सात वर्ष से कम है और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के तहत उन्हें अग्रिम जमानत दी जा सकती है।

अदालत ने ₹30,000 के व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही राशि की दो जमानतें दाखिल करने की शर्त पर देवता यादव को अग्रिम जमानत प्रदान कर दी।  कोर्ट ने आदेश दिया कि यह जमानत मामले के अंतिम निस्तारण तक प्रभावी रहेगी।  इस फैसले से पुलिस की जांच पर तो कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन आरोपी को जेल जाने से फिलहाल राहत मिल गई है।

देवता यादव पर इनाम घोषित कर खामोश हो गयी थी पुलिस
इस मामले को लेकर चंदौली पुलिस के कई आला अधिकारी शुरू में सही-सही जानकारी देने से कतराते रहे। मुगलसराय कोतवाल और क्षेत्राधिकारी (सीओ) के अलावा मामले की जांच करने वाले अधिकारियों को भी इसके मामले में कोई पुख्ता जानकारी नहीं थी। हालांकि, बाद में चंदौली समाचार के कोर्ट से जुड़े सूत्रों ने स्पष्ट किया कि 50 हजार के इनामी सुनील उर्फ देवता यादव ने चंदौली कोर्ट से अग्रिम जमानत हासिल कर ली है। अब वह जेल नहीं जाएगा। अधिकारियों के बीच इस तरह की अनभिज्ञता ने पुलिस महकमे के भीतर तालमेल की कमी को उजागर कर रही है और यह लग रहा है कि पुलिस के अफसर नाकामी छुपाने की कोशिश कर रहे हैं। 

आपको याद होगा कि नए पुलिस कप्तान आकाश पटेल ने चंदौली कोतवाल विजय बहादुर सिंह को इसी तरह की नरमी के लिए हटा दिया था, अब देखना है कि एक इनामी बदमाश के जमानत पा लेने के मामले में क्या कार्रवाई करते हैं।