धानापुर शहादत दिवस से सपा का किनारा: सांसद वीरेंद्र सिंह बोले- स्मारक समिति सत्ता पक्ष के दबाव में कर रही काम

 

धानापुर में शहादत दिवस कार्यक्रम से पहले सियासी पारा चढ़ गया है। सपा सांसद वीरेंद्र सिंह, विधायक प्रभु नारायण यादव और पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्लू ने स्मारक समिति पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कार्यक्रम के बहिष्कार का ऐलान किया है।

 
 

धानापुर शहादत दिवस कार्यक्रम से सपा का किनारा

शहीद स्मारक समिति पर सत्ता पक्ष के दबाव का आरोप

सभी शहीदों की प्रतिमाएं लगाने के लिए 20 लाख स्वीकृत

सांसद वीरेंद्र सिंह ने उठाई सभी वीरों के सम्मान की मांग

प्रतिमाएं लगने तक कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे सपा नेता

चंदौली जिले के धानापुर कस्बे में स्थित शहीद स्मारक पर आयोजित होने वाले शहादत दिवस कार्यक्रम से पहले राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। समाजवादी पार्टी ने इस बार के कार्यक्रम से पूरी तरह दूर रहने का फैसला किया है। सपा सांसद वीरेंद्र सिंह, सकलडीहा विधायक प्रभु नारायण यादव और पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्लू इस आयोजन में शामिल नहीं होंगे। नेताओं ने स्मारक समिति की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

सत्ता पक्ष के दबाव में काम करने का आरोप
चंदौली से सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने शहीद स्मारक समिति पर सत्ता पक्ष के प्रभाव में काम करने का सीधा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के लिए अपनी जान न्योछावर करने वाले सभी वीरों का स्थान बराबर है। इसलिए स्मारक स्थल पर किसी एक या कुछ लोगों के बजाय आजादी की लड़ाई में शहीद हुए सभी वीरों की प्रतिमाएं लगाई जानी चाहिए, ताकि सबको एक समान सम्मान मिल सके।

20 लाख का बजट मिलने के बाद भी काम अधूरा
सांसद ने साफ किया कि उन्होंने अपने प्रयासों से सभी शहीदों की प्रतिमाएं स्थापित करने के लिए 20 लाख रुपये का बजट स्वीकृत कराया था। इसके बावजूद बाकी शहीदों की मूर्तियां अभी तक नहीं लगाई गई हैं। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि शहीद स्मारक किसी एक पार्टी या व्यक्ति की संपत्ति नहीं है, बल्कि यह देश के लिए बलिदान देने वाले हर वीर योद्धा की याद का प्रतीक है।

मांग पूरी होने तक जारी रहेगा बहिष्कार
सपा नेताओं का कहना है कि जब तक धानापुर शहीद स्मारक पर सभी शहीदों की प्रतिमाएं नहीं लग जातीं, तब तक सपा का कोई भी नेता या कार्यकर्ता शहादत दिवस के कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेगा। सांसद ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद किसी कार्यक्रम का विरोध करना नहीं, बल्कि हर शहीद को बराबरी का हक और सम्मान दिलाना है। उन्होंने प्रशासन से स्वीकृत बजट का इस्तेमाल कर जल्द से जल्द प्रतिमाएं लगवाने की मांग की है।