16 अगस्त को क्यों मनाया जाता है धानापुर में शहीद दिवस? जानिए अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने वाले अमर बलिदानियों की पूरी कहानी

 

1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान चंदौली के धानापुर थाने पर क्रांतिकारियों ने तिरंगा फहराकर अंग्रेजों को खुली चुनौती दी थी। 10 दिनों तक थाने पर तिरंगा फहराता रहा। इस अमर गाथा और शहीदों के बलिदान की पूरी कहानी पढ़ें।

 
 

अगस्त 1942 में धानापुर थाने पर फहराया तिरंगा

16 से 26 अगस्त तक फहराता रहा तिरंगा

अंग्रेजों की अंधाधुंध गोलाबारी में कई वीर शहीद

ब्रिटेन की संसद तक हुई धानापुर कांड की चर्चा

हर साल 16 अगस्त को मनाया जाता शहीद दिवस

देश की आजादी की लड़ाई में उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के धानापुर की धरती का नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। सन 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान यहां के क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत को ऐसी चुनौती दी थी, जिसकी गूंज सात समंदर पार ब्रिटेन की संसद तक सुनाई दी थी।

महात्मा गांधी के आह्वान पर जब देशभर में आंदोलन की ज्वाला सुलग रही थी, तब धानापुर और आसपास का इलाका अंग्रेजी शासन के खिलाफ विद्रोह का सबसे बड़ा केंद्र बन गया था। स्थानीय ग्रामीणों और स्वतंत्रता सेनानियों के मन में अंग्रेजी हुकूमत के जुल्मों को लेकर भारी आक्रोश था।

अंग्रेजों की गोलियों को धता बताकर फहराया तिरंगा
16 अगस्त 1942 का दिन इतिहास में अमर हो गया। उस दिन हजारों की संख्या में देशभक्त और क्रांतिकारी धानापुर थाने पर तिरंगा फहराने के इरादे से निकल पड़े। अंग्रेजी पुलिस को इसकी भनक पहले ही लग चुकी थी, इसलिए उन्होंने थाने की सुरक्षा बढ़ा दी थी और आंदोलनकारियों को रोकने की पूरी तैयारी कर रखी थी।

जैसे ही जनसैलाब थाने के करीब पहुंचा, अंग्रेजी पुलिस ने भीड़ पर अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। गोलियों की बौछार और मौत को सामने देखकर भी हमारे वीरों का हौसला नहीं टूटा। वे अपनी जान की परवाह किए बिना आगे बढ़ते रहे और आखिरकार अंग्रेजी पुलिस को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।

हीरा सिंह, रघुनाथ सिंह और महंगू सिंह का अमर बलिदान
पुलिस की इस बर्बर गोलीबारी में हीरा सिंह, रघुनाथ सिंह और महंगू सिंह समेत कई जांबाज स्वतंत्रता सेनानी मौके पर ही शहीद हो गए। कई अन्य देशभक्त गंभीर रूप से घायल हुए। लेकिन इन वीरों के बलिदान ने आंदोलनकारियों के सीने में आजादी की आग को और तेज कर दिया। हमारे क्रांतिकारियों ने पूरे गर्व के साथ धानापुर थाने पर तिरंगा फहरा दिया। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि 16 अगस्त से लेकर 26 अगस्त 1942 तक, यानी पूरे 10 दिनों तक धानापुर थाने पर आजाद भारत का तिरंगा फहराता रहा और अंग्रेजी प्रशासन बेबस नजर आया।

ब्रिटेन की संसद तक गूंजी थी धानापुर की ललकार
धानापुर थाने पर आम जनता का कब्जा और लगातार 10 दिनों तक तिरंगा फहराने की इस घटना ने ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिलाकर रख दी थी। इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि इस घटना की गूंज और चर्चा ब्रिटेन की संसद (हाउस ऑफ कॉमन्स) में भी हुई थी। अंग्रेजी सरकार ने बाद में इस विद्रोह को दबाने के लिए भारी दमनचक्र चलाया और कई लोगों को गिरफ्तार किया, लेकिन धानापुर के वीरों ने जो अलख जगाई थी, उसने पूरे पूर्वांचल में आजादी की लड़ाई को एक नई दिशा दे दी थी।

हर साल 16 अगस्त को मनाया जाता है शहीद दिवस
धानापुर थाना कांड में देश के लिए अपनी जान कुर्बान करने वाले अमर सेनानियों की याद में हर साल 16 अगस्त को 'शहीद दिवस' मनाया जाता है। धानापुर स्थित शहीद स्मारक और शहीद पार्क में भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस दिन क्षेत्र के लोग, जनप्रतिनिधि और नई पीढ़ी के युवा शहीद स्मारक पर एकत्रित होकर अमर बलिदानियों को श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं। यह शहीद स्मारक आज भी आने वाली पीढ़ियों को यह याद दिलाता है कि हमें यह आजादी कितनी बड़ी कुर्बानियों, त्याग और संघर्षों के बाद मिली है।