नगर और गांवों में पकड़े जाएंगे आवारा कुत्ते, नसबंदी और टीकाकरण की तैयारी

ग्रामीण क्षेत्रों में एक अनुमान के मुताबिक 25 हजार से अधिक आवारा कुत्ते हैं। 21वीं पशु गणना में कुत्तों को भी शामिल किया गया है और जल्द ही उनकी सटीक संख्या जारी होगी।
 

नगर और गांवों की सड़कों से हटेंगे आवारा कुत्ते

सीएम योगी के निर्देश पर प्रशासन तैयार

शासन की गाइडलाइन पर होगी कुत्तों की पकड़-धकड़

नसबंदी और टीकाकरण से मिलेगा आतंक से छुटकारा

चंदौली जिले में आवारा कुत्तों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा। कभी घरों में घुसकर, तो कभी स्कूल और अस्पताल में जाकर ये कुत्ते लोगों के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। इसी समस्या को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नगर पालिका और पंचायतीराज विभाग को निर्देश दिए हैं कि आवारा कुत्तों को पकड़कर आश्रय गृहों में रखा जाए और उनकी नसबंदी व टीकाकरण की प्रक्रिया शुरू कराई जाए।

शासन की गाइडलाइन पर होगी कार्रवाई

डीपीआरओ नीरज सिन्हा ने बताया कि शासनादेश जारी होते ही पूरे जिले में आवारा कुत्तों को पकड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। पकड़े गए कुत्तों को सुरक्षित आश्रय गृह में रखा जाएगा। यह अभियान सुप्रीम कोर्ट के आदेश और मुख्यमंत्री के निर्देशों के तहत चलाया जाएगा।

स्कूल में बच्चे पर हमला

हाल ही में नौगढ़ ब्लॉक के कंपोजिट स्कूल बाघी में घुसे एक आवारा कुत्ते ने 11 वर्षीय छात्र मेराज पर हमला कर दिया था। डॉक्टरों का कहना है कि बारिश के मौसम में भोजन की कमी और प्रजनन काल के चलते कुत्तों का स्वभाव आक्रामक हो जाता है। यही कारण है कि वे लोगों पर हमला कर देते हैं।

25 हजार से अधिक आवारा कुत्ते

ग्रामीण क्षेत्रों में एक अनुमान के मुताबिक 25 हजार से अधिक आवारा कुत्ते हैं। 21वीं पशु गणना में कुत्तों को भी शामिल किया गया है और जल्द ही उनकी सटीक संख्या जारी होगी।

रेबीज का खतरा

उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी जेके चौहान ने बताया कि रेबीज वायरस हवा या किसी जंगली जानवर से कुत्तों तक पहुंचता है। यदि यह वायरस उनके शरीर में प्रवेश कर जाता है तो चार से छह सप्ताह में मस्तिष्क को प्रभावित कर देता है। ऐसे कुत्ते आक्रामक होकर लोगों को काट सकते हैं और यही स्थिति पागलपन कहलाती है। ऐसे मामलों से बचने के लिए टीकाकरण और नसबंदी बेहद जरूरी है।

अभियान से मिलेगी राहत

अधिकारियों का कहना है कि नसबंदी और टीकाकरण अभियान शुरू होने के बाद न केवल कुत्तों की बढ़ती संख्या पर रोक लगेगी, बल्कि रेबीज जैसी बीमारियों का खतरा भी कम होगा। इससे नगर और गांवों में आवारा कुत्तों के आतंक से जनता को काफी हद तक राहत मिलेगी।