चंदौली में गंगा का रौद्र रूप: खतरे के निशान से सिर्फ 60 सेमी दूर जलस्तर,  40 से अधिक गांवों पर मंडराया बाढ़ का खतरा

चंदौली में गंगा नदी का जलस्तर एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेजी से बढ़ रहा है। पानी खतरे के निशान से महज 60 सेमी नीचे है, जिससे तटीय इलाकों के 40 से अधिक गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।
 

गंगा नदी का जलस्तर 70.66 मीटर पहुँचा

खतरे के निशान से 60 सेमी दूर

1 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़त

40 से अधिक गांवों में बाढ़ का खतरा

प्रशासन मुस्तैद, एनडीआरएफ की टीमें अलर्ट

चंदौली जिले से होकर गुजरने वाली गंगा नदी का जलस्तर बीते कुछ दिनों से तेजी से बढ़ रहा है। नदी का पानी चेतावनी बिंदु को पार करते हुए अब खतरे के निशान की तरफ तेजी से अग्रसर है। वर्तमान में गंगा नदी का जलस्तर 70.66 मीटर दर्ज किया गया है और यह एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से लगातार बढ़ रहा है।

खतरे के निशान से महज 60 सेंटीमीटर दूर पानी
गंगा नदी का जलस्तर अब खतरे के निशान से महज 60 सेंटीमीटर नीचे रह गया है। पानी के इतनी तेज गति से बढ़ने के कारण नदी के तटीय इलाकों और किनारे बसे गांवों के निवासियों में भय और दहशत का माहौल व्याप्त हो गया है। ग्रामीणों को डर सता रहा है कि यदि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा, तो नदी जल्द ही खतरे के निशान को पार कर तबाही मचा सकती है।

40 से ज्यादा गांवों पर मंडराया बाढ़ का संकट
चंदौली जनपद के पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर और सकलडीहा तहसील क्षेत्र के 40 से भी अधिक गांव गंगा नदी के तट पर बसे हुए हैं। हर साल गंगा में बाढ़ आने से सबसे अधिक नुकसान इन्हीं गांवों के लोगों को उठाना पड़ता है। बाढ़ के चलते पशुओं के चारे का संकट, खड़ी फसलों की तबाही और जमीनों के कटान जैसी बेहद गंभीर समस्याएं पैदा हो जाती हैं।

फसलें और चारा बर्बाद होने की आशंका
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, नदी का पानी अब तेजी से खेतों की ओर फैलने लगा है। पूरा विजयी गांव के निवासी राजेश और कोहड़ा गांव के सोनू सिंह ने बताया कि यदि पानी इसी रफ्तार से बढ़ता रहा तो दर्जनों गांवों की फसलें पूरी तरह जलमग्न हो जाएंगी। इससे किसानों की मेहनत के साथ-साथ पशुओं के लिए बोया गया चारा भी बर्बाद हो जाएगा।

 बाढ़ चौकियां और NDRF सक्रिय
मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर जिलाधिकारी (एडीएम) राजेश कुमार ने बताया कि जिला प्रशासन संभावित बाढ़ की स्थिति को लेकर पूरी तरह सतर्क है। क्षेत्र में बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है और एनडीआरएफ (NDRF) की टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। इसके साथ ही संबंधित तहसीलों के प्रशासनिक अधिकारी लगातार गंगा के तटीय इलाकों का दौरा कर रहे हैं और ग्रामीणों से संवाद बनाकर स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।