चंदौली के किसानों के लिए एक और खुशखबरी, मखाना और सिंघाड़े की खेती से बढ़ा सकते हैं अपनी आमदनी
चंदौली में नई खेती की पहल शुरू करने की तैयारी
किसानों को मिलेगा प्रति हेक्टेयर खेती के लिए अनुदान
पहले आओ पहले पाओ के आधार पर होगा किसान का चयन
मखाना और सिंघाड़े की खेती को और विस्तार देने की योजना
चंदौली जिले के धान के कटोरे के रूप में विख्यात चंदौली जिले में अब मखाना और सिंघाड़े की खेती को भी बढ़ावा दिया जाएगा। एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के तहत जिले में पहली बार इन दोनों फसलों के लिए लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए शासन ने उद्यान विभाग को वित्तीय वर्ष 2025-26 में मखाना और सिंघाड़े की खेती के लिए पांच हजार का लक्ष्य प्रदान किया है। इस योजना का उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि करना और कृषि को लाभकारी बनाना है।
किसानों को मिलेगा अनुदान
आपको बता दें कि योजना के तहत चयनित किसानों को मखाने की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 40,000 रुपये और सिंघाड़े के लिए 30,000 रुपये तक का अनुदान प्रदान किया जाएगा। किसानों का चयन “पहले आओ पहले पाओ” के आधार पर किया जाएगा। इस तरह से पहले आवेदन करने वाले योग्य किसान ही इस योजना का लाभ उठा सकेंगे।
कौन कर सकता है आवेदन
किसान इस योजना का लाभ ऑनलाइन या उद्यान विभाग के कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के लिए आधार कार्ड, खसरा-खतौनी, बैंक पासबुक और फोटो जमा करना अनिवार्य होगा। इससे योजना में पारदर्शिता और सरलता सुनिश्चित होगी।
खेती का विस्तार
वित्तीय वर्ष 2025-26 में योजना के तहत तीन हेक्टेयर में मखाना और दो हेक्टेयर में सिंघाड़े की खेती कराई जाएगी। इससे पारंपरिक धान और गेहूं के साथ-साथ नगदी फसलों की खेती को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
स्वास्थ्य लाभ
मखाना स्वास्थ्यवर्धक फसल है। इसमें फाइबर कम, लेकिन फ्लेवोनोइड्स और पॉलीफेनोल्स जैसे एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यह हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है और डायबिटीज़ या उच्च रक्तचाप के मरीजों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। मखाना को भूनकर नाश्ते में या विभिन्न व्यंजनों में प्रयोग किया जा सकता है। सिंघाड़े में भी एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन और खनिजों की मात्रा अधिक होती है, जिससे यह स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है।
सरकारी उद्देश्य
शासन का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ-साथ मखाना और सिंघाड़े जैसी नगदी फसलों की खेती कर अधिक लाभ दिलाना है। यह न केवल किसानों की आय बढ़ाएगा बल्कि जिले में कृषि क्षेत्र में विविधता भी लाएगा।
तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण
योजना में चयनित किसानों को खेती की तकनीकी जानकारी और प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। इससे किसानों को बेहतर उत्पादन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी और फसल की गुणवत्ता उच्च रहेगी।
आर्थिक और सामाजिक महत्व
मखाना और सिंघाड़े की खेती से स्थानीय कृषि बाजार सशक्त होगा। किसानों को अधिक विकल्प मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और युवा पीढ़ी को भी कृषि में आकर्षित किया जा सकेगा।
इस योजना के माध्यम से चंदौली जिले में मखाना और सिंघाड़े की खेती को बढ़ावा मिलेगा। यह कदम न केवल किसानों की आमदनी बढ़ाएगा बल्कि स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद भी उपलब्ध कराएगा।