चंदौली में महिलाओं का फूटा गुस्सा, कलेक्ट्रेट का घेराव कर डीएम से बोलीं- शराब ठेका बंद करो या हमारे घर का खर्चा उठाओ!

चंदौली के जमसोती गांव में शराब ठेके को लेकर बवाल बढ़ गया है। डीएम के आदेश के बाद भी दुकान बंद न होने से नाराज महिलाओं ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया और डीएम को सीधी चुनौती दे डाली। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।
 

जमसोती गांव की महिलाओं का कलेक्ट्रेट मार्च

शराब ठेका बंद कराने की सीधी चुनौती

डीएम चंद्र मोहन गर्ग के सख्त निर्देश

समाधान दिवस के आश्वासन पर उठे सवाल

मांग पूरी न होने पर अनशन की चेतावनी
 

चंदौली जिले के नौगढ़ इलाके में आने वाले जमसोती गांव में शराब के ठेके को लेकर विवाद अब काफी बढ़ गया है। प्रशासन के पुराने आश्वासनों और निर्देशों के बावजूद जब शराब की दुकान बंद नहीं हुई, तो गांव की महिलाओं के सब्र का बांध टूट गया। बुधवार को भारी संख्या में महिलाओं ने कलेक्ट्रेट दफ्तर पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया और सीधे जिलाधिकारी के पास जा पहुंचीं।

महिला स्वास्थ्य अधिकार मंच की कोऑर्डिनेटर नीतू सिंह और जमसोती के ग्राम प्रधान यशवंत सिंह यादव के नेतृत्व में महिलाओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में अपनी आवाज बुलंद की। इस विरोध प्रदर्शन से पूरे सरकारी अमले में हड़कंप मच गया।

"डीएम साहब! ठेका बंद कराइए या फिर हमारे घर का खर्चा दीजिए"
कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने जिलाधिकारी से सीधे और तीखे सवाल किए। महिलाओं ने दोटूक लहजे में कहा, "डीएम साहब, अगर गांव में यह शराब का ठेका बंद नहीं हुआ, तो हमारे बर्बाद हो रहे परिवारों के पालन-पोषण का खर्चा भी अब आपको ही तय करना होगा।"

महिलाओं की इस सीधी और बेबाक चुनौती को सुनकर वहां मौजूद हर कोई हैरान रह गया। महिलाओं का कहना था कि शराब की वजह से उनके घरों में रोज झगड़े हो रहे हैं और पुरुषों की इस लत के कारण पूरा परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गया है।

समाधान दिवस का आश्वासन निकला बेअसर
ग्राम प्रधान यशवंत सिंह यादव ने बताया कि यह कोई नया मामला नहीं है। इससे पहले बीते शनिवार को संपूर्ण समाधान दिवस में भी उन्होंने खुद जिलाधिकारी से मुलाकात की थी। उस समय उन्होंने गांव में बढ़ रहे सामाजिक तनाव और घरेलू हिंसा का हवाला देते हुए शराब की दुकान को हटाने की मांग की थी।

समाधान दिवस में अधिकारियों ने भरोसा तो दिया था, लेकिन जमीन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। दुकान लगातार चलती रही, जिससे परेशान होकर महिलाओं को मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ा।

डीएम चंद्र मोहन गर्ग ने अधिकारियों को फोन पर लगाई फटकार
मामले की गंभीरता और महिलाओं के भारी गुस्से को देखते हुए डीएम चंद्र मोहन गर्ग ने तुरंत एक्शन लिया। उन्होंने बातचीत के लिए महिलाओं के प्रतिनिधिमंडल को अंदर बुलाया। इसके तुरंत बाद डीएम ने मौके से ही जिला आबकारी अधिकारी और एसडीएम नौगढ़ को फोन मिला दिया।

जिलाधिकारी ने दोनों जिम्मेदार अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश दिए कि इस मामले को बिल्कुल भी हल्के में न लिया जाए। उन्होंने साफ कहा कि जमसोती गांव की इस आबकारी दुकान को बंद कराने की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर तुरंत पूरा किया जाए।

मांगें पूरी न होने पर महिलाओं ने दी अनशन की चेतावनी
महिला स्वास्थ्य अधिकार मंच की नीतू सिंह ने कहा कि महिलाएं अब सिर्फ शिकायतें लेकर अधिकारियों के चक्कर नहीं काटेंगी। यह उनके घर और बच्चों के भविष्य का सवाल है। अगर प्रशासन अब भी सिर्फ कागजी कार्रवाई करता रहा, तो गांव की महिलाएं कलेक्ट्रेट परिसर में ही अनशन पर बैठने के लिए मजबूर होंगी।

फिलहाल, इस बड़े आंदोलन के बाद प्रशासन पर जमीनी कार्रवाई करने का भारी दबाव है। अब देखना यह होगा कि डीएम साहब का यह नया आदेश वाकई जमीन पर लागू होता है या फिर यह मामला भी सरकारी फाइलों में ही दबा रह जाता है।