वकीलों की डर से कोर्ट में पेश नहीं हुआ हत्यारा भाई, पिटाई से बचाने के लिए मजिस्ट्रेट को जाना पड़ा कोतवाली
वकील की हत्या का आरोपी 3 दिन बाद गिरफ्तार
वकीलों के आक्रोश से पुलिस ने कोर्ट में पेश नहीं किया
मजिस्ट्रेट को पुलिस लाइन बुलाकर करायी कोर्ट की प्रक्रिया
चंदौली जिले के के सिरसी गांव में अधिवक्ता कमला यादव की हत्या के मामले में पुलिस ने उनके रिटायर दरोगा भाई दंगला यादव को गिरफ्तार कर लिया है। इस घटना के बाद वकीलों में भारी आक्रोश को देखते हुए, पुलिस ने आरोपी को सीधे अदालत में पेश करने के बजाय, मजिस्ट्रेट को पुलिस लाइन बुलाकर न्यायिक प्रक्रिया पूरी की और उसे सीधे जिला जेल भेज दिया। पुलिस ने यह कदम आरोपी की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए उठाया।
जानिए क्या है पूरा मामला
सिरसी गांव के निवासी अधिवक्ता कमला यादव की गुरुवार को उनके भाई दंगला यादव ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद से ही जिले के वकील गुस्से में थे और आरोपी की जल्द से जल्द गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे।
पुलिस अधीक्षक आदित्य लांग्हे के निर्देश पर पुलिस टीम आरोपी की तलाश में जुटी थी। रविवार को प्रभारी निरीक्षक संजय सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम जगदीश सराय के पास वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान, मुखबिर से सूचना मिली कि आरोपी दंगला यादव बनौली जाने वाली नहर के रास्ते से अपने रिश्तेदार के यहां भागने की फिराक में है।
घेराबंदी कर पकड़ा गया आरोपी
मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम तुरंत नहर के पास पहुंची। वहां एक व्यक्ति को पैदल जाते देख पुलिस ने उसे रुकने का इशारा किया, लेकिन वह भागने लगा। पुलिस ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। पूछताछ में उसकी पहचान 68 वर्षीय दंगला यादव के रूप में हुई। तलाशी लेने पर उसके पास से एक रिवाल्वर बरामद हुई, जिसका इस्तेमाल उसने अपने भाई की हत्या के लिए किया था।
सुरक्षा कारणों से बदला तरीका
आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को वकीलों के आक्रोश का अंदाजा था। उन्हें यह डर था कि अदालत में पेशी के दौरान आरोपी पर हमला हो सकता है, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। इस स्थिति से बचने के लिए, पुलिस ने एक असामान्य कदम उठाया। उन्होंने मजिस्ट्रेट को पुलिस लाइन बुलाया, जहां न्यायिक कार्यवाही पूरी की गई और आरोपी को सीधे जेल भेज दिया गया।
इस गिरफ्तारी को अंजाम देने वाली टीम में प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार सिंह, उप निरीक्षक कन्हैया लाल मौर्य, उप निरीक्षक रावेन्द्र सिंह, हेड कांस्टेबल रवि शंकर प्रसाद, कांस्टेबल बीर बहादुर यादव और कांस्टेबल सत्यप्रकाश शामिल थे।