पंचायत भवन के लिए गांवों में नहीं मिल रही जमीन, लटके हुए हैं 28 पंचायतों के सचिवालय

जिले के नौ ब्लॉकों में कुल 734 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें से अधिकांश में सचिवालय भवन बन चुका है और सेवाएं संचालित हैं। लेकिन जिन 28 पंचायतों में भवन नहीं बन पाया है।
 

734 ग्राम पंचायतों में 28 अब भी भवन विहीन

विवादित भूमि मामलों में अटका निर्माण

ग्रामीणों को शहर और तहसील के लगाने पड़ते हैं चक्कर

जिला पंचायत राज अधिकारी केवल दे रहे हैं अपनी ओर से सफाई

चंदौली जिले में प्रदेश सरकार की योजना के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में सचिवालय का निर्माण किया जाना है, ताकि ग्रामीणों को अपने ही गांव में सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। लेकिन जिले में 28 पंचायतें ऐसी हैं जहां आज तक सचिवालय भवन नहीं बन सका है। इसका मुख्य कारण है जमीन का अभाव और कई जगहों पर भूमि विवाद।

आपको बता दें कि सरकार की मंशा है कि ग्राम सचिवालय के जरिये ग्रामीणों को पेंशन, आय, जाति, निवास, दिव्यांग प्रमाण पत्र जैसी सेवाएं गांव में ही आसानी से मिलें। साथ ही यहां जनसुविधा केंद्र की तरह बैंकिंग और इंटरनेट सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाएं। लेकिन सचिवालय भवन न होने से इन 28 पंचायतों के ग्रामीणों को आज भी बुनियादी जरूरतों के लिए तहसीलों और शहरों का चक्कर लगाना पड़ता है। इससे उन्हें समय और धन दोनों की हानि उठानी पड़ती है।

बताते चलें कि जिले के नौ ब्लॉकों में कुल 734 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें से अधिकांश में सचिवालय भवन बन चुका है और सेवाएं संचालित हैं। लेकिन जिन 28 पंचायतों में भवन नहीं बन पाया है, वहां ग्रामीणों को दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। कुछ जगहों पर जमीन की उपलब्धता न होने और कुछ जगहों पर पंचायत भवन को लेकर विवाद होने के कारण निर्माण अटका हुआ है। कई मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं।

विभाग का दावा है कि सचिवालय न होने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत किराए के भवनों में सेवाएं दी जा रही हैं। वहां कम्प्यूटर, इंटरनेट और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। अधिकारी बताते हैं कि जिन पंचायतों में जमीन उपलब्ध हो रही है, वहां सचिवालय का निर्माण कार्य तेजी से कराया जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि सचिवालय भवन न होने से उनका काफी समय बर्बाद होता है। कई बार पेंशन, आय, जाति या अन्य प्रमाण पत्र बनवाने के लिए दिनभर की मशक्कत करनी पड़ती है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि सचिवालय गांव में ही बने तो उन्हें योजनाओं का लाभ समय पर और सहजता से मिल सकेगा।

इस संबंध में जिला पंचायत राज अधिकारी नीरज सिन्हा का कहना है कि शासन की मंशा के अनुसार जिले की सभी पंचायतों में सचिवालय संचालित हैं। जहां भवन नहीं है, वहां वैकल्पिक व्यवस्था के तहत सचिवालय कार्य कर रहे हैं। शीघ्र ही भूमि उपलब्ध कराकर शेष पंचायतों में भी भवन निर्माण पूरा कराया जाएगा।