मेडिकल कॉलेज में दवाओं की किल्लत का मुद्दा छाया, प्रभारी मंत्री रहे मौन तो विधायक ने की जांच कराने की मांग
मेडिकल कॉलेज संचालन में फोर्थ क्लास कर्मचारियों की है चांदी
कर रहे दूसरे पदों पर काम
क्लर्क का काम कर रहे हैं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी
चंदौली जिले के मेडिकल कॉलेज से संबद्ध पंडित कमलापति त्रिपाठी चिकित्सालय में दवाओं की भारी कमी और प्रशासनिक अव्यवस्था का मुद्दा गुरुवार को प्रभारी मंत्री संजीव गोंड की प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रमुखता से छाया रहा। पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में आयोजित इस प्रेस वार्ता में पत्रकारों ने जब मेडिकल कॉलेज में मरीजों को पिछले 13 दिनों से दवाएं न मिलने का सवाल उठाया, तो प्रभारी मंत्री इस पर मौन साधे रहे।
वहीं, इस गंभीर विषय पर मुगलसराय विधायक रमेश जायसवाल ने मरीजों की पीड़ा को देखते हुए तत्काल जिलाधिकारी से वार्ता कर दवाओं की आपूर्ति बहाल कराने और अस्पताल में व्याप्त भ्रष्टाचार की जांच कराने की मांग की। विधायक रमेश जायसवाल ने स्पष्ट कहा कि मेडिकल कॉलेज में हो रही अनियमितताओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मरीजों को इलाज और दवाएं मिलना उनका अधिकार है, और इस अधिकार से किसी को वंचित नहीं किया जा सकता।
सूत्रों के अनुसार, मेडिकल कॉलेज परिसर में वित्तीय कार्यों का संचालन बाबू के बजाय फोर्थ क्लास कर्मचारियों से कराया जा रहा है, जिससे व्यवस्था चरमराई हुई है। आरोप है कि सत्ता पक्ष से जुड़े कुछ फोर्थ क्लास कर्मचारी प्रशासन पर दबाव बनाकर मनमानी कर रहे हैं, जिसके चलते मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य तक असहाय महसूस कर रहे हैं।
इस दौरान विधायक रमेश जायसवाल ने स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर मेडिकल कॉलेज में भ्रष्टाचार और अव्यवस्था जारी रही, तो वह जनप्रतिनिधि होने के नाते ऐसे लोगों को बेनकाब करेंगे और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित कराएंगे। उन्होंने कहा कि जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वहीं जिलाधिकारी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आश्वासन दिया कि मेडिकल कॉलेज की दवा आपूर्ति और प्रशासनिक गड़बड़ियों की तत्काल जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि मरीजों को किसी भी परिस्थिति में परेशानी नहीं होनी चाहिए और जल्द ही स्थिति सामान्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपस्थित लोगों ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए सरकार से पारदर्शी कार्रवाई की मांग की। फिलहाल, मेडिकल कॉलेज में दवाओं की किल्लत और अंदरूनी गड़बड़ियों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।