चिकित्सा महाविद्यालय में MRI और ECHO जांच की सुविधा जल्द होगी शुरू

चंदौली की करीब 24.50 लाख की आबादी चिकित्सा महाविद्यालय पर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए निर्भर है। इसके अलावा बिहार के बक्सर और कैमूर जिलों के गांवों से भी बड़ी संख्या में मरीज यहां आते हैं।
 

चिकित्सा महाविद्यालय में MRI और ECHO की शुरुआत

एक साल में दोनों जांचें होंगी उपलब्ध

नवनिर्मित OPD भवन से बढ़ी सहूलियत

एक ही छत के नीचे होगी सभी जांच सुविधाएं

चंदौली जिले के चिकित्सा महाविद्यालय में स्वास्थ्य सुविधाओं को और सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। प्रशासन ने दावा किया है कि अगले एक साल के भीतर यहां एमआरआई (मैग्नेटिक रेज़ोनेंस इमेजिंग) और इको (इकोकार्डियोग्राम) जांच की सुविधा उपलब्ध करा दी जाएगी। इन दोनों सुविधाओं के अभाव में फिलहाल मरीजों को वाराणसी स्थित सर सुंदरलाल चिकित्सालय या निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों का सहारा लेना पड़ता है, जहां उन्हें जांच कराने में हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इस कदम से न सिर्फ जनपद, बल्कि आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को भी बड़ी राहत मिलेगी।

एक साल में मिलेगी नई सुविधा

आपको बता दें कि चिकित्सा महाविद्यालय प्रशासन ने जांच सेवाएं शुरू कराने के लिए कवायद तेज कर दी है। उप प्राचार्य डॉ. नैसी पारुल ने बताया कि मशीनों की खरीद और संचालन की अनुमति हेतु शासन को पत्राचार किया गया है। उन्होंने भरोसा जताया कि आगामी एक वर्ष के भीतर मरीजों को अस्पताल परिसर में ही यह दोनों सेवाएं मिलने लगेंगी।

आबादी को मिलेगा लाभ

चंदौली की करीब 24.50 लाख की आबादी चिकित्सा महाविद्यालय पर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए निर्भर है। इसके अलावा बिहार के बक्सर और कैमूर जिलों के गांवों से भी बड़ी संख्या में मरीज यहां आते हैं। आंकड़ों के अनुसार, प्रतिदिन हजारों की संख्या में नए और पुराने मरीज इस अस्पताल में पंजीकरण कराते हैं।

नए भवन से बढ़ी सहूलियत

मरीजों की बढ़ती संख्या और दबाव को देखते हुए महाविद्यालय प्रशासन ने अधिकांश विभागों को नवनिर्मित ओपीडी भवन में शिफ्ट कर दिया है। साथ ही, आपातकालीन विभाग को भी इस भवन के भूतल से संचालित कराया जा रहा है। चिकित्सकों का मानना है कि आधुनिक जांच सुविधाएं मिलने के बाद उपचार की गुणवत्ता और भी बेहतर होगी।

हृदय रोगियों के लिए अहम कदम

महाविद्यालय परिसर में प्रत्येक गुरुवार को कार्डियक ओपीडी संचालित की जाती है। विशेषज्ञ चिकित्सकों का कहना है कि हृदय संबंधी मरीजों के उपचार में इको जांच अत्यंत आवश्यक है। यह टेस्ट हृदय की कार्यप्रणाली का आकलन करता है, जिससे डॉक्टरों को मरीज की स्थिति स्पष्ट रूप से समझने में मदद मिलती है। वहीं, जटिल बीमारियों की पहचान में एमआरआई जांच की भूमिका महत्वपूर्ण है।

निजी केंद्रों पर महंगा इलाज

वर्तमान समय में मरीजों को मजबूरन निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों का सहारा लेना पड़ता है। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. भूपेंद्र वर्मा बताते हैं कि इको और एमआरआई जैसी जांचों के लिए मरीजों को हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं, जबकि यह सेवाएं सरकारी स्तर पर उपलब्ध होने पर नि:शुल्क मिलेंगी। इससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।

एक छत के नीचे सभी जांच

चिकित्सा महाविद्यालय प्रशासन का लक्ष्य है कि मरीजों को सभी जांच सुविधाएं एक ही परिसर में मिल सकें। पं. कमलापति त्रिपाठी जिला अस्पताल से पैथोलॉजी, एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड की जांचें पहले ही नए भवन में संचालित हो रही हैं। पीआरए ब्लॉक में सभी सेवाओं को एकीकृत करने की योजना है, जिसे वर्ष 2025 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

प्रशासन का भरोसा

महाविद्यालय प्रशासन ने एमआरआई और इको जांच की सुविधा शुरू कराने के लिए महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण को पत्र लिखा है। उप प्राचार्य डॉ. नैसी पारुल का कहना है कि इन सेवाओं की उपलब्धता से मरीजों को न केवल सुविधा होगी बल्कि समय और धन दोनों की बचत होगी।

चंदौली जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में यह कदम मील का पत्थर साबित होगा। इससे न सिर्फ जनपद, बल्कि पड़ोसी जिलों और बिहार के मरीजों को भी गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक चिकित्सा जांच सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध हो सकेंगी।