MLC नामांकन के लिए 24 शिक्षकों ने मांगी छुट्टी, सोमवार सैयदराजा के नेशनल इंटर कॉलेज में नहीं होगी पढ़ाई 

 

चंदौली के नेशनल इंटर कॉलेज के 24 शिक्षकों ने अपने प्रिय शिक्षक नेता के एमएलसी नामांकन में जाने के लिए सामूहिक छुट्टी मांगी है। पर्याप्त शिक्षक न होने से प्रधानाचार्य ने सोमवार को शिक्षण कार्य स्थगित कर दिया है।

 
 

चंदौली नेशनल इंटर कॉलेज पढ़ाई ठप

शिक्षक नेता नामांकन सामूहिक अवकाश

24 शिक्षकों ने मांगी एक साथ छुट्टी

प्रधानाचार्य ने स्थगित किया शिक्षण कार्य

चंदौली जिले के सैयदराजा स्थित नेशनल इंटर कॉलेज में सोमवार को विद्यार्थियों की पढ़ाई बंद रहेगी। बताया जा रहा है कि विद्यालय के दो-तिहाई से अधिक शिक्षकों ने अपने शिक्षक नेता के एमएलसी पद के नामांकन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए एक साथ छुट्टी का आवेदन दे दिया है।

शिक्षक नेता के कार्यक्रम में जाने के लिए इतनी बड़ी संख्या में शिक्षकों के अवकाश मांगने के कारण स्कूल में पढ़ाई कराने की व्यवस्था बिगड़ गई। पर्याप्त शिक्षक न होने की स्थिति को देखते हुए प्रधानाचार्य को मजबूरी में सोमवार को छात्रों के लिए शिक्षण कार्य स्थगित करने का फैसला लेना पड़ा।

34 में से 24 शिक्षकों ने दी सामूहिक छुट्टी की अर्जी
मिली जानकारी के अनुसार नेशनल इंटर कॉलेज में कुल 34 शिक्षक कार्यरत हैं। इनमें से करीब 24 शिक्षकों ने सामूहिक रूप से छुट्टी के लिए आवेदन कर दिया। शिक्षकों के इस रवैये से विद्यालय में कक्षाओं के संचालन पर संकट खड़ा हो गया। एक साथ इतने शिक्षकों के नामांकन में जाने और छुट्टी मांगने का यह मामला अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है।

प्रधानाचार्य बोले- पढ़ाई बंद रहेगी पर खेलकूद और छात्रवृत्ति कार्य जारी रहेंगे
इस पूरे मामले पर विद्यालय के प्रधानाचार्य अनिल कुमार सिंह ने बताया कि दो-तिहाई से अधिक शिक्षकों के सामूहिक अवकाश पर रहने के कारण कक्षाएं चलाना संभव नहीं था। इसीलिए विद्यार्थियों का शिक्षण कार्य सोमवार के लिए स्थगित किया गया है।

हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यालय में जरूरी काम जारी रहेंगे। जिला स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिताओं के लिए खिलाड़ियों का चयन और ट्रायल प्रक्रिया कराई जाएगी। इसके साथ ही छात्रवृत्ति और विद्यालय के अन्य प्रशासनिक कार्य बिना रुकावट के पूरे किए जाएंगे।

पढ़ाई से ज्यादा नेतागिरी को तवज्जो? उठ रहे गंभीर सवाल
शिक्षकों द्वारा सामूहिक अवकाश लेकर नेता के कार्यक्रम में जाने और इसके चलते विद्यार्थियों की पढ़ाई बंद किए जाने को लेकर आम लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि शिक्षकों का अपने संगठनात्मक कार्यक्रमों को पढ़ाई से ज्यादा महत्व देना कितना जायज है। इस घटना से विद्यालय की साख और छात्रों की पढ़ाई दोनों पर असर पड़ रहा है।