क्रॉप सर्वे के खिलाफ पंचायत सहायकों ने शुरू की बगावत, सौरभ गुप्ता ने दिया खुलेआम इस्तीफा
चंदौली में क्रॉप सर्वे के दबाव से परेशान हैं पंचायत सहायक
सरकारी अधिकारियों के आदेश से तंग आकर पंचायत सहायक ने दिया इस्तीफा
10 और पंचायत सहायक इस्तीफा देने को हो गये हैं तैयार
चंदौली जिले के नियामताबाद ब्लॉक में चल रहे क्रॉप सर्वे (फसल सर्वेक्षण) का दबाव इतना बढ़ गया है कि एक पंचायत सहायक ने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया है। नियामताबाद विकासखंड के ग्राम पंचायत सरने में कार्यरत पंचायत सहायक सौरभ गुप्ता ने गुरुवार को, विकास खंड अधिकारी रूबेन शर्मा को अपना त्यागपत्र सौंप दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस सर्वे के कारण उन्हें अत्यधिक मानसिक और शारीरिक परेशानी हो रही थी, जिसके बाद उनके पास इस्तीफा देने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा।
इस घटना के बाद, पंचायत सहायकों के बीच आक्रोश और असंतोष का माहौल है। पंचायत सहायकों की यूनियन के अध्यक्ष सागर पटेल ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर इसी तरह अन्य विभागों के काम का बोझ उन पर डाला जाता रहा तो आज एक ने इस्तीफा दिया है, कल 10 और देंगे। उन्होंने अधिकारियों से लिखित में यह भी मांग की थी कि सर्वे के दौरान किसी भी दुर्घटना की स्थिति में प्रशासन उनकी जिम्मेदारी ले, लेकिन इस मांग को खारिज कर दिया गया।
क्या है क्रॉप सर्वे और क्यों है इतना दबाव
क्रॉप सर्वे, जिसे फसल सर्वेक्षण भी कहते हैं, एक सरकारी पहल है जिसका उद्देश्य किसानों द्वारा बोई गई फसलों, उनके रकबे और स्थान का सटीक रिकॉर्ड रखना है। यह सर्वे आधुनिक तकनीकों जैसे कि मोबाइल-आधारित प्रणालियों और सैटेलाइट इमेजरी का उपयोग करके किया जाता है। इस सर्वे से प्राप्त डेटा कृषि योजना, नीति निर्माण, फसल बीमा और आपदा मुआवजे जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के लिए आवश्यक है। यह किसानों और सरकार दोनों के लिए लाभकारी माना जाता है, क्योंकि इससे किसानों को नुकसान होने पर मुआवजा, फसल बीमा और सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिलता है। साथ ही, सरकार को सटीक डेटा से बेहतर कृषि नीतियां बनाने और कृषि क्षेत्र का आधुनिकीकरण करने में मदद मिलती है।
लेकिन, जमीनी स्तर पर इस सर्वे को पूरा करने की जिम्मेदारी जिन कर्मचारियों को दी गई है, उनके लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गया है। सौरभ गुप्ता जैसे पंचायत सहायकों को अक्सर मुश्किल क्षेत्रों में जाकर डेटा एकत्र करना पड़ता है, जिससे जोखिम बढ़ जाता है। सौरभ का इस्तीफा इसी तनाव का नतीजा है।
काफी सख्त है प्रशासन का रुख
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए, विकास खंड अधिकारी रूबेन शर्मा ने बताया कि जिन पंचायत सहायकों की ड्यूटी उनके अपने गांव के बजाय किसी अन्य स्थान पर लगाई गई थी, उन्हें उनके संबंधित ग्राम पंचायतों में वापस तैनात किया गया है। उन्होंने पंचायत सहायकों को यह भी सलाह दी कि वे केवल सूखे क्षेत्रों में ही सर्वे करें और पानी या जोखिम भरे स्थानों पर जाकर काम करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
सौरभ गुप्ता के इस्तीफे के समय बड़ी संख्या में अन्य पंचायत सहायक भी मौजूद थे, जिनमें रतन कुमार, जितेंद्र कुमार, वीरेंद्र पाल, चन्द्रबहादुर, अभिषेक, सौरभ, फैजान, अमन, अजित, प्रवीण, वेदप्रकाश, संतोष, लवली, प्रभावती देवी, ईशा, फरजाना, रुबीना, पूनम, निशा, खुशनुमा और रोजी शामिल थे। यह उपस्थिति इस बात का संकेत है कि पंचायत सहायकों के बीच असंतोष का स्तर काफी अधिक है और आने वाले दिनों में और भी इस्तीफे देखने को मिल सकते हैं, यदि उनकी चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया गया।