भारतीय रेलवे की बड़ी कामयाबी: 'कवच 4.0' से सुरक्षित हुआ 163 किमी लंबा रेल रूट, अब नहीं होगी ट्रेनों की आमने-सामने टक्कर

 

भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा मील का पत्थर पार किया है। पीडीडीयू-गया रेल रूट के 163 किलोमीटर हिस्से पर आधुनिक 'कवच 4.0' सिस्टम चालू कर दिया गया है, जिसके बाद पहली बार बुद्ध पूर्णिमा एक्सप्रेस को पूरी सुरक्षा के साथ सफलतापूर्वक चलाया गया।

 
 

पीडीडीयू-गया रूट पर कवच सिस्टम चालू

कवच सुरक्षा के साथ चली बुद्ध पूर्णिमा एक्सप्रेस

स्वदेशी तकनीक से रुकेंगी रेल दुर्घटनाएं

तीन अलग-अलग सेक्शन में हुआ काम

स्वचालित रूप से लग जाएगा ब्रेक

भारतीय रेलवे ने आत्मनिर्भरता और रेल सुरक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है। हावड़ा-दिल्ली मुख्य रेल रूट पर आने वाले पंडित दीनदयाल उपाध्याय (DDU) जंक्शन से गया के बीच 163 किलोमीटर लंबे रेल ट्रैक पर 'कवच' सुरक्षा प्रणाली को पूरी तरह चालू कर दिया गया है। इस नए सिस्टम के एक्टिव होते ही सोमवार की रात फेसर-सासाराम सेक्शन पर कवच तकनीक से लैस पहली ट्रेन संख्या 15137 बुद्ध पूर्णिमा एक्सप्रेस को सफलतापूर्वक चलाया गया। इस रूट पर इस तकनीक का यह पहला और बेहद सफल ट्रायल रहा।

तीन महत्वपूर्ण सेक्शन में पूरा हुआ काम
रेलवे प्रशासन ने पीडीडीयू-गया रूट पर तीन अलग-अलग हिस्सों में सुरक्षा के इस आधुनिक 'कवच वर्ज़न 4.0' को लाइव किया है। नए चालू किए गए इन सेक्शनों में मुख्य रूप से शामिल हैं:--

सरमातांर से निमियाघाट: धनबाद और पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन के बीच का 76 किलोमीटर का हिस्सा।

पीडीडीयू फ्लाईओवर केबिन से भभुआ सड़क: यह करीब 43 किलोमीटर लंबा सेक्शन है।

सासाराम से फेसर: यह 44 किलोमीटर का ट्रैक है, जिस पर सोमवार को पहली ट्रेन दौड़ाई गई।

अगर पूरे पूर्व मध्य रेलवे की बात करें, तो अब तक कुल 256.3 रूट किलोमीटर पर कवच प्रणाली को सक्रिय किया जा चुका है। इसमें मानपुर-सरमातांर के बीच का 93.3 किलोमीटर का सेक्शन भी शामिल है।

क्या है भारत की स्वदेशी 'कवच' प्रणाली?
'कवच वर्ज़न 4.0' भारत की अपनी स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली (Automated Train Protection System) का सबसे नया और सबसे एडवांस रूप है। इसे अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (RDSO) द्वारा मंजूरी दी गई है। यह तकनीक भारतीय रेलवे के भारी भीड़भाड़ वाले और मल्टी-लाइन रेल नेटवर्क की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। पूर्व मध्य रेलवे की मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चंद्र ने बताया कि यह शुरुआत एक अधिक सुरक्षित, स्मार्ट और आत्मनिर्भर भारतीय रेलवे की ओर बढ़ता कदम है, और अन्य इलाकों में भी इसे तेजी से लगाया जा रहा है।

जानिए कैसे काम करता है यह लाइफ-सेविंग सिस्टम
आम लोगों की भाषा में समझें तो कवच सिस्टम ट्रेनों को आपस में टकराने से रोकता है। यह पूरी तरह से माइक्रोप्रोसेसर, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) और रेडियो संचार जैसी आधुनिक तकनीकों पर काम करता है। जब भी कभी एक ही ट्रैक पर आमने-सामने से दो ट्रेनें एक निश्चित दूरी के भीतर आ जाती हैं, तो यह सिस्टम तुरंत दोनों ट्रेनों के लोको पायलट (ड्राइवर) को खतरे का सिग्नल भेजकर सचेत कर देता है। अगर किसी वजह से ड्राइवर ब्रेक नहीं लगा पाता, तो यह सिस्टम ऑनबोर्ड उपकरणों की मदद से ट्रेन में स्वचालित (ऑटोमैटिक) रूप से ब्रेक लगा देता है, जिससे दुर्घटना टल जाती है।