DRM पर तानाशाही का आरोप : रेलमंत्री से होने लगी है जनभावना विरोधी अफसर को हटाने की मांग

वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष कुमार पाठक ने रेलवे के बड़े अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का भी गंभीर आरोप लगाया।
 

DRM डीडीयू के आदेश पर बाकले ग्राउंड का रास्ता बंद

मॉर्निंग वॉकर्स में दिख रहा है भारी गुस्सा

रेल कर्मचारियों के लिए बढ़ी मुसीबत

डर से नहीं उठा पा रहे आवाज

चंदौली जिले के पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर (मुगलसराय) में शहर के एकमात्र स्वच्छ वातावरण वाले क्षेत्र बाकले ग्राउंड और यूरोपियन कॉलोनी के चारों ओर बैरिकेडिंग किए जाने और मुख्य रास्तों को बंद करने के डीआरएम (मंडल रेल प्रबंधक) डीडीयू के आदेश पर शहरवासियों और मॉर्निंग वॉक पर जाने वाले लोगों में भारी गुस्सा फूट पड़ा है। मंगलवार को जीटी रोड स्थित शनि मंदिर के बगल से बाकले ग्राउंड जाने वाला रास्ता बंद किए जाने के बाद यह गुस्सा और बढ़ गया। नाराज लोगों ने तत्काल बंद किए गए प्रवेश द्वार पर एकत्रित होकर जमकर प्रदर्शन किया और डीआरएम के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष कुमार पाठक एडवोकेट ने डीआरएम डीडीयू के इस कदम को 'तानाशाही' करार दिया। उन्होंने कहा कि डीआरएम ने नगर के लोगों के साथ अकारण प्रतिशोध की भावना दिखाते हुए इस मार्ग को बंद कर दिया है, जिसका एकमात्र उद्देश्य शहर के लोगों को बाकले ग्राउंड जाने से रोकना है। एडवोकेट पाठक ने कहा कि डीआरएम मुगलसराय तानाशाह हो गए हैं और उन्होंने पूरे यूरोपियन कॉलोनी को चारों तरफ से घेर कर रख दिया है। यह कदम न केवल आम नागरिकों को प्रभावित कर रहा है, बल्कि इससे रेल कर्मचारियों को भी बहुत बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

रेल कर्मचारियों के लिए बढ़ी मुसीबत, डर से नहीं उठा पा रहे आवाज
एडवोकेट संतोष कुमार पाठक ने बताया कि डीआरएम के इस तानाशाही भरे निर्णय से रेल कर्मचारी और उनके परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। रेल कर्मचारियों के बच्चे इसी मार्ग से आकर जीटी रोड पर स्कूली बस पकड़कर पढ़ने जाते हैं। इसके अलावा, रेल कर्मचारियों के परिवार के सदस्य इसी मार्ग का उपयोग जीटी रोड आकर सब्जी, दवाइयां व अन्य जरूरी सामान खरीदने के लिए करते हैं। यह मार्ग बंद होने से वे बेहद परेशान हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि रेल कर्मचारी डीआरएम की तानाशाही के आगे अपनी आवाज नहीं उठा पा रहे हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि मंडल रेल प्रबंधक उन्हें कारण बताकर प्रताड़ित कर सकते हैं या उनका ट्रांसफर कहीं दूर-दराज कर सकते हैं। एडवोकेट पाठक ने कहा कि डीआरएम मुगलसराय ने यह नहीं सोचा कि उनके इस कदम से यहां रहने वाले रेल कर्मचारियों को कितनी बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने यह भी सवाल किया कि नगर के लोग अगर सुबह-सुबह ताजी हवा लेकर थोड़ा सा स्वास्थ्य लाभ ले लेते हैं तो इससे डीआरएम मुगलसराय को इतनी चिढ़ क्यों हो जाती है?

'भ्रष्टाचार और कमीशन के कारण जन सरोकारों से लेना-देना नहीं'
वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष कुमार पाठक ने रेलवे के बड़े अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का भी गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मंडल रेल प्रबंधक महोदय और रेल के बड़े अधिकारियों को सिर्फ रेलवे में भ्रष्टाचार करना है, पैसे कमाने हैं, और भारी कमीशन कमाना है, उन्हें जन सरोकारों से कोई लेना-देना नहीं है।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर डीआरएम डीडीयू अपनी थोड़ी सी भी ऊर्जा रेलवे कॉलोनियों की सड़कों और नालियों की मरम्मत में लगा देते, या फिर उन रेलवे आवासों की मरम्मत में लगा देते जिनकी छतों से पानी टपक रहा है, तो शायद रेल कर्मचारियों का बहुत बड़ा भला हो जाता। किंतु, उन्हें सिर्फ शहर के वे लोग खटक रहे हैं जो सुबह-सुबह ताजी हवा लेने वाकले ग्राउंड में यूरोपियन कॉलोनी चले जाते हैं।

रेल मंत्री से तानाशाही डीआरएम को हटाने की मांग
अंत में, एडवोकेट संतोष कुमार पाठक ने रेल मंत्री भारत सरकार से कड़ा कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि ऐसे तानाशाह डीआरएम मुगलसराय (डीडीयू) पर यथाशीघ्र कार्रवाई की जाए तथा उन्हें यहां से तत्काल हटाया जाए। इसके साथ ही, उन्होंने बाकले ग्राउंड के सभी बंद मार्गों को तुरंत खोले जाने की भी मांग की, ताकि शहर के लोग और रेल कर्मचारी बिना किसी परेशानी के आवाजाही कर सकें और स्वास्थ्य लाभ ले सकें। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान ढेर सारे नगरवासी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस आदेश के खिलाफ अपनी सामूहिक नाराजगी दर्ज कराई।