पूर्वांचल में लक्ष्य से चूकी गेहूं खरीद, फिर भी चंदौली में टूट गया पुराना रिकॉर्ड; पिछले साल से दोगुनी खरीदारी

 

विपणन सत्र 2026-27 में पूर्वांचल के जिले गेहूं खरीद का सरकारी लक्ष्य भले ही न छू पाए हों, लेकिन पिछले साल का रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया है। जानिए बाजार के किस उतार-चढ़ाव ने सरकारी केंद्रों पर किसानों की कतारें लगवा दीं।

 
 

पूर्वांचल के 10 जिलों में 3 लाख 12 हजार टन का था निर्धारित लक्ष्य

लक्ष्य के सापेक्ष 2 लाख 82 हजार टन गेहूं की हुई कुल खरीद

चंदौली में पिछले साल के 8 हजार टन के मुकाबले 29,743.89 टन की खरीद

खरीद के मामले में 102.11 प्रतिशत के साथ आजमगढ़ मंडल रहा सबसे अव्वल

किसानों को उनकी उपज का सही और उचित मूल्य दिलाने के लिए सरकार हर साल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं की खरीद करती है। चालू विपणन सत्र 2026-27 में चंदौली सहित पूर्वांचल के दस जिले सरकार द्वारा तय किए गए निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने में भले ही असफल रहे हों, लेकिन इन जिलों ने पिछले साल की खरीद का रिकॉर्ड पूरी तरह तोड़ दिया है।

इस साल पूर्वांचल के इन जिलों के लिए कुल 3 लाख 12 हजार टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा गया था। इस लक्ष्य के मुकाबले 15 जून तक कुल 2 लाख 82 हजार टन गेहूं की सरकारी खरीद की जा चुकी है। अगर पिछले साल की बात करें तो यह आंकड़ा महज 1.93 लाख टन पर ही सिमट कर रह गया था, जिसके मुकाबले इस बार काफी बेहतर स्थिति रही है।

चंदौली में पिछले साल से दोगुनी हुई गेहूं की खरीद
विशेष रूप से चंदौली जिले की बात करें तो यहाँ पिछले तीन सालों का रिकॉर्ड टूट गया है। पिछले वर्ष जिले में महज आठ हजार टन ही गेहूं की खरीद सरकारी केंद्रों पर हो सकी थी, जबकि उस समय लक्ष्य 35 हजार टन का था। इस बार चंदौली में खरीद का आंकड़ा पिछले साल की तुलना में दोगुने से भी अधिक पहुंच गया है।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, चंदौली में इस बार 40,000 टन के निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष 29,743.89 टन गेहूं की खरीद दर्ज की गई है। इस प्रक्रिया से जिले के कुल 6,114 किसान सीधे तौर पर लाभान्वित हुए हैं, जिन्हें भुगतान राशि के रूप में कुल 7747.52 लाख रुपये सीधे उनके खातों में भेजे गए हैं।

बाजार भाव गिरते ही सरकारी केंद्रों पर लगी किसानों की कतार
गेहूं खरीद के शुरुआती दौर में खुले बाजार में व्यापारियों ने काफी ऊंचे दाम दिए थे। शुरुआत में बाजार में गेहूं का भाव 2000 से 2200 रुपये प्रति क्विंटल था, जो बीच में अचानक उछलकर तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल के करीब पहुंच गया था। बाजार में ऊंचे दाम देखकर किसान ठहर गए और उन्हें लगा कि कीमतें अभी और बढ़ेंगी।

हालांकि, कुछ ही दिनों में खुले बाजार का यह दाम अचानक नीचे की तरफ लुढ़क गया। बाजार में दाम गिरते ही सरकारी केंद्रों पर किसानों की लंबी कतारें फिर से लग गईं। शुरुआती दौर में बोरों (बारदाने) की किल्लत की वजह से भी खरीद की रफ्तार थोड़ी धीमी रही थी, लेकिन बाद में व्यवस्थाएं ठीक होने पर खरीद ने तेजी पकड़ ली।

आजमगढ़ मंडल रहा अव्वल, अधिकारी बोले- स्थिति संतोषजनक
पूर्वांचल के विभिन्न जनपदों में गेहूं खरीद के लिए 30 मार्च से 766 केंद्र खोले गए थे। इन सभी केंद्रों पर अंतिम दिन तक सरकारी एजेंसियां लक्ष्य को पूरा करने में जुटी रहीं, जिससे कुल 62,536 कृषकों को लाभ मिला। इस पूरी प्रक्रिया में अपने लक्ष्य के सापेक्ष 102.11 प्रतिशत गेहूं की खरीद कर आजमगढ़ मंडल पूरे क्षेत्र में अव्वल रहा।

विभिन्न जनपदों के आंकड़ों को देखें तो आजमगढ़ में 36382.19 टन, बलिया में 34397.24 टन, मऊ में 20621.85 टन, गाजीपुर में 36632.38 टन, जौनपुर में 32216.02 टन, वाराणसी में 8939.99 टन, मीर्जापुर में 46620.48 टन, भदोही में 10277.35 टन और सोनभद्र में 26983.97 टन गेहूं की खरीद की गई है।

चंदौली के जिला खाद्य विपणन अधिकारी राघवेंद्र सिंह ने बताया कि शासन की ओर से जो लक्ष्य दिया जाता है, वह कभी-कभी बहुत अधिक होता है। अधिकारी उस ऊंचे लक्ष्य को हासिल करने में जी-जान से जुट जाते हैं। इसके बावजूद, इस बार गेहूं की खरीद की स्थिति पिछले वर्षों के मुकाबले बेहद शानदार और संतोषजनक रही है।