सकलडीहा तहसील में जल्द शुरू होगी मुंसिफ कोर्ट, 3 दशक पुरानी मांग हुयी पूरी

सकलडीहा तहसील में मुंसिफ न्यायालय जल्द शुरू होगा। 441 गांवों के ग्रामीणों को तीन वर्ष से कम सजा वाले सिविल और छोटे अपराधों के लिए जिला मुख्यालय जाने से राहत मिलेगी। 
 

सकलडीहा तहसील में मुंसिफ न्यायालय जल्द शुरू करने की तैयारी

ग्रामीणों और वादकारियों को होगी बड़ी सहूलियत

441 गांवों के लोगों को मिलेगी बड़ी राहत

अब हर मुकदमे के लिए नहीं लगाने होंगे जिला मुख्यालय के चक्कर

चंदौली जिले की सकलडीहा तहसील में लंबे इंतजार के बाद अब जल्द ही मुंसिफ न्यायालय शुरू होने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जिले में चंदौली सदर और चकिया के बाद सकलडीहा तीसरी तहसील होगी जहां यह न्यायालय स्थापित होगा। बीते शुक्रवार को जिला जज दिवाकर प्रसाद चतुर्वेदी ने स्वयं तहसील परिसर में बने भवन का निरीक्षण किया। एसडीएम कुंदन राज कपूर और तहसीलदार संदीप श्रीवास्तव ने उन्हें न्यायालय संचालन के लिए उपयुक्त कमरों का अवलोकन कराया। भवन की स्थिति से संतुष्ट होकर जिला जज ने तुरंत सेंट्रल नाजिर को न्यायालय का कार्य शुरू कराने का निर्देश दिया। इस पहल से सकलडीहा बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं, वादकारियों और स्थानीय ग्रामीणों में हर्ष की लहर है।

तीन दशक पुरानी मांग को मिली मंजूरी

सकलडीहा में मुंसिफ न्यायालय की मांग तीन दशक से भी ज्यादा पुरानी है। तहसील भवन का शिलान्यास 20 अक्तूबर 1994 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने किया था, और 2001 में नए भवन में तहसील का संचालन शुरू हुआ। इसके बाद से ही अधिवक्ताओं ने चकिया और सदर तहसील की तर्ज पर सकलडीहा में भी मुंसफी न्यायालय की स्थापना के लिए लगातार प्रयास किए। इस मांग को लेकर कई बार धरना प्रदर्शन भी हुए। सकलडीहा बार के अधिवक्ताओं के अथक प्रयास और जिला जज दिवाकर प्रसाद चतुर्वेदी की सकारात्मक पहल के बाद यह सपना साकार होने जा रहा है। बार अध्यक्ष अशोक कुमार यादव और महामंत्री रामराज यादव सहित कई अधिवक्ताओं ने जिला जज और अधिकारियों का सम्मान कर आभार व्यक्त किया।

441 गांवों के लिए बड़ी सहूलियत

सकलडीहा तहसील में कुल 441 गांव शामिल हैं, जिनमें बलुआ, धीना, सकलडीहा, धानापुर सहित अन्य थाना क्षेत्र और बढवल, महाईच, बरह, मूहआरी जैसे चार परगना आते हैं। वर्तमान में इन सभी गांवों के निवासियों को न्याय पाने के लिए जिला मुख्यालय चंदौली जाना पड़ता है, जो समय और धन दोनों के लिहाज से कठिन होता है। मुंसिफ न्यायालय के शुरू होने से इन सभी 441 गांवों के ग्रामीणों को बड़ी राहत मिलेगी।

छोटे मुकदमों की सुनवाई स्थानीय स्तर पर

मुंसिफ न्यायालय शुरू होने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब छोटे सिविल और आपराधिक मुकदमों की सुनवाई स्थानीय स्तर पर हो सकेगी। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक यादव और महामंत्री रामराज यादव ने बताया कि इस न्यायालय में सिविल से संबंधित विवाद, जैसे जमीन और मकान का बटवारा, गांव के डीह मुकदमे, और तीन साल से कम सजा वाले छोटे अपराधों की सुनवाई हो सकेगी। इससे लोगों को न्याय के लिए लंबी दूरी तय करने और जिला मुख्यालय के चक्कर काटने से मुक्ति मिल जाएगी। यह कदम न्याय को आम जनता के करीब लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।