अब परिषदीय स्कूलों में पहली कक्षा से ही संस्कृत पढ़ेंगे बच्चे, भाषा से जोड़कर मजबूत होगी संस्कारों की नींव   

परिषदीय स्कूलों में अब कक्षा एक से ही बच्चों को संस्कृत भाषा से जोड़ने की तैयारी है। नई व्यवस्था के तहत नन्हें बच्चों को किताब पढ़ाने के बजाय मौखिक अभ्यास और गतिविधियों के जरिए संस्कृत के बुनियादी शब्द सिखाए जाएंगे।  
 

परिषदीय स्कूलों में कक्षा एक से संस्कृत पढ़ाई   

2027-28 शैक्षणिक सत्र से नई व्यवस्था लागू   

मौखिक अभ्यास से सीखे जाएंगे बुनियादी शब्द   

एससीईआरटी ने बीएसए से मांगे सुझाव   

चंदौली के 1.80 लाख बच्चों को लाभ   

 

उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए एक अच्छी खबर है। राज्य सरकार अब पहली कक्षा से ही छोटे बच्चों को संस्कृत भाषा से परिचित कराने की योजना पर काम कर रही है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों को शुरुआत से ही इस प्राचीन भाषा से जोड़ना है, ताकि आगे चलकर उन्हें संस्कृत समझने में कोई कठिनाई न हो। 

  क्या है वर्तमान व्यवस्था और क्या बदलेगा?
वर्तमान में सरकारी स्कूलों में कक्षा तीन से संस्कृत का पाठ्यक्रम शुरू होता है। लेकिन नई व्यवस्था के तहत कक्षा एक और दो के नौनिहालों को किताबों के बोझ के बिना ही संस्कृत की बुनियादी जानकारी दी जाएगी। इसके लिए बच्चों से मौखिक बातचीत की जाएगी और खेल-कूद तथा शिक्षण गतिविधियों के माध्यम से सहज माहौल बनाया जाएगा।   

2027-28 के शैक्षणिक सत्र से होगी शुरुआत
यह प्रस्तावित नई व्यवस्था शैक्षणिक सत्र 2027-28 से लागू करने की तैयारी है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) के संयुक्त निदेशक डॉ. पवन सचान ने इस संबंध में राज्य के सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) और डाइट प्राचार्यों को पत्र जारी कर सुझाव मांगे हैं। सुझाव मिलने के बाद पाठ्यक्रम को अंतिम रूप दिया जाएगा।   

दैनिक जीवन के शब्दों का कराया जाएगा अभ्यास
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सचिन कुमार ने बताया कि कक्षा एक और दो के बच्चों को रटाने के बजाय अभिवादन, परिचय, आसपास की वस्तुओं के नाम और दैनिक जीवन में काम आने वाले सामान्य शब्दों का संस्कृत में प्रयोग सिखाया जाएगा। जब बच्चे शुरुआत में ही संस्कृत के आसान शब्दों और वाक्यों को बोलने लगेंगे, तो आगे की कक्षाओं में उन्हें यह विषय कठिन नहीं लगेगा।   

लाखों छात्र-छात्राओं को मिलेगा सीधा फायदा
उदाहरण के तौर पर अकेले चंदौली जिले की बात करें तो यहाँ कुल 1,185 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं, जिनमें लगभग 1.80 लाख छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं। नई व्यवस्था लागू होने से अकेले चंदौली ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लाखों बच्चों का आधार मजबूत होगा और वे बिना किसी झिझक के संस्कृत भाषा को समझ सकेंगे।