मत्स्य मंडी शुरू होने में लगेगा और टाइम, कचरा प्रबंधन के लिए बनेगा ETP ट्रीटमेंट प्लांट
नवीन मंडी परिसर में 'स्टेट ऑफ आर्ट' होलसेल मत्स्य बाजार
कैंपस में एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की तैयारी
लगता है तय समय में नहीं शुरू हो पाएगी मंडी
चंदौली जिले की नवीन मंडी परिसर में 'स्टेट ऑफ आर्ट' होलसेल मत्स्य बाजार (मत्स्य मंडी) का निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद, इसके संचालन में अभी और समय लगेगा। जिला प्रशासन ने अब परिसर में ईटीपी (एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) की स्थापना करने का निर्णय लिया है, ताकि मत्स्य मंडी से निकलने वाले अपशिष्ट का उचित प्रबंधन किया जा सके। इसके अलावा, बिल्डिंग के कॉमन एरिया को भी वातानुकूलित (एयर कंडीशन) किया जाएगा। इन बदलावों के लिए एक नई कार्य योजना तैयार की जा रही है।
परियोजना में विलंब और नए बदलाव
मत्स्य मंडी का निर्माण कार्य दिसंबर 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब इस अवधि को आगे बढ़ा दिया गया है। वर्तमान में, भवन का फिनिशिंग कार्य, कमरों में पंखे, लाइट, स्ट्रीट लाइट और सड़क का निर्माण पूरा हो चुका है। मंडी में बनी तीन बिल्डिंगों में आठ लिफ्ट लगाई गई हैं।
हाल ही में, जिला प्रशासन ने निर्माण कार्य का जायजा लिया और पाया कि अपशिष्ट प्रबंधन के लिए ईटीपी ट्रीटमेंट प्लांट की सख्त आवश्यकता है। जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग ने कहा कि मंडी से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों का सही निस्तारण बेहद जरूरी है, ताकि पर्यावरण को कोई नुकसान न हो। इसके लिए नई कार्य योजना तैयार की जा रही है ताकि मत्स्य मंडी का संचालन सुचारू रूप से हो सके।
रोजगार और सुविधाओं का हब
इस मत्स्य मंडी के बनने से पूर्वांचल में मछली पालन करने वाले किसानों की आय दोगुनी होने की उम्मीद है। इसके अलावा, यह परियोजना 1500 से अधिक लोगों को रोजगार भी देगी। यह मंडी मछली से संबंधित सभी कारोबार को एक ही छत के नीचे लाएगी, जिसमें फिश रेस्टोरेंट, कांफ्रेंस हॉल, और प्रोसेसिंग यूनिट जैसी आधुनिक सुविधाएं होंगी।
मत्स्य मंडी भवन में मछली पालन के तरीकों, मार्केटिंग, नई तकनीक और एक्सपोर्ट के बारे में भी जानकारी मिलेगी। यहाँ मछली से बने विभिन्न पकवानों को पकाने और खाने की सुविधा भी उपलब्ध होगी। इस प्रकार, यह मत्स्य मंडी न केवल व्यापार को बढ़ावा देगी, बल्कि यह मछली पालन से जुड़े लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण ज्ञान और रोजगार केंद्र भी बनेगी।