चंदौली में कमजोर विद्यार्थियों को विशेष प्रशिक्षण, बोर्ड परीक्षा में सुधार की तैयारी 

इस योजना को सफल बनाने के लिए शिक्षकों को भी विशेष उपचारात्मक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ताकि वे कमजोर विद्यार्थियों को समझकर उन्हें बेहतर तरीके से पढ़ा सकें।
 

कक्षा 9 से 12 के कमजोर छात्रों की होगी पहचान

विशेष प्रशिक्षण से गणित, अंग्रेजी व विज्ञान में सुधार

बोर्ड परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन मुख्य लक्ष्य

चंदौली जिले के राजकीय और एडेड माध्यमिक विद्यालयों में अब कमजोर विद्यार्थियों को विशेष प्रशिक्षण देकर निपुण बनाने की पहल की गई है। यह प्रयास बोर्ड परीक्षाओं में विद्यार्थियों के बेहतर प्रदर्शन को सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों में से कमजोर छात्रों को चिह्नित किया जाएगा। गणित, अंग्रेजी और विज्ञान जैसे कठिन विषयों में विशेष ध्यान देकर उन्हें प्रशिक्षित किया जाएगा। विद्यालयों से कक्षा-वार ऐसे छात्रों की सूची मांगी गई है।

जिले में शिक्षा की मौजूदा स्थिति
जिले में कुल 28 राजकीय, 34 वित्तपोषित और 186 वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। इनमें कक्षा 6 से 12 तक के छात्र अध्ययनरत हैं। आंकड़ों के मुताबिक, 90,104 छात्र-छात्राओं में से लगभग 22,526 को कमजोर श्रेणी में चिह्नित किया गया है।

क्यों जरूरी पड़ी यह पहल
विभागीय समीक्षा में पाया गया कि कई राजकीय और एडेड विद्यालयों के छात्र बोर्ड परीक्षाओं में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को ग्रेस मार्क देकर उत्तीर्ण घोषित किया जाता है। वहीं, वित्तविहीन विद्यालयों के छात्र अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। इसे देखते हुए अब राजकीय और एडेड विद्यालयों में 25% कमजोर छात्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लिया गया है।

शिक्षकों को मिला विशेष प्रशिक्षण
इस योजना को सफल बनाने के लिए शिक्षकों को भी विशेष उपचारात्मक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ताकि वे कमजोर विद्यार्थियों को समझकर उन्हें बेहतर तरीके से पढ़ा सकें। महेन्द्र टेक्निकल इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रमोद सिंह ने कहा कि योजना अगर सही ढंग से लागू हुई तो यह छात्रों के शैक्षिक परिणाम में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।

डीआईओएस का बयान
जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) देवेंद्र सिंह ने कहा कि सभी विद्यालयों को पत्र भेजकर सूची उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। शिक्षकों को प्रशिक्षण देकर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी छात्र पीछे न छूटे।