UP में घर बनाना हुआ सस्ता: मकान और दुकान के लिए अब देना होगा आधा विकास शुल्क, जानें नई टैक्स की दरें

 

उत्तर प्रदेश सरकार ने आम जनता को बड़ी राहत देते हुए मकान और दुकान के नक्शा पास कराने पर विकास शुल्क को आधा कर दिया है। सरकार के इस कदम से अब निर्माण लागत में कमी आएगी और अवैध निर्माणों पर भी अंकुश लगेगा।

 
 

यूपी में घर बनाना हुआ सस्ता

मकान का नक्शा पास कराना आसान

विकास शुल्क में मिली बड़ी राहत

छोटे मकानों पर आधी हुई फीस

उत्तर प्रदेश सरकार का बड़ा तोहफा

उत्तर प्रदेश में अपना घर बनाने का सपना देख रहे लोगों के लिए योगी सरकार ने एक बेहद राहत भरी खबर दी है। प्रदेश सरकार ने शहरों में छोटे मकान और छोटी दुकानें बनाने वाले लोगों के लिए विकास शुल्क (Development Charges) में भारी कटौती का निर्णय लिया है। इस नए आदेश के अनुसार, अब नक्शा पास कराते समय लोगों को पूर्व की तुलना में केवल आधा विकास शुल्क ही देना होगा। यह निर्णय आम जनता को बड़ी राहत देने वाला माना जा रहा है। इससे मुगलसराय जैसे अन्य छोटे शहरों को भी लाभ होने की उम्मीद है।

क्या है सरकार का नया फैसला?
प्रमुख सचिव आवास, पी गुरुप्रसाद ने कैबिनेट के इस महत्वपूर्ण फैसले के आधार पर 'उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास (विकास शुल्क का निर्धारण, उद्ग्रहण और संग्रहण) (तृतीय संशोधन) नियमावली-2026' जारी कर दी है। इस नियम के लागू होने के बाद, अब विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद द्वारा नक्शा पास करते समय नई दरों के हिसाब से शुल्क की वसूली की जाएगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य शहरों में आवास निर्माण को सुगम बनाना और अवैध निर्माणों पर रोक लगाना है।

विकास शुल्क में कमी और इसका असर
इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को होगा जो छोटे भूखंडों पर निर्माण कर रहे हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि शहरों के लिए तय विकास शुल्क का मात्र 50 फीसदी ही लोगों से लिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, निकाय क्षेत्र से बाहर के क्षेत्रों में भी बड़ी राहत दी गई है। निकाय क्षेत्र से बाहर 20 प्रतिशत कम शुल्क लिया जाएगा। वहीं, औद्योगिक उपयोग के लिए विकास शुल्क में 60 प्रतिशत तक की कमी की गई है। ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं के लिए भी विकास शुल्क को काफी कम कर दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे शहरों में फ्लैट और मकानों की कीमतों में भी कमी आएगी, क्योंकि निर्माण लागत का एक बड़ा हिस्सा सरकारी शुल्कों में जाता था।

शहरी श्रेणी के अनुसार शुल्क का निर्धारण
सरकार ने अलग-अलग शहरों के लिए विकास शुल्क की दरें नए सिरे से तय की हैं, ताकि इसे लागू करने में किसी भी प्रकार की बाधा न आए। उदाहरण के लिए:

गाजियाबाद: यहां विकास शुल्क सबसे अधिक रखा गया है। गाजियाबाद में 4165 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से वसूली की जाएगी।

प्रमुख शहर: कानपुर, लखनऊ और आगरा को एक श्रेणी में रखा गया है, जहाँ 2426 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर तय की गई है।

अन्य प्रमुख शहर: वाराणसी, प्रयागराज, मेरठ, मुरादाबाद, गज्रौला और बरेली जैसे शहरों के लिए 1450 रुपये प्रति वर्ग मीटर का शुल्क निर्धारित किया गया है।

अयोध्या और अन्य शहर: अयोध्या, रायबरेली, बांदा, रामपुर, उरई, आजमगढ़, बस्ती, मिर्जापुर, बिदुर, अकबरपुर, फतेहपुर, सीकरी, कोसीकला, छाता, चौमुहा और नंदगांव में 603 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर तय की गई है।

मुगलसराय जैसे अन्य छोटे शहरों को भी होगा लाभ
 अलीगढ़, गोरखपुर, बुलंदशहर, सिकंदराबाद, न्यू सिकंदराबाद, खुर्जा, सहारनपुर, मथुरा-वृंदावन, झांसी, मुजफ्फरनगर, शामली, खतौली, हापुड़-पिलखुवा, बागपत-बड़ौत, खेकड़ा, फिरोजाबाद-शिकोहाबाद, उन्नाव-शुक्लागंज, पं. दीनदयाल उपाध्याय नगर के लिए 1020 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर निर्धारित की गई है।

अवैध निर्माण पर लगेगी लगाम
सरकार का मानना है कि विकास शुल्क अधिक होने के कारण कई लोग बिना नक्शा पास कराए ही निर्माण कार्य शुरू कर देते थे, जिससे बाद में उन्हें कानूनी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। अब शुल्क कम होने से लोगों का रुझान वैध निर्माण की ओर बढ़ेगा। नक्शा पास कराने की प्रक्रिया सरल होने से अवैध कॉलोनियों और बिना नक्शे के बने मकानों के मामलों में भी कमी आएगी।


योगी सरकार का यह फैसला रियल एस्टेट सेक्टर और आम आदमी, दोनों के लिए सकारात्मक है। जहां एक ओर निर्माण कार्य में तेजी आएगी, वहीं दूसरी ओर शहरों के व्यवस्थित विकास का मार्ग भी प्रशस्त होगा। यह कदम न केवल 'सबका साथ, सबका विकास' की नीति को पुष्ट करता है, बल्कि उत्तर प्रदेश में शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। लोगों को सलाह दी जाती है कि वे अपने स्थानीय विकास प्राधिकरण या नगर निगम कार्यालय से नई दरों के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।