बलुआ थाना अध्यक्ष के 'कारखास' पर एक्शन: अवैध वसूली और खनन माफिया से सांठगांठ के आरोप में सिपाही सस्पेंड
बलुआ थाने में अवैध वसूली का ऑडियो वायरल होने के बाद प्रभारी एसपी ने बड़ी कार्रवाई की है। थानाध्यक्ष के करीबी माने जाने वाले सिपाही को लाइन हाजिर कर जांच शुरू कर दी गई है।
अवैध वसूली का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल
प्रभारी एसपी अनंत चंद्रशेखर का कड़ा एक्शन
सिपाही दीपचंद गिरी को किया गया लाइन हाजिर
खनन माफिया और पुलिस की सांठगांठ उजागर
क्षेत्राधिकारी को सौंपी गई पूरे मामले की जांच
चंदौली जनपद में ईमानदारी का दावा करने वाले बलुआ थाना अध्यक्ष की कार्यप्रणाली अब सवालों के घेरे में है। थानाध्यक्ष के बेहद करीबी माने जाने वाले सिपाही पर भ्रष्टाचार की गाज गिरने के बाद पूरे जिले के पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। मामला अवैध वसूली से जुड़े एक ऑडियो के वायरल होने के बाद प्रकाश में आया है।
वसूली का ऑडियो और खनन माफिया से सांठगांठ
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर बलुआ थाने से जुड़ा एक ऑडियो तेजी से वायरल हो रहा था। इस ऑडियो में अवैध वसूली कर पकड़े गए ट्रैक्टरों को छोड़ने के बदले पैसों की सौदेबाजी की बातचीत सुनाई दे रही थी। सूत्रों के अनुसार, सिपाही दीपचंद गिरी, थानाध्यक्ष अतुल प्रजापति के लिए 'कार्यखास' की भूमिका निभा रहा था। आरोप है कि यह वसूली क्षेत्र के सक्रिय खनन माफियाओं के साथ सांठगांठ कर की जा रही थी।
प्रभारी एसपी का कड़ा रुख, सिपाही लाइन हाजिर
मामला उच्चाधिकारियों तक पहुँचने के बाद प्रभारी पुलिस अधीक्षक अनंत चंद्रशेखर ने इसे गंभीरता से लिया। प्रारंभिक जांच और ऑडियो की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने तत्काल प्रभाव से सिपाही दीपचंद गिरी को पुलिस लाइन भेजने (आमद कराने) का निर्देश दिया है। चर्चा है कि थानाध्यक्ष ने अलग-अलग बीट पर वसूली के लिए खास सिपाहियों को तैनात कर रखा था। इस कार्रवाई के बाद अन्य थानों में तैनात 'खास' सिपाहियों के बीच भी खलबली मची हुई है।
निष्पक्ष जांच के लिए क्षेत्राधिकारी को कमान
प्रभारी एसपी ने पूरे प्रकरण की गहराई से पड़ताल के लिए क्षेत्राधिकारी (CO) को जांच का जिम्मा सौंपा है। जांच में ऑडियो की फॉरेंसिक सत्यता, संबंधित पुलिसकर्मियों की कॉल डिटेल्स और खनन माफियाओं से उनके संबंधों की जांच की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार और अवैध वसूली में जो भी संलिप्त पाया जाएगा, उस पर कठोर विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इस सख्त संदेश के बाद यह माना जा रहा है कि जांच की आंच जल्द ही थानाध्यक्ष तक भी पहुँच सकती है।