DM साहब को वीडियो पर नहीं भरोसा? चंदौली में बाढ़ सुरक्षा के नाम पर रात के अंधेरे में मिट्टी बेच रहे ठेकेदार!
चंदौली के पड़या गांव में बाढ़ सुरक्षा के नाम पर चल रही गड़ई नदी की खुदाई विवादों में घिर गई है। अफसरों और ठेकेदारों की मिलीभगत से रात में मिट्टी बेचे जाने के आरोप पर ग्रामीणों ने डीएम के सामने हंगामा किया। पूरी खबर पढ़ें...
गड़ई नदी की खुदाई पर विवाद
रात में जेसीबी से अवैध खनन
सरकारी मिट्टी बाजार में बेची गई
ग्रामीणों ने वीडियो साक्ष्य पर उठाए सवाल
डीएम चंद्रमोहन गर्ग से सीधी शिकायत
चंदौली जिले के सदर ब्लॉक अंतर्गत पड़या गांव में गड़ई नदी की खुदाई का कार्य इन दिनों सुर्खियों में है। बाढ़ की विभीषिका से ग्रामीणों को बचाने के नाम पर करोड़ों के बजट से नदी की खुदाई तो की जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि इस पूरी योजना में निर्धारित सरकारी मानकों को पूरी तरह हवा में उड़ा दिया गया है। रात के घने अंधेरे में धड़ल्ले से जेसीबी मशीनें उतारकर नदी का सीना चीरा जा रहा है और वहां से निकलने वाली कीमती मिट्टी को मजबूत तटबंध बनाने के बजाय गुपचुप तरीके से बाजार में बेचकर मोटा आर्थिक लाभ कमाया जा रहा है।
गढ़ई नदी की रात में खुदाई पर विवाद
— Chandauli Samachar (@chandaulinews) June 12, 2026
रात में जेसीबी से अवैध खनन और मिट्टी बाजार में बेची गई
वीडियो दिखाकर जनता ने पूछा सवाल
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मॉक ड्रिल में पहुंचे डीएम का घेराव के बाद भी वीडियो साक्ष्य पर भरोसे का संकट
यह पूरा मामला तब और ज्यादा गरमा गया जब बाढ़ आपदा के संबंध में आयोजित एक मॉक ड्रिल कार्यक्रम में हिस्सा लेने चंदौली के जिलाधिकारी चंद्रमोहन गर्ग खुद पड़या गांव पहुंचे थे। ग्रामीणों ने प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए डीएम साहब का घेराव कर दिया और रात में हो रहे अवैध खनन के वीडियो साक्ष्य दिखाए। चर्चा है कि इस तरह के वीडियो पर फिलहाल प्रशासनिक अधिकारियों को आसानी से भरोसा नहीं हो रहा है। इसके बावजूद बढ़ते जन आक्रोश को देखते हुए जिलाधिकारी ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने का आश्वासन दिया है।
क्या सरकारी खजाने और मिट्टी का हो रहा दुरुपयोग? जांच का इंतजार
ग्रामीणों का सीधा सवाल है कि क्या बाढ़ सुरक्षा के नाम पर नियमों की खुली अनदेखी की जा रही है? क्या सरकारी पैसे से निकाली जा रही मिट्टी का ठेकेदार और अफसर मिलकर दुरुपयोग कर रहे हैं? ग्रामीणों की मांग है कि पूरी ईमानदारी से नदी की गहराई नापकर खुदाई कराई जाए और उसी मिट्टी से नदी के किनारों को मजबूत किया जाए ताकि बाढ़ का खतरा टल सके। बहरहाल, प्रशासन की इस जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि भ्रष्टाचार के इन संगीन आरोपों के पीछे का असली सच क्या है।