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दिव्यांग होने के बावजूद मां-बाप की सेवा कर रहा राजू रस्तोगी, ऐसा भी कर सकते हैं आप
दिव्यांग राजू रस्तोगी दोनों हाथ-पैर से दिव्यांग होने के बावजूद इंटरमीडिएट की शिक्षा ग्रहण कर वैवाहिक जीवन अपनाते हुए गांव में विसातबाना की दुकान खोलकर वृद्ध मां-बाप की सेवा कर गृहस्थी संवारने में लगे हैं।
 
दिव्यांग राजू रस्तोगी दोनों हाथ-पैर से है दिव्यांग 
इसके बावजूद मां-बाप की सेवा कर रहा राजू रस्तोगी

चंदौली जिले के चकिया क्षेत्र के दिव्यांग राजू रस्तोगी दोनों हाथ-पैर से दिव्यांग होने के बावजूद इंटरमीडिएट की शिक्षा ग्रहण कर वैवाहिक जीवन अपनाते हुए गांव में विसातबाना की दुकान खोलकर वृद्ध मां-बाप की सेवा कर गृहस्थी संवारने में लगे हैं। यकीनन राजू की काबिलियत अन्य दिव्यांग जनों के लिए मिसाल बन गई है।


बताते चलें कि चकिया तहसील क्षेत्र के भोड़सर गांव निवासी राजू रस्तोगी पांच भाई-बहनों में दूसरे नंबर के हैं। गरीब परिवार में जन्मे राजू जन्म से ही दोनों हाथ व पैर से दिव्यांग हैं। 90 प्रतिशत दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। बचपन से ही उन्हें कुछ कर दिखाने की तमन्ना रही। गांव के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाई करने के बाद शहाबगंज गांधी स्मारक इंटर कालेज से इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की। आगे की पढ़ाई घर की माली हालत खराब होने के कारण नहीं कर सके। घर की गरीबी को दूर करने और कुछ कर दिखाने की हिम्मत व हौसले ने उन्हें मुंबई पहुंचा दिया। फिल्म में काम करने को आतुर राजू की किस्मत ने साथ नहीं दिया तो लौट आए। 


जानकारी के अनुसार पिता राजेंद्र रस्तोगी, मां उर्मिला देवी गांव की एक बीघा खेती से जीविकोपार्जन कर रहे थे। मुंबई से लौटे राजू ने हिम्मत कर मां, बाप से गांव में विसातबाने की दुकान खुलवायी। पड़री (मीरजापुर) निवासी रूबी देवी से राजू ने शादी की। राजू को एक पुत्र और एक पुत्री हैं। 


इस संबंध में तहसीलदार विकास धर दुबे ने बताया कि संघर्ष की बदौलत गृहस्थी की गाड़ी खींच रहे राजू को अभी तक सरकारी योजना का लाभ नहीं मिला है। ट्राई साइकिल, राशन कार्ड, आवास योजना से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि दिव्यांग राजू के काबिलियत को मेरा सलाम है। मैं खुद उनके घर जाऊंगा। सरकारी योजनाओं से लाभान्वित किए जाने का प्रयास किया जाएगा।