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इसके पहले भी इन तीन लोगों को मगरमच्छ ने बनाया है अपना शिकार, जाने अब तक के हादसे
 

चंदौली जिले में आज एक महिला को एक मगरमच्छ ने अपने जबड़े में फंसाकर मौत की नींद सुला दी तो इस बात की चर्चा होने लगी कि आखिर चंदौली जिले के इस इलाके में कब तक इस तरह की घटनाएं होती रहेंगी और कब लोगों को मगरमच्छ के खतरे से बचाने की पहल शुरू होगी।

 आपको बता दें कि चंदौली जिले में बहने वाली चंद्रप्रभा नदी के किनारे दर्जनों स्थानों पर मच्छर मगरमच्छों का कुनबा रहता है। अक्सर उनके कुनबे के मगरमच्छ नदी से बाहर निकलकर किनारे पर पहुंच जाते हैं और कभी-कभी नहरों और तालाबों में भी पहुंच जाते हैं। कभी-कभी यह मगरमच्छ लोगों की अलर्टनेस कोई घटना या दुर्घटना करने के पहले ही पकड़ लिए जाते हैं और वन विभाग इन को पकड़कर चंद्रप्रभा नदी या बांध में छोड़ देता है, लेकिन जब किसी की इन पर नजर नहीं पड़ती तो यह जानवरों के साथ साथ इंसानों को भी अपना शिकार बना लेते हैं।

चंद्रप्रभा नदी के किनारे बसे आधा दर्जन गांवो में इस बात का खतरा बना रहता है। इस नदी में ठौर ठिकाना जमाए मगरमच्छों ने पिछले आठ वर्ष में अब तक चार लोगों को अपना शिकार बनाया है। बताया जा रहा है कि वर्ष 2014 में नदी किनारे शौच करने गए सिकंदरपुर निवासी राज कुमार बिंद (48) को मगरमच्छ ने अपने जबड़े में दबोच कर मौत की नींद सुला दिया। तो वहीं वर्ष 2017 में विजयपुरवा गांव निवासी जीतू साहनी (45) की भी मगमच्छ ने जान ले ली थी। 

इसके बाद वर्ष 2018 में सिकंदरपुर निवासी इंसाफ अली के इकलौते पुत्र राहत अली (19) को कमोवेश कुछ इसी तरह मगरमच्छों ने अपना शिकार बनाया है। इसके बाद चौथी घटना बुधवार सुबह भीषमपुर गांव निवासी पार्वती सोनकर के साथ हुई है। 

Crocodile Attack

वर्ष 2018 में सिकंदरपुर निवासी राहत अली के शव को मगरमच्छों ने गायब कर दिया था। एनडीआरएफ की टीम बुलानी पड़ी थी। भारी मशक्कत के बाद किसी प्रकार घटना के दूसरे दिन शव को बरामद किया गया था। इसके साथ साथ मगरमच्‍छ के हमले में घायलों की भी संख्‍या दर्जन भर से अधिक बतायी जाती है। 

इस बारे में चंद्रप्रभा रेंज के वन क्षेत्राधिकारी बृजेश पांडेय कहते हैं कि चंद्रप्रभा वन सेंचुरी एरिया वन्य जीवों का अभ्यरण क्षेत्र है। सेंचुरी एरिया अंतर्गत चंद्रप्रभा बांध में प्रचुर मात्रा में मगरमच्छ मौजूद हैं। बरसात में पानी बढ़ने या सिंचाई के लिए बांध से पानी छोड़ें जाते समय मगरमच्छ (नर व मादा) चंद्रप्रभा नदी में प्रवेश कर जाते हैं। इसके बाद वह जलमार्ग से ही कभी कभार बस्तियों में चले जाया करते हैं। नदी के किनारे रहने वाले लोगों को बरसात के सीजन के साथ साथ अन्य समय में अलर्ट रहने के लिए कहा जाता है।

वहीं वन क्षेत्राधिकारी का कहना है कि चंद्रप्रभा नदी में मगरमच्छों के ठौर ठिकाने से सभी लोग वाकिफ हैं और यह भी जानते हैं कि किन इलाकों में खतरा अधिक है। इसके लिए विभाग द्वारा जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को नदी किनारे शौच करने या फिर अन्य कार्य वश जाने पर रोक लगाने के साथ साथ सावधानी बरतने के लिए कहा जाता है। यह जरूरी है कि लोग नदियों में जाते समय थोड़ी सी सावधानी रखें व जानवरों की आहट जानने व पहचानने की कोशिश करें। सावधानी ही बचाव है।