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संस्कार और संस्कृति ही संपूर्ण विश्व में भारतवर्ष को जगद्गुरु के स्थान पर करती है सुशोभित-श्री शरण दास जी
श्रीमद्भागवत कथा के छठी निशा पर कथा व्यास शरण दास जी ने सूर्यवंश का वर्णन करते हुए भगवान श्री सीताराम जी का गुणगान करते हुए  छठ पूजा पर विशेष महत्ता को बताया।
 
संस्कृति ही संपूर्ण विश्व में भारतवर्ष को जगद्गुरु के स्थान पर करती है सुशोभित

चंदौली जिला के चकिया तहसील अंतर्गत वनदेवी ग्राम में महावीर सेवा समिति द्वारा आयोजित वनदेवी माता मंदिर के प्रांगण में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के छठी निशा पर कथा व्यास शरण दास जी ने सूर्यवंश का वर्णन करते हुए भगवान श्री सीताराम जी का गुणगान करते हुए  छठ पूजा पर विशेष महत्ता को बताया।

 उन्होंने कहा कि छठ पूजा पवित्रता आस्था एवं संस्कार का महापर्व है। छठ पूजा में जब सौभाग्यवती माताएं सौभाग्य के चिन्हों को धारण करके पवित्र व्रत का अनुष्ठान करती हैं तो ऐसा लगता है जैसे मां भगवती स्वयं इस धरा धाम पर दर्शन दे रही हो। कहा कि हमें भारतीय सनातन संस्कृति में जन्म लेने पर गर्व होना चाहिए और इसके रक्षा एवं सम्मान हम सबकी जिम्मेदारी है। 

कथावाचक श्री शरण दास जी ने कहा कि आज आधुनिकता के भाग दौड़ में समाज विपरीत रास्ते पर निकल पड़ा है जिसको दिशानिर्देश सत्संग से ही प्राप्त है। भारतवर्ष ऋषि-मुनियों के तपस्या की भूमि रही है और हम सबमें भी उन्हीं विषयों के संस्कार हैं जो हमें विश्वगुरु बनाते हैं। भारत विश्वगुरू अपने संस्कार एवं संस्कृति के बदौलत है हमारे संस्कार और संस्कृति ही संपूर्ण विश्व में भारतवर्ष को जगतगुरु के सिर्फ स्थान पर शोभित करते हैं।

 कथा में मुख्य रूप से आयोजक व्यास ओम प्रकाश पांडेय, राजीव पाठक पूर्व प्रधान सिकंदरपुर, शीतला प्रसाद केसरी अध्यक्ष सिकंदरपुर उद्योग व्यापार मंडल, सियाराम गुप्ता, जितेंद्र कुमार, हौसला प्रजापति, बल्ली पाल, श्रीपति यादव, दुलारे यादव, गुलाब पाल आदि लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम संचालन राजेश विश्वकर्मा ने किया।