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ऐसे इलाज के नाम पर मरीजों को लूट रहे हैं निजी अस्पताल चलाने वाले डॉक्टर, लाखों देने के बाद भी नहीं बची मरीज की जान
 

चंदौली जिले के अलीनगर थाना क्षेत्र के हाईवे पर अस्पताल चलाने वाले डॉक्टरों की लापरवाही से मरीज की जान चली गयी और लाखों का खर्च भी हो गया।

बताते चलें कि ताजा मामला मुगलचक अलीनगर दिनांक 24/09/21 को संतलाल निगम पुत्र स्वर्गीय सोहनलाल निगम निवासी मुग़लचक अलीनगर का था, जो अपने हर्निया की समस्या को लेकर हॉस्पिटल ऑपरेशन को जा पहुंचा जहां पर डॉक्टर द्वारा मरीज का ब्लड टेस्ट सुपर डायग्नोस्टिक सेंटर से करा कर ऑपरेशन करने का कार्य किया गया । मरीज की हालत सही नहीं रहने के बावजूद भी उस ब्लड टेस्ट रिपोर्ट के अनुसार मरीज का शुगर 206.9,  हिमोग्लोबिन 8.9 और ब्लड प्रेशर लगातार बढ़े रहने पर डॉक्टर ने लापरवाही बरतते हुए शाम 6:30 बजे मरीज का ऑपरेशन कर डाला। जिससे मरीज की हालत बिगड़ते बिगड़ते 15 घंटे बाद पूरी तरीके अनकंट्रोल हो कर झटके आना शुरू हो गया । मरीज के परिजनों द्वारा डॉक्टर से बात करने पर डॉक्टर ने बताया थोड़े टाइम में दवा दे दी गई ठीक हो जाएंगे यह सिलसिला लगातार 12 घंटे चलते रहा मरीज दिनांक 25/09/2021 रात 11:00 बजे के बाद होश में नहीं आया। 

अगले दिन सुबह 26/09/2021 को परिजनों के बात करने पर डॉक्टर ने सर का सीटी स्कैन बनारस के कावेरी डायग्नोस्टिक सेंटर से करवाने को कहा जिस पर डॉक्टर द्वारा ‌हॉस्पिटल के गाड़ी से मरीज का सिटी स्कैन कराया सीटी स्कैन की रिपोर्ट हेमरेज होने की रिपोर्ट आई ।

डॉक्टर द्वारा 24 घंटे तक फिर अपने हॉस्पिटल में रखा गया और घर के परिजनों को आश्वासन दिया गया कि 24 घंटे में होश में आ जाएंगे। 24 घंटे बीतने के बाद मरीज की हालत और बिगड़ गई, जिस पर मरीज के परिजनों ने डॉक्टर से बात करने की कोशिश की जिस पर हॉस्पिटल के डॉक्टर ने मरीज को लेकर प्राइवेट हॉस्पिटल मेट्रो ऋषि देव हॉस्पिटल चितईपुर जाने की बात कही। इस पर मरीज के परिजनों ने अपनी आर्थिक स्थिति सही नहीं होने के बारे में बताया और कहा कि बीएचयू के लिए रेफर कर दीजिए। जिस पर चरक हॉस्पिटल के डॉक्टर साहब ने बीएचयू का खौफ देकर परिजनों को आश्वासन दिया। आप चिंता ना करें आप हॉस्पिटल ले जाएं हमने बात कर ली है।

 हॉस्पिटल के डॉक्टर द्वारा मेट्रो ऋषि देव हॉस्पिटल से एंबुलेंस मंगाकर मरीज को भेजने की पूरी तैयारी कर ली घर के परिजनों द्वारा चरक हॉस्पिटल के द्वारा किए गए ट्रीटमेंट की जांच रिपोर्ट मांगने पर डॉक्टर साहब द्वारा उन्हें एक पर्ची भी नहीं दी गई और कहां गया आप जाएं हमने फोन पर बातें कर ली हैं। मरीज के परिजनों ने तुरंत एंबुलेंस में बैठकर दिनांक 27/09/2021 को एंबुलेंस से ऋषि देव मेट्रो हॉस्पिटल जा पहुंचे वहां आईसीयू में एडमिट कर ट्रीटमेंट स्टार्ट हॉस्पिटल द्वारा कर दिया गया। वहां पर मरीज के परिजनों से काउंटर पर पैसे जमा करने की बात का दवा की पर्ची थमा दी गई और डॉक्टर द्वारा 72 घंटे मैं भी रिकवर होने का आश्वासन घर के परिजनों को दिया गया, जहां पर 4 दिन का खर्च लाखों रुपए के बिल बन गया। 

घर की परिजनों द्वारा किसी तरीके पैसे की व्यवस्था कर टुकड़ा टुकड़ा पैसा जमा किया गया। जिस पर मरीज को किसी तरीके की राहत नहीं हुई ना ही वह पिछले 5 दिनों से होश में आए और साथ ही साथ मेट्रो हॉस्पिटल से परिजनों के ऊपर दिनांक 30/10/2021 को पैसे जमा करने का दबाव मरीज के परिजनों को देने लगे और मरीज को दवा देने से मना कर दिया।


 मरीज के घर की आर्थिक स्थिति सही ना होने के कारण मेट्रो हॉस्पिटल के डॉक्टर द्वारा रात के 8:00 बजे घर के परिजनों को फोन पर काउंटर पर पैसे जमा कर मरीज हालत सही नहीं है इन्हें तुरन्त लेकर जाने की बात कही। ऐसा सुनकर मरीज के परिजनों द्वारा चरक हॉस्पिटल के डॉक्टर को फोन कर ऐसे गलत तरीके से ऑपरेशन कर मेट्रो हॉस्पिटल में ज्यादा बिल बनने की बात कही तो चरक हॉस्पिटल के डॉक्टर ने कहा आप पेमेंट वहां जमा करके कहीं भी ले जा सकते हैं। फोन पर काफी कहासुनी होने के बाद मरीज के परिजनों द्वारा दिनांक 01/10/2021 किसी तरह करके मेट्रो ऋषि देव हॉस्पिटल से डिस्चार्ज करा कर बीएचयू ले जाने का कार्य किया बीएचयू के इमरजेंसी में ईओपीडी में ही इलाज के दौरान मरीज ने दम तोड़ दिया । घर के परिजनों में कोहराम मैच गया जिस पर घर के आसपास के लोगों में काफी आक्रोश व्यक्त किया।