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न खाता खुला, न सचिव सहयोगी..कैसे करें गांवों में विकास के काम, झेल रहे हैं प्रधानजी
सकलडीहा विकास खंड के दिघवट और फेसुड़ा सहित आधा दर्जन से अधिक गांवों देखने को मिल रहा है, जहां पंचायत चुनाव समाप्त होने के बाद अभी तक एक पैसे का विकास कार्य नहीं हो पाया है।
 

पंचायत विभाग के सचिवों की मनमानी

नहीं हो रहा विकास कार्य 

सरकार व प्रशासन भले ही गांव के विकास को लेकर तमाम तरह की घोषणाएं कर ले या शासन प्रशासन लाखों रुपए की योजना बना लेकिन पंचायत विभाग के सचिवों की मनमानी के कारण विकास कार्य ठप पड़ा रहता है।

कुछ ऐसा ही नजारा सकलडीहा विकास खंड के दिघवट और फेसुड़ा सहित आधा दर्जन से अधिक गांवों देखने को मिल रहा है, जहां पंचायत चुनाव समाप्त होने के बाद अभी तक एक पैसे का विकास कार्य नहीं हो पाया है। गांव के लोग प्रधान से तमाम तरह की उम्मीद लगाए हैं और प्रधान पंचायत सचिवों की हरकत के आगे मजबूर हैं। 

कहा जा रहा है कि पंचायत सचिवों व ब्लाक के अफसरों की बहानेबाजी व टालमटोल के कारण गांवों में विकास का दावा खोखला नजर आ रहा है। वहीं गांव में विकास कार्य ठप होने पर प्रधान सहित ग्रामीणों में आक्रोश भरता जा रहा है।

कहा जा रहा है कि प्रदेश सरकार ने चुनावी वर्ष को लेकर विकास कार्यों का खजाना खोल दिया है। वहीं दूसरी ओर विकास खंड में कुछ सचिवों की लापरवाही के कारण चुनाव के छह माह बाद भी विकास कार्य ठप है। जबकि शासन की ओर से गांव की विकास को लेकर तमाम प्रकार की योजनाएं चल रही है। यही नहीं चुनाव के मद्देनजर चुनाव बूथ को 20 पैरामीटर के तहत पूर्ण करना है। आंगनबाड़ी सेंटर से लेकर पंचायत भवन को डिजिटल की कवायद की जा रही है। 

इन सबके बावजूद सकलडीहा ब्लाक के फेसुड़ा, दिघवट, बलारपुर, कटेहरा आदि गांवों में विकास कार्य के नाम पर कुछ हो ही नहीं पा रहा है क्योंकि इन सभी गांवों के बैंक खाते का संचालन अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। हर दिन लोग नए तरह के बहाने बनाकर टालमटोल कर रहे हैं।

इस मामले में एडीओ पंचायत बजरंगी पांडेय ने बताया कि बलारपुर और कटेहरा में तकनीकी समस्या के कारण नये विकास कार्य नहीं हो रहा है। दो गांव में सचिव को लेकर समस्या बनी है। शीघ्र ही समस्या का समाधान किया जायेगा।