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मुगलसराय विधानसभा : क्या किसी व्यापारी नेता को मिलेगा विधानसभा का टिकट, ये नेता ठोंक रहे हैं ताल
चंदौली जिले में विधानसभा चुनाव के के लिए हर दल के लोग सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर काम करते हुए विधानसभा की अधिक से अधिक सीटें जीतना चाहते हैं।
 

भाजपा-सपा-बसपा से वैश्य बिरादरी के कई दावेदार

इसलिए मांग रहे हैं अपने लिए टिकट

चंदौली जिले में विधानसभा चुनाव के के लिए हर दल के लोग सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर काम करते हुए विधानसभा की अधिक से अधिक सीटें जीतना चाहते हैं। इसके लिए हर दल अपने स्तर से जातिगत आंकड़े इकट्ठा करते हुए अपने-अपने जनाधार के हिसाब से जातिगत और व्यवसायगत लेवल पर भी रणनीति बना रहा है। हर किसी के द्वारा अपने विश्लेषण के हिसाब से अपनी मजबूत दावेदारी साबित करने की कोशिश की जा रही है। चाहे दल हो या व्यक्ति वह अपने आप को विजेता बता रहा है तो वहीं बिरादरी या समाज को निर्णायक बता रहा है। 

हर बिरादरी व समाज के नेताओं के द्वारा ऐसा प्रदर्शन व विश्लेषण किया जा रहा है और सबके सामने ऐसा दावा पेश किया जा रहा है कि जो दल इन को विधानसभा में टिकट देगा, उसको बाकी दलों से अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है। यह गुणा-गणित सेटिंग गेटिंग हर दल में चल रही है। इसीलिए भाजपा व सपा में वैश्य समुदाय के कई दावेदार मैदान में आ गए हैं।

वैश्य समाज की तैयारी

फिलहाल चंदौली जिले में वैश्य समाज को लेकर तरह तरह के कयास व संभावनाएं पेश की जा रही हैं। वैसे अगर देखा जाय तो वैश्य समाज एक समय में भाजपा के करीब था, लेकिन धीरे धीरे उसने अपनी बैठ अन्य दलों में भी बना ली। अबकी बार विधानसभा चुनाव में एकजुट होकर ऐसे उम्मीदवार के साथ खड़े होने की तैयारी कर रहा है, जो उनके व्यवसाय से ताल्लुक रखता हो और व्यापारियों का असली नेता हो।

380 Mughalsarai Assembly Seat

जवाहर को मिला था लोकसभा का टिकट 

आपको बता दें कि चंदौली जनपद में अब तक का इतिहास देखा जाए तो पिछले तीन से चार दशकों में केवल  समाजवादी पार्टी ने 1999 के लोकसभा चुनाव में जवाहर प्रसाद जायसवाल को टिकट दिया तो वह लोकसभा में चले गए। इसके अलावा किसी भी वैश्य बिरादरी के प्रतिनिधि को किसी दल ने विधानसभा का कभी टिकट नहीं दिया। जवाहर जायसवाल समाजवादी पार्टी के टिकट पर चंदौली जिले से सांसद निर्वाचित हो चुके हैं, जबकि उन्हें भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए 2009 में हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद किसी भी राजनीतिक दल ने न तो किसी व्यापारी नेता को आगे किया और न ही किसी वैश्य बिरादरी के उम्मीदवार को विधानसभा या लोकसभा का टिकट दिया है। अबकी बार वैश्य समाज के लोग जातिगत और पार्टी के बंधन से अलग होकर अपने किसी एक नुमाइंदे के साथ खड़े होने पर एकजुट होकर अपनी ताकत दिखाने की  कोशिश में जुटे हुए हैं। 

मुगलसराय विधानसभा में इसलिए जोर

आपको बता दें कि चंदौली जिले में 4 विधानसभा सीटें हैं और मुगलसराय को छोड़कर हर विधानसभा सीट में कम से कम 25 से 30 हजार वैश्य समुदाय के मतदाता हैं। अगर जो दल वैश्य समुदाय के किसी नेता को टिकट देकर जिले में विधानसभा चुनाव लड़ेगा। उनकी ओर वैश्य समुदाय का झुकाव अधिक होगा और इसका फर्क भी विधानसभा चुनाव के परिणाम पर दिखेगा।

वैश्य से समुदाय की सबसे ज्यादा जनसंख्या मुगलसराय विधानसभा में बताई जाती है। अगर इनके द्वारा किए गए सर्वेक्षण और इकट्ठा किए गए आंकड़ों को देखा जाए तो मुगलसराय विधानसभा में 60 से 65 हजार वैश्य बिरादरी के लोग हैं, जो रोजी रोजगार के लिए व्यापार पर निर्भर हैं। मुगलसराय विधानसभा में चंदौली, बबुरी और मुगलसराय के साथ-साथ चंधासी, पड़ाव जैसे तमाम इलाके में फैले हैं। इस विधानसभा में इस तबके की मजबूत स्थिति और जनसंख्या है और इस समुदाय के वोटर काफी निर्णायक साबित होते हैं। भाजपा ने इन्हीं के साथ साथ छब्बू पटेल को साधकर 1991, 1993 और 1996 के विधानसभा में हैट्रिक लगाने का काम किया। 

ये हैं मुगलसराय के दावेदार

 आपको बता दें कि चंदौली जिले की व्यापारी नेता के रूप में चर्चित और मुगलसराय के तत्कालीन विधायक साधना सिंह को विधायक बनाने में इन व्यापारियों का एक बड़ा रोल है। अबकी बार साधना सिंह इन व्यापारियों के अपने साथ होने का दावा कर रही हैं तो वहीं भारतीय जनता पार्टी के अन्य कई व्यापारी नेता अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं और वह खुद को अपनी बिरादरी का असली नुमाइंदा बताकर विधानसभा का टिकट मांग रहे हैं। इसमें रमेश जायसवाल, अनिल गुप्ता गुड्डू, संतोष गुप्ता, संतोष कश्यप जैसे तमाम नेता शामिल हैं। लेकिन साधना सिंह अपने आप को व्यापारियों का सर्वमान्य नेता बताती हैं।

वहीं अगर समाजवादी पार्टी का हाल देखा जाए तो वहां भी इस समुदाय से कई लोग अबकी बार विधानसभा चुनाव का टिकट मांग रहे हैं। इसमें मुगलसराय नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन राजकुमार जायसवाल के साथ साथ सपा नेता सिद्धांत जायसवाल और महेश जायसवाल भी कतार में लगे हुए हैं। हर कोई अब की बार इस बात का जोर लगा रहा है कि अगर उनको टिकट मिला तो इसका फर्क बाकी विधानसभाओं में देखने को मिलेगा।

 आपको बता दें कि चंदौली जिले की व्यापारी नेता के रूप में चर्चित और मुगलसराय के तत्कालीन विधायक साधना सिंह को विधायक बनाने में इन व्यापारियों का एक बड़ा रोल है। अबकी बार साधना सिंह इन व्यापारियों के अपने साथ होने का दावा कर रही हैं तो वहीं भारतीय जनता पार्टी के अन्य कई व्यापारी नेता अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं और वह खुद को अपनी बिरादरी का असली नुमाइंदा बताकर विधानसभा का टिकट मांग रहे हैं। इसमें रमेश जायसवाल, अनिल गुप्ता गुड्डू, संतोष गुप्ता, संतोष कश्यप जैसे तमाम नेता शामिल हैं। लेकिन साधना सिंह अपने आप को व्यापारियों का सर्वमान्य नेता बताती हैं।

वहीं अगर समाजवादी पार्टी का हाल देखा जाए तो वहां भी इस समुदाय से कई लोग अबकी बार विधानसभा चुनाव का टिकट मांग रहे हैं। इसमें मुगलसराय नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन राजकुमार जायसवाल के साथ साथ सपा नेता सिद्धांत जायसवाल और महेश जायसवाल भी कतार में लगे हुए हैं। हर कोई अब की बार इस बात का जोर लगा रहा है कि अगर उनको टिकट मिला तो इसका फर्क बाकी विधानसभाओं में देखने को मिलेगा। वहीं कांग्रेस से रामजी गुप्ता भी विधानसभा का टिकट मांग रहे हैं।

380 Mughalsarai Assembly Seat

बसपा की भी नजर

राजनीतिक गलियारों में ऐसी चर्चा है कि बहुजन समाज पार्टी ने चंदौली जनपद की 4 विधानसभा सीटों में से 3 विधानसभा सीटों के उम्मीदवार लगभग फाइनल कर दिए हैं लेकिन मुगलसराय विधानसभा के लिए वह किसी मुस्लिम या वैश्य समुदाय के उम्मीदवार को खोज रही है। ऐसा माना जा रहा है कि बहुजन समाज पार्टी के कई नेता समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के वैश्य समुदाय के नेताओं के संपर्क में हैं। अगर भारतीय जनता पार्टी या समाजवादी पार्टी के नेता ऐसे वैसे समुदाय के नेताओं को टिकट देने से इंकार करते हैं, तो उनको बहुजन समाज पार्टी की टिकट पर उतारा जा सकता है।

इस बारे में नगरपालिका के पू्र्व चेयरमैन राजकुमार जायसवाल का कहना था कि बस समुदाय के लोग अबकी बार एकजुट हैं, जो दल इनको टिकट देगा। उसका पहला इस चुनाव में भारी रहेगा और वैसे बिरादरी के लोग एकजुट होकर उस दल के साथ खड़े दिखेंगे।

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