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नौकरी करने निकले रामकिशुन इस हालत में लौटे, परिवार वाले कर चुके थे अंतिम संस्कार
गांव से मिली जानकारी के अनुसार 28 साल पहले रोजी-रोटी की तलाश में रामकिशुन अपने घर से निकले थे।
 

घर वाले मान चुके थे मृतक

28 साल बाद किसी तरह घर लौटे रामकिशुन

बंधुआ मजदूर बनाकर कराया जाता था काम

कहा जाता है कि किसी की नियति में क्या लिखा है या कोई नहीं बता सकता, जिस आदमी को जितना परेशान होना रहता है वह परेशान होकर ही रहता है। बताया जा रहा है कि चंदौली जिले की मुगलसराय कोतवाली के लेडुआपुर गांव के रहने वाले रामकिशुन के साथ भी कुछ ऐसा हुआ है।

गांव से मिली जानकारी के अनुसार 28 साल पहले रोजी-रोटी की तलाश में रामकिशुन अपने घर से निकले थे। जब कई सालों तक वापस नहीं लौटे तो परिवार के लोगों ने उनकी काफी तलाश की। अंत में 16 साल पहले परिजनों ने उन्हें मृत मानकर उनका अंतिम संस्कार तक कर दिया, लेकिन वह अब घर लौट आए हैं। परिवार के लोग पाकर उन्हें खुश हैं, लेकिन उनकी हालत देखकर काफी परेशान भी हैं ।

बताया जा रहा है कि लेड़ुआपुर निवासी रामकिशन 28 साल पहले कामकाज की तलाश में सोनभद्र के ओबरा पहुंचे थे, वहां पर पावर हाउस की कैंटीन में उन्हें ढाई हजार रुपये की नौकरी मिल गई थी। कुछ दिन वहां पर काम करने के बाद से अचानक वह लापता हो गए। इसके बाद उनका कोई अता-पता नहीं चला। वापस लौटने के बाद रामकिशुन ने अपनी आपबीती बताई और पूरे घटनाक्रम को परिवार वालों से साझा किया।

 रामकिशुन ने बताया कि वह ओबरा से मुंबई चले गए थे, जहां पर कुछ तक काम किया। वहां पर उनसे बंधुआ मजदूर की तरह काम कराया जाता था तथा उन्हें नशीली दवा देकर उनकी याददाश्त कमजोर करने की कोशिश की जाती थी। कई महीने काम करने के बाद किसी तरह से भागकर वाराणसी आए तो यहां कुछ लोगों ने उन्हें पकड़ कर एक खटाल पर काम करने के लिए लगा दिया। इसके बाद बाबतपुर के एक होटल पर काम करने लगे। कुछ महीनों पहले जब इन्हें लकवा मार दिया और वह काम करने लायक नहीं रहे, तब होटल के मालिक में इनका नाम पता पूछ कर इन्हें घर पहुंचा दिया और चले गए।

 उधर 28 साल बाद रामकिशुन को देखकर परिवार के लोग हैरान रह गए। परिजनों ने कहा कि सारे लोगों ने उन्हें मृत मानकर इनका अंतिम संस्कार कर दिया था। वहीं उनकी पत्नी का कहना है कि हमारे पास 4 बेटियां थीं। जब यह नहीं आए तो हम लोगों ने सबकी शादी कर दी। अब इस हालत में मिले हैं। हम लोग इनकी देखभाल करेंगे।

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