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चंदौली पुलिस ने भाजपाइयों को दिखाया अपना दम, मुकदमा दर्ज होते ही भाजपा नेता काटने लगे कन्नी
सैयदराजा थाने में रातभर जो कुछ भी हुआ, उसको लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की काफी किरकिरी हुई है
 

भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की काफी किरकिरी

दोनों की जल्द जमानत भी नहीं होने वाली

धीरेंद्र प्रताप सिंह को अब भारतीय जनता पार्टी के सक्रिय सदस्य नहीं

चंदौली जिले के भारतीय जनता पार्टी के नेता अपने कार्यकर्ता की मदद करने के लिए सैयदराजा थाने में एकजुट तो हो गए लेकिन रात भर जो नाटक और नौटंकी चली उससे भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का लाभ होने के बजाय अब नुकसान होने लगा है। भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष, नगर अध्यक्ष, नगर पंचायत चेयरमैन, कई ब्लाक प्रमुख और स्थानीय विधायक सहित तमाम नेताओं ने जिला पुलिस प्रशासन पर जोर लगाकर तीन सिपाहियों और एक उप निरीक्षक के खिलाफ न सिर्फ सैयदराजा थाने में मुकदमा दर्ज कराया बल्कि उप निरीक्षक को लाइन हाजिर भी करा दिया। इसके बाद वह अपनी जीत मानकर यह सोच बैठे कि अब इनके कार्यकर्ता को न्याय मिल गया और उनका काम खत्म हो गया, लेकिन अभी तो पुलिस की बारी ही थी। 

सैयदराजा थाने में रातभर जो कुछ भी हुआ, उसको लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की काफी किरकिरी हुई है। इस दौरान सारी घटनाओं का संज्ञान लेते हुए चंदौली पुलिस प्रशासन ने भी दो मुकदमे भाजपा के उन लोगों पर दर्ज किए हैं, जो लोग थाने में भौकाल बनाकर पुलिस को डराने व धमकाने का काम कर रहे थे। 

पुलिस प्रशासन की ओर से यह दो मुकदमे काफी संगीन धाराओं में दर्ज किए गए हैं। जिससे दोनों भारतीय जनता पार्टी से जुड़े लोगों को काफी मुश्किल में डालने वाला है। इगर सही तरीके से पुलिस ने पैरवी व कार्रवाई की तो दोनों की जल्द जमानत भी नहीं होने वाली है। 

यह हैं दर्ज किए गए दोनों मुकदमे

आपको बता दें कि पहला मुकदमा विशाल मधेशिया उर्फ टुन्नू कबाड़ी के ऊपर हुआ है, जिनकी वजह से यह मामला इतना हाई लेवल का हुआ। इन्हीं की हरकत के कारण मामले में नगर स्तर के कार्यकर्ता से लेकर विधायक तक को मैदान में कूदना पड़ा। इनके खिलाफ पुलिस थाने में गाली-गलौंच-मारपीट, असलहा छीनने और जान से मारने की धमकी देने सहित कई संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है। इनके उपर 186/332/323/353/504/506/307 IPC धारा का मुकदमा दर्ज है। आप इन धाराओं को पढ़कर जान लीजिए कि विशाल मधेशिया उर्फ टुन्नू कबाड़ी का क्या होने वाला है। अब अगर इस मामले में पुलिस अपने लेवल की कार्यवाही करती है, तो सोनू कबाड़ी की कई महीने तक जमानत होने की कोई उम्मीद नहीं है।

 वही अगर दूसरे मामले को देखा जाए तो इसमें शैलेंद्र प्रताप सिंह नाम के एक भारतीय जनता पार्टी के पुराने नेता का नाम आ रहा है, जिसने थाने में तैनात शिवबाबू यादव नाम के उपनिरीक्षक को खुलेआम थाने परिसर में धमकी देने का काम किया। जब यह वीडियो सोशल मीडिया और चंदौली समाचार में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया तो पुलिस हरकत में आ गई और अपर पुलिस अधीक्षक ने बयान जारी करते हुए इसकी गिरफ्तारी की बात मीडिया को बतायी। जब मामले की छानबीन हुयी तो पता चला कि इसके उपर 323/504/506/332/353 IPC का मुकदमा दर्ज हुआ है और उसे रात में गिरफ्तार करके जेल भेजने की तैयारी तेज हो गयी। 

जैसे ही मुकदमा दर्ज होकर गिरफ्तारी का काम किया गया तो भारतीय जनता पार्टी के नेता और कार्यकर्ता धीरेंद्र प्रताप सिंह को अब भारतीय जनता पार्टी के सक्रिय सदस्य मानने से इंकार करने लगे। उनका कहना है कि यह पहले भारतीय जनता पार्टी में था, अब वह पार्टी में सक्रिय सदस्य नहीं है। अगर वह पार्टी में होता तो ऐसा काम नहीं करता..क्योंकि भाजपा एक अनुशासित पार्टी है। 

भाजपा जिलाध्यक्ष का है दावा

भाजपा के जिलाध्यक्ष ने कहा कि इसे सर्वेश कुशवाहा के कार्यकाल के समय में ही पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। भाजपा का कार्यकर्ता गैरकानूनी कार्य नहीं करता है। गैर कानूनी कार्य करने वालों पर पुलिस नियमानुसार कार्रवाई करेगी। इसमें भाजपा को कोई आपत्ति नहीं है।

हालांकि वह आज भी भारतीय जनता पार्टी के कई दिग्गज नेताओं के साथ घूमता फिरता है और सोशल मीडिया पर उन नेताओं के साथ अपनी फोटो मेंटेन करता है। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का यह तर्क किसी के गले नहीं उतरता है। भाजपा नेता अपनी नाक बचाने के लिए ऐसे बवाली कार्यकर्ताओं से कन्नी काट रहे हैं कि चुनाव के पहले जनता में कोई गलत मैसेज न जाए।

बोले राम किशुन यादव

मामले में सपा के पूर्व सांसद रामकिशुन यादव का कहना है कि भाजपा के कार्यकर्ता, पदाधिकारी एवं जनप्रतिनिधि अपने नाजायज कार्यों को कराने के लिए थाने, तहसील आदि के कर्मचारियों, सरकारी अधिकारियों पर दबाव बनाने का काम कर कर रहे हैं। दबाव न मानने वाले कर्मचारियों अधिकारियों को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। पर पुलिस को भी अपनी हद में रहने की जरूरत है।

 भारतीय जनता पार्टी भले ही केंद्र और राज्य सरकार में बेहतर काम करने का चंदौली के भाजपा नेता दम भरें, लेकिन कार्यकर्ताओं की मदद के नाम पर भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेताओं ने जिस तरह से पार्टी की किरकिरी कराई है और पुलिस प्रशासन ने इनके नेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके इनको बैकफुट पर धकेलने का काम किया है, उससे साफ लगता है कि भारतीय जनता पार्टी के संगठन में वह दमदारी नहीं है, जिसको वह दिखाना चाहता था। तभी तो पुलिस ने पहले भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के मन का काम किया है, लेकिन जब वह अपने आप पर आए तो पार्टी के नेता कार्यकर्ताओं से कन्नी काटने को मजबूर हो गए हैं। इससे साफ लगता है कि पुलिस भाजपा पर भारी दिख रही है।