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एक चर्चा यह भी : पता नहीं क्या है 'असली' व 'नकली' राजनीति, क्या होगा इसका अंत..!
 

वैसे तो कहा जाता है कि 'राजनीति' केवल राजनेता करते हैं, लेकिन आप अगर ध्यान से देखने व समझने की कोशिश करेंगे तो पता चलेगा कि सरकारी अधिकारी भी 'राजनीति' के माहिर 'खिलाड़ी' होते हैं और हवा का रुख भांपते हुए अपना स्टैंड बदल लिया करते हैं। 

इस मामले को जानना व समझना हो तो आप चंदौली जिले के सैयदराजा थाने के अंदर वाली कहानी को जानने व समझने की कोशिश करिए। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के धरने प्रदर्शन से शुरू होकर FIR, लाइनहाजिर, फिर FIR व गिरफ्तारी के साथ साथ अब चार पुलिसकर्मियों के निलंबन तक जा पहुंची है। इस मामले में दोनों पक्ष एक दूसरे को गलत साबित करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे थे और अपने आप को सही साबित करने के लिए अपने लेवल की दलील दे रहे थे।

 पहले भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की पहल पर पुलिस के एक उपनिरीक्षक और तीन सिपाहियों पर मुकदमा दर्ज हुआ और कार्यवाही शुरू करने की बात कही गई, लेकिन पुलिस के अफसरों ने और वहां पर मौजूद उप निरीक्षकों से तहरीर लेकर दो लोगों पर संगीन धाराओं में मुकदमा लिख दिया और तहरीर में ऐसी कहानी लिखी कि आपको फिल्म की स्क्रिप्ट की तरह दिखायी देने लगे।  

पुलिस की तहरीर पर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कराया गया तो भाजपा नेताओं की धकधकी बढ़ने लगी। एक मुकदमा विशाल मधेशिया उर्फ टुन्नू कबाड़ी के खिलाफ दूसरा शैलेन्द्र प्रताप सिंह के खिलाफ दर्ज हो गया था। शैलेन्द्र प्रताप सिंह सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ और उनकी गिरफ्तारी हुई तो भारतीय जनता पार्टी के नेता उनसे अपना पल्ला झाड़ लिए। इतना ही नहीं... यह भी कहने लगे कि कानून अपना काम करेगा। थाने में ऐसी किसी हरकत को गलत भी ठहराने की कोशिश करने लगे...खैर इनकी कहानी अलग हो गयी और मूल मुद्दा अभी भी कायम है।

जिले में जिस तरह से विशाल मधेशिया उर्फ टुन्नू कबाड़ी के खिलाफ अलग-अलग धाराओं में पुलिस की 'संदिग्ध तहरीर' के आधार पर मामला दर्ज हुआ। उससे भारतीय जनता पार्टी के जिला स्तरीय नेता काफी नाराज होते दिखे। साथ ही पुलिस की कार्यवाही को बदले की भावना से की गई कार्रवाई मानते हुए वह अपने शीर्ष नेताओं से पैरवी करने लगे।

कहा जा रहा है कि पार्टी के खिलाफ पुलिस का एक्शन देख 'मंत्री जी' तक बात पहुंचाई गई और पार्टी व कार्यकर्ताओं की प्रतिष्ठा बचाने की बात कहते हुए इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की गई। साथ ही साथ यह भी दावा किया गया कि बात मुख्यमंत्री तक ही जानी चाहिए तभी भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा। ऐसा हुआ भी। जैसे ही कार्यकर्ताओं की फरमाइश के अनुरूप 'मंत्री जी' ठीक उसी अंदाज में कार्यवाही शुरू हुई और शाम होते होते माहौल बदलने लगा।

 आनन-फानन में पुलिस अधीक्षक ने थाने के प्रभारी इंस्पेक्टर उदय प्रताप सिंह से मामले की एक रिपोर्ट मांगी और इस पर कार्रवाई करते हुए थाने के सिपाहियों को और उप निरीक्षक को थाने के अंदर गलत तरीके से व्यवहार करने का दोषी माना और उन्हें निलंबित करने का फरमान सुना दिया। इससे भाजपा नेताओं के चेहरे जरूर खिले होंगे क्योंकि अब वह अपनी वाहवाही के किस्से लोगों को सुना रहे हैं।

 अब सवाल यह उठता है कि पुलिस में थाने के अंदर जिस तरह की हरकत मानकर पुलिस के खिलाफ कार्यवाही की है और वहीं दूसरी तरफ पुलिस वालों के कहने पर मिली तहरीर के आधार पर विशाल मधेशिया उर्फ टुन्नू कबाड़ी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है..दोनों में से कौन सी बात सही है। 

आपको याद होगा कि टुन्नू कबाड़ी द्वारा थाने परिसर में पुलिस वालों को मारने पीटने, इंसास राइफल छीनने और जान से मारने की धमकी देने और अपने आप को खुद घायल कर लेने वाली तमाम आरोपों की कहानी को सच मानकर बुधवार को पुलिस ने मुकदमा लिख लिया और तेजी से मीडिया में इसका प्रचार करवा दिया कि पुलिस अफसर भी किस तरह से अपने मातहतों के साथ खड़े हैं। अगर यह मुकदमा थाने में लिखा जा रहा था तो क्या यह बात आला अफसरों को नहीं पता रही होगी। क्या साहब को तहरीर की कहानी पर यकीन हुआ होगा...शायद नहीं...पर वाहवाही लेनी थी तो उपनिरीक्षक की तहरीर लेकर तत्काल मामला पंजीकृत कर लिया। लेकिन समय बीतते-बीतते जब उपर का प्रेशर आया तो साहब को अपना रूख बदलना पड़ा और पुलिस की कहानी को झूठा व पुलिस के थाना प्रभारी की रिपोर्ट को सही मानना पड़ा और पुलिस को अपने किए की सजा दे दी।

ऐसी स्थिति में जांच करने वाले अधिकारी किस बात को सही मानेंगे और कैसे इस मुद्दे की असली कहानी जान पाएंगे.. यह एक कठिन कार्य होगा.. देखना यह है कि पुलिस और भाजपा की यह भिड़ंत कहां तक जाती है, इसका असली अंजाम क्या होता है।

(Note.. यह खबर सूत्रों व स्थानीय लोगों की चर्चा पर आधारित है..एकदम से सही पक्ष जानने के लिए आप दोनों पक्षों के शीर्ष लोगों से सीधे बातचीत कर सकते हैं।)