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नौगढ़ आयी भारत सरकार की टीम के सामने महिलाओं ने खोली पोल,कहा- सब पैसा खा गए प्रधानजी
 

भारत सरकार की टीम के समक्ष अधिकारियों की पोल खोलते हुए महिलाओं ने बताया कि मनरेगा में 28 दिन काम किया, एक  हजार  रुपये ही मिले हैं। साहब, प्रधान लालबरत और उसका मेंठ दीनानाथ सब रुपए खा गए। गांव वालों ने खंड विकास अधिकारी और पंचायत सचिव को भी घेरा
 

चंदौली जिले के विकासखंड  नौगढ़ में मनरेगा योजना के कार्यों का जायजा लेने आए भारत सरकार के मनरेगा योजना की टीम ने‌ गांवों में जाकर चौपाल लगाया।  गांव की महिलाओं ने मनरेगा में हो रही घपलेबाजी की पोल खोल कर रख दी। बताया की साहब सब पैसा प्रधान मिल बांट कर खा गए। यह सुनकर खंड विकास अधिकारी सुदामा यादव हक्का-बक्का हो गए।

आपको बता दें कि  प्राथमिक विद्यालय अमृतपुर में लगी चौपाल के दौरान भारत सरकार के मनरेगा योजना टीम की प्रतिनिधि मीनाक्षी को गांव की महिलाओं ने बताया कि हम लोगों ने 28 दिन का काम किया था और केवल मजदूरी ₹1000 मिला है। डरे सहमे रोजगार सेवक तारकेश्वर से पूछताछ हुआ तो बताया कि पूर्व प्रधान लालबरत ने  अपना खास मेंठ दीनानाथ को रखकर काम कराते थे।

 भारत सरकार की टीम इससे पहले परसिया गांव पहुंची, जहां जॉब कार्ड पर हाजिरी भरने  के अलावा वृद्धा, विधवा और विकलांग पेंशन के बारे में भी जानकारी लिया। तत्पश्चात टीम सोनवार गांव के प्राथमिक विद्यालय में चौपाल लगाकर गांव के लोगों और स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से जानकारी लिया। दोपहर बाद अमृतपुर गांव के प्राथमिक विद्यालय में पहुंची टीम को महिलाओं ने जहां निर्वाचित ग्राम प्रधान चंद्रशेखर यादव की प्रशंसा किया।

 Manrega Scheme in Naugarh Block

 अमृतपुर गांव के  पूर्व प्रधान लालबरत पासवान पर महिलाओं ने गंभीर आरोप लगाए हुए कहा कि हम लोगों का जॉब कार्ड कभी भरा ही नहीं गया, 28 दिन काम करने के बाद  हम लोगों के खाते में केवल ₹1000 आया है। मामले की गंभीरता को देख खंड विकास अधिकारी सुदामा यादव ने बीच-बचाव कर जांच कराकर भुगतान कराने को कहा। पंचायत सचिव गुड्डू प्रसाद ने बताया कि गांवों में 998 जॉब कार्ड धारक है लेकिन एक्टिव केवल 204 है, जिस पर टीम ने सवाल किया कि क्या यहां लोग काम करना नहीं चाहते हैं?  या फिर लोगों को काम नहीं दिया जा रहा है। चौपाल में आए  प्रवासी मजदूर उमेश कुमार और विपिन कुमार ने अधिकारियों को बताया कि लॉकडाउन में हम लोगों काफी जलालत झेली है,अब हम लोगों को गांव में ही रोजगार मिल रहा है इसलिए बाहर नहीं जाना चाहते हैं।

अमृतपुर गांव के राम बच्चन ने  लोहिया आवास और शौचालय निर्माण कार्य अधूरा होने का मामला उठाते हुए अधिकारियों को जानकारी दी। इस दौरान खंड विकास अधिकारी सुदामा यादव, एडीओ आईएसबी गुरु शरण श्रीवास्तव, एडीओ पंचायत प्रेमचंद्र के अलावा पंचायत सचिवों में उपेंद्र साहनी, महेंद्र प्रसाद, गुड्डू प्रसाद व गांव के प्रधान और पंचायत सदस्य तथा स्वयं सहायता समूह की महिलाएं मौजूद थी।