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जानिए नौगढ़ के जंगलों में क्यों रखा जा रहा है बम का गोला, बंदूक की जगह देशी बम का इस्तेमाल

शिकार के कुछ लोग शौकिया तो कुछ लोग खाने के लिए करते हैं, वन्य जीवों का शिकार करना आसान नहीं होता, ऐसे में अब शिकारियों ने पैंतरा बदल कर सुगंधित देसी बम का गोला बनाने का नया तरीका इजाद कर लिया है। डीएफओ रामनगर दिनेश सिंह ने क्षेत्रीय वनाधिकारियों को शिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने और रात्रि गश्त बढ़ाने को कहा है।

 

नौगढ़ के जंगलों मे रखा जा रहा है बम का गोला

चंदौली जिले के तहसील नौगढ़ में जंगली जानवरों का शिकार करने वाले शिकारी प्रतिदिन नए तरीके से इनका शिकार कर रहे  हैं।  शिकारी जंगली जानवरों का शिकार करने के लिए बंदूक की जगह देशी बम का इस्तेमाल कर रहे हैं। 

 आपको बता दें कि देशी बम का गोला फटते ही जानवर की मौत हो जाती है। शिकारी क्षेत्र के जंगलों में जगह- जगह आटे की लोई के बीच ऐसे बम का गोला  रख देते हैं, जौ, गेहूं के आटे के गोले में विस्फोटक सामग्री पैक रहती है जिनके अंदर विस्फोटक रहता है। जंगली जानवरों के इन्हें मुंह में उठाते ही वह फट जाता है जिससे उसकी मौत हो जाती है।


 काशी वन्य जीव प्रभाग रामनगर अंतर्गत चंद्रप्रभा वन्य जीव विहार के अलावा नौगढ़, जयमोहनी व मझगाई रेंज के विभिन्न जंगलों के समीप देसी बम से जंगली शूकरो का शिकार जारी है। ठंड के मौसम में जंगली शूकर खेतों में चरने आ जाते हैं। इसके बाद शिकारी देसी बम के गोले या पतले तारों का फंदा बनाकर इनका शिकार आसानी से कर लेते हैं। धड़ल्ले से हो रहे शिकार पर प्रतिबंध लगाने के लिए गांव के लोगों द्वारा वन विभाग के अधिकारियों को दी जा रही सूचना अभी तक बेअसर है। 


लोगों का कहना है कि जंगली जानवरों के शिकार पर प्रतिबंध होने के बाद भी इनका धड़ल्ले से शिकार किया जा रहा है। शिकार कुछ लोग शौकिया तो कुछ लोग खाने के लिए करते हैं, जबकि वन्यजीवों का शिकार पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध है। 


कैसे होता शिकार


 जंगल और खेतों में सूकरों के पद चिन्हों के स्थान पर इन बमों को रख दिया जाता है, जानवर इनकी सुगंध से वहां आते हैं जानवर खाने की वस्तु समझते हैं और बम का गोला मुंह में डालते ही विस्फोट हो जाता है आस-पास बैठे शिकारी विस्फोट की आवाज सुनते ही मौके पर पहुंच जाते हैं।

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पिछले साल जाड़े में जयमोहनी रेंज के धौठवा जंगल में शिकारियों के फंदे में तेंदुआ फस गया था। अधिकारियों की सांसें फूल गई थी, जिसे पकड़कर कानपुर चिड़ियाघर ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। दो हफ्ता पूर्व मझगांई रेंज के वन क्षेत्राधिकारी इमरान खान ने पड़रिया गांव से  शिकार हुए वन्य जीव का सिर और पैर के शिकारी को पकड़कर जेल भेज दिया।


 डीएफओ दिनेश सिंह बोले


 देसी बम के गोले से शिकार करने वाले लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। शिकारियों के खिलाफ अभियान चलाकर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। क्षेत्रीय वनाधिकारियों को रात्रि गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।