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क्या गंगा कटान की समस्या पर भी कोई प्लान बनाएंगे चंदौली जिले के अधिकारी और नेता
 

चंदौली जिले में बाढ़ आने के बाद गंगा कटान की समस्या से जिले के कई गांव जूझ रहे हैं और हर साल उनकी जमीनें गंगा में समाहित होती जा रही हैं । जब भी बाढ़ आती है या गंगा का पानी ऊपर बढ़ता है तो जनपद के नेता और अफसर इन इलाकों का दौरा तो करते हैं और तमाम तरह के आश्वासन देते हैं लेकिन उसके बाद सारे लोग भूल जाते हैं जिसके चलते किसान परेशान हैं क्योंकि हर साल उनकी जमीन गंगा में समाहित होती जा रही है। बताया जा रहा है कि धानापुर और चहनिया इलाके में चंद दिनों पहले गंगा में आई बाढ़ थम गई है। लेकिन कटान अब भी अनवरत हो रही है। प्रसहटां से लेकर नौघरां के बीच गंगा किसानों पर कटान का कहर बरपा रही हैं। बूढ़ेपुर गांव के सामने तो शनिवार को एक ही झटके में तकरीबन 17-18 बिस्वा की उपजाऊ भूमि कटान की भेंट चढ़ गईं।

हालात यही रहे तो वह दिन दूर नहीं जब गंगा कटान की जद में खेतों के साथ साथ रिहायशी घर भी आने से नहीं बच पाएंगे। गांव के लोग गंगा कटान की ऐसी त्रासदी देख तटवर्ती गावों के किसान अब भी खौफजदा हैं। ग्रामीणों के मुताबिक पिछले चार दशक से तटवर्ती गांव के किसान गंगा कटान की भयानक त्रासदी से जूझ रहे हैं। अब तक निधुरा, सहेपुर, रामपुर दीयां, प्रसहटा, हिंगुतरगढ़, बुद्धपुर, नौघरां, नरौली, महमदपुर, मिश्रपूरा, अमादपुर, मेढवां, नगवां, सोनहुली, कवलपूरा, गुरैनी, प्रहलादपुर, जिगना, अवहीं, बयानपुर, बीरासराय, महुंजी आदि अन्य गांव के सैकड़ों किसानों के हजारों एकड़ उपजाऊ खेत गंगा कटान के चलते पूरी तरह नष्ट हो गए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि कटान की त्रासदी ऐसी रही कि अब तक सैकड़ों किसान भूमिहीन तथा दर्जनों परिवार बेघर हो चुके हैं। कुछ दिनों पहले गंगा में आई बाढ़ अब थम गई है। लेकिन कटान अब भी निरंतर होती जा रही है। बाढ़ और बारिश खत्म होने के बाद भी प्रसहटा, हिंगुतरगढ़, बुद्धपुर और नौघरां आदि अन्य गांवों में गंगा कटान की भयानकता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यहां एक- एक बार मे आधे आधे, एक-एक विस्वा का भूखंड कटकर गंगा में समा जा रहा है।

बूढ़ेपुर गांव में इस समस्या से शनिवार को तकरीबन 17-18 बिस्वा का भूखण्ड कटान की जद में आकर बैठ गया। इसमें सुदर्शन उपाध्याय 3 बिस्वा, अपरबल उपाध्याय 5 बिस्वा, रमेश प्रताप सिंह 3 बिस्वा, अगम सिंह 3 बिस्वा, रंगनाथ सिंह 2 बिस्वा, रामजी उपाध्याय 2 बिस्वा उपजाऊ खेत शामिल है। हिंगुतरगढ़ के सदानंद सिंह, रमाशंकर सिंह, दीनदयाल सिंह, प्रशांत सिंह, मेघश्याम सिंह, राधे सिंह आदि अन्य किसानों का कहना है कि गंगा कटान की रोकथाम को लेकर अफसरों एवं जनप्रतिनिधियों ने न केवल समय- समय पर वायदे किए, बल्कि कटान की समस्या को दूर करने का भरोसा भी दिलाया। लेकिन उनके आश्वासनों का कहीं कोई फायदा नहीं हुआ। अलबत्ता आज भी तटवर्ती गावों के किसान गंगा कटान की भयंकर त्रासदी से जूझ रहे हैं।