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अच्छा काम करना पड़ेगा इसलिए ठेकेदारों ने नहीं डाला टेंडर, दिनभर बाट जोहते रहे अधिकारी
 

  चंदौली जिले में ठेकेदारों की महिमा अपरंपार है, जब उनके ऊपर अच्छा काम करने का प्रेशर पड़ता है तो वह काम करना ही बंद कर देते हैं और अगर उन्हें इस बात का आभास हो जाए कोई काम मानक के अनुरूप ही सारे नियमों के अंतर्गत करना है, तो वह ऐसे कामों में टेंडर डालना ही मुनासिब नहीं समझते हैं । इसका नमूना आप चंदौली जिले की सकलडीहा तहसील मुख्यालय पर बनने वाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की सड़क के काम को देखकर लगा सकते हैं । इस सड़क को सही सलामत बनवाने की जिम्मेदारी चंदौली जिले के सांसद और मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री डॉक्टर महेंद्र नाथ पांडेय की है, लेकिन ठेकेदार उनकी मंशा पर पलीता लगाने का काम कर रहे हैं ।    

 आपको याद होगा कि जिले के सांसद एवं केंद्रीय मंत्री डा. महेंद्रनाथ पांडेय ने सकलडीहा सीएचसी को गोद लिया है। अस्पताल तक सड़क बेहतर करने के लिए एक जुलाई को सीसी रोड का शिलान्यास भी किया। लेकिन गुणवत्तापूर्ण कार्य नहीं होने पर तत्कालीन ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रम्या आर ने श्रमदान घोषित करते हुए टेंडर निरस्त कर दिया। इसके बाद संबंधित विभाग की ओर से मंगलवार को टेंडर के लिए निविदा मांगी गई थी। लेकिन एक भी टेंडर पड़ा। इससे सीसी रोड का निर्माण अधर में लटक गया है। ऐसी चर्चा है कि गुणवत्तापूर्ण काम करने के प्रेशर के तहत ठेकेदारों ने सोची-समझी रणनीति के तहत यह फैसला किया है। वह चाह रहे हैं कि अगर टेंडर नहीं पड़े तो वह मनमाने तरीके से इस सीसी रोड का निर्माण करेंगे।  

आपको बता दें कि चंदौली जिले के सांसद और केंद्रीय मंत्री की पहल पर लोगों को सीएचसी के दिन बहुरने की उम्मीद जगी है। करोड़ों की लागत से आधुनिक उपकरण भी लगाए जा रहे हैं। ताकि ग्रामीणों को बेहतर सरकारी चिकित्सकीय सुविधा का लाभ मिल सके। अस्पताल तक पहुंचने के लिए खस्ताहाल सड़क को देख केंद्रीय मंत्री ने एक जुलाई को सीसी रोड निर्माण का शिलान्यास किया। सड़क का निर्माण भी शुरू हो गया था। लेकिन मानक के अनुरूप कार्य नहीं होने से ठेकेदार पर गाज गिर गई। तत्कालीन ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एवं प्रभारी बीडीओ रम्या आर ने टेंडर को निरस्त कर दिया। अब दोबारा टेंडर के लिए निविदा मांगने के बाद भी किसी भी ठेकेदार ने पहल ही नहीं की। विभागीय अधिकारी मंगलवार को दिनभर टेंडर का इंतजार करते रहे।    

 इसके बारे में बीडीओ राजेश नायक ने बताया कि किसी भी ठेकेदार ने टेंडर नहीं डाला है। अब प्रक्रिया को पुन: कराया जाएगा। कम से कम तीन टेंडर होना जरूरी है। टेंडर पढ़ने के बाद मानक के अनुरूप ही काम कराया जाएगा। गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का कोई समझौता नहीं होगा।