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मुख्यमंत्री के दौरे तक ठंडे बस्ते में रहेगा टुन्नू कबाड़ी का मामला, शायद यह है पुलिस की सोच..!
थाने के अंदर लगे सीसीटीवी कैमरे से झूठ व सच का पता लगाने के लिए भी आला अफसरों ने तैयारी की थी और उसकी रिकॉर्डिंग से जांच में मदद लेने की तैयारी की थी, लेकिन मामले के बड़े लेवल तक जाते ही पुलिस इसे अब ठंडे बस्ते में डालने वाली है।
 

इसलिए नहीं हो रही है मामले में जांच व कार्रवाई

मुख्यमंत्री के दौरे तक वेट एंड वाच की स्थिति

मुख्यमंत्री के दौरे वाले दिन हो सकती है अहम कार्रवाई

चंदौली जिले में भारतीय जनता पार्टी के मंडल उपाध्यक्ष विशाल मधेशिया उर्फ टुन्नू कबाड़ी और पुलिस के बीच मारपीट के मामले को फिलहाल पुलिस ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश कर रही है। माना जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेताओं और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मामले में हस्तक्षेप के बाद पुलिस के आला अफसरों ने फूंक-फूंक कर कदम रखना शुरू किया है। इसलिए अब पुलिस के एक उपनिरीक्षक और तीन सिपाहियों को निलंबित करने के बाद मामले में कोई और कार्रवाई नहीं करने जा रही है।

इस मामले में पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शनिवार को चंदौली जिले के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार सैयदराजा थाने के अंदर कई घंटे तक अपने मातहतों से इस मामले पर बातचीत की और मामले की असलियत जानने की कोशिश की। इतना ही नहीं इस दौरान हुए सारे घटनाक्रम को क्रॉस क्वेश्चन के जरिए सही तरीके से जानने और समझने की भी कोशिश की।

थाने के अंदर लगे सीसीटीवी कैमरे से झूठ व सच का पता लगाने के लिए भी आला अफसरों ने तैयारी की थी और उसकी रिकॉर्डिंग से जांच में मदद लेने की तैयारी की थी, लेकिन मामले के बड़े लेवल तक जाते ही पुलिस इसे अब ठंडे बस्ते में डालने वाली है।

 पुलिस अधीक्षक फिलहाल इस मामले को तूल पकड़ाने के बजाय मुख्यमंत्री के कार्यक्रम तक ठंडे बस्ते में डालना चाहते हैं और चार पुलिसकर्मियों के निलंबन को बड़ी कार्यवाही मानते हुए जिले में पुलिसकर्मियों को एक संदेश देना चाहते हैं कि भाजपाइयों से पंगा अच्छी बात नहीं है। इतना ही नहीं इस तरह की कार्यवाही से फिलहाल भारतीय जनता पार्टी के जिला स्तरीय नेता और कार्यकर्ता अपनी जीत मानने लगे हैं और इस मामले को इससे ज्यादा तूल नहीं देना चाहते हैं। क्योंकि जिस तरह से टुन्नू कबाड़ी के कारनामों की सूची पुलिस बना रही है और मौका पाकर उन पर भी नकेल कसने का प्लान तैयार किया है..उससे भाजपा को नुकसान हो सकता है।

 

फिलहाल ऐसी चर्चा है कि योगी आदित्यनाथ अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में चंदौली जिले का दौरा करने वाले हैं और इस दौरान मेडिकल कालेज का शिलान्यास होना है। ऐसा भी हो सकता है कि भारतीय जनता पार्टी के नेता इस मामले को जरूर

उनके संज्ञान में लाने की कोशिश करेंगे, क्योंकि योगी आदित्यनाथ का दौरा सैयदराजा विधानसभा क्षेत्र के उसी इलाके में है, जहां पर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता के उत्पीड़न की बात कही जा रही है।

 ऐसी भी उम्मीद जताई जा रही है कि योगी आदित्यनाथ अपने संबोधन में कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न पर नाराजगी जता सकते हैं और एक दो आला अफसरों पर भी गाज गिर सकती है। इसके लिए भाजपा के कार्यकर्ता जनप्रतिनिधियों पर दबाव बना रहे हैं और मुख्यमंत्री से भाजपा सांसद डॉ. महेन्द्र नाथ पांडेय की मुलाकात भी इससे जोड़ी जा रही है।

आपको बता दें कि जिले में जिस तरह से विशाल मधेशिया उर्फ टुन्नू कबाड़ी के साथ मारपीट के बाद भाजपा नेताओं के धरने प्रदर्शन व कार्रवाई के बाद पुलिस ने टुन्नू कबाड़ी के खिलाफ अलग-अलग धाराओं में पुलिस की 'संदिग्ध तहरीर' के आधार पर मामला दर्ज हुआ। उससे भारतीय जनता पार्टी के जिला स्तरीय नेता काफी नाराज होते दिखे। साथ ही पुलिस की कार्यवाही को बदले की भावना से की गई कार्रवाई मानते हुए वह अपने शीर्ष नेताओं से पैरवी करने लगे।

कहा जा रहा है कि पार्टी के खिलाफ पुलिस का एक्शन देख 'मंत्री जी' तक बात पहुंचाई गई और पार्टी व कार्यकर्ताओं की प्रतिष्ठा बचाने की बात कहते हुए इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की गई। साथ ही साथ यह भी दावा किया गया कि बात मुख्यमंत्री तक ही जानी चाहिए तभी भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा। ऐसा हुआ भी। जैसे ही कार्यकर्ताओं की फरमाइश के अनुरूप 'मंत्री जी' ठीक उसी अंदाज में कार्यवाही शुरू हुई और शाम होते होते माहौल बदलने लगा।

 आनन-फानन में पुलिस अधीक्षक ने थाने के प्रभारी इंस्पेक्टर उदय प्रताप सिंह से मामले की एक रिपोर्ट मांगी और इस पर कार्रवाई करते हुए थाने के सिपाहियों को और उप निरीक्षक को थाने के अंदर गलत तरीके से व्यवहार करने का दोषी माना और उन्हें निलंबित करने का फरमान सुना दिया।