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चंदौली में नहीं रहना चाहते हैं इन 7 गावों के लोग, बनारस में मिलाने की मांग
 


चंदौली जिले के 7 गांव के लोग अब चंदौली जिले में नहीं रहना चाहते हैं। अपने आपको वाराणसी जिले में शामिल कराने की मांग कर रहे हैं। इन इलाकों के लोगों ने रविवार को साइकिल यात्रा निकालकर एक सभा का आयोजन किया और अपने गांव को वाराणसी जिले में शामिल करने की मांग दोहरायी। 

चंदौली जिले के पड़ाव क्षेत्र की मढ़िया न्याय पंचायत के सात गांवों बहादुरपुर, मढ़िया, जलीलपुर, चौराहट, भोजपुर (रतनपुर), सेमरा व कटेसर का चंदौली से मोहभंग हो गया है। ये लोग खुद को वाराणसी जिले में समायोजित करने की मांग कर रहे हैं। 

इसके लिए ग्रामीणों के एक समूह ने मांग के समर्थन में रविवार को साइकिल यात्रा निकाली। यह साइकिल यात्रा कटेसर पहुंचकर समाप्त हुई। वहीं बहादुरपुर में सभा का आयोजन किया।

साइकिल यात्रा निकालने से पूर्व ग्रामीणों ने शिक्षक दिवस पर पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि दी। वक्ताओं ने कहा कि सात गांवों को वाराणसी जिले में शामिल करने के प्रथम चरण में चले हस्ताक्षर अभियान के बाद सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए साइकिल-यात्रा का आयोजन किया गया है। 


सातों गांव के ग्रामीण पिछले छह साल से सरकार से वाराणसी में समायोजन की मांग कर रहे हैं। जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक ग्रामीण चक्कर काट चुके हैं। इसके लिए ग्रामीणों ने एक मुहिम छेड़ दी है। प्रथम चरण में हस्ताक्षर अभियान चलाया गया था। उस समय सभी ग्रामीणों ने मांग पत्र पर हस्ताक्षर किया था और सरकार को भेजा था। आज तक उस पर विचार नहीं हुआ तो ग्रामीणों ने साइकिल यात्रा निकालकर मांग उठाई। यात्रा का नेतृत्व कर रहे आनंद स्वरूप मिश्रा ने कहा कि अगर सातों गांवों को वाराणसी में समायोजन कर दिया जाएगा तो कई लाभ मिलेंगे। कई कार्यालय नजदीक हो जाएंगे।

अभी तक ग्रामीणों को किसी भी आवश्यक कागजात या सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए चंदौली जिले में लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। गांवों में विकास का पहिया भी थम गया है। अधिकांश ग्रामीणों को सरकारी योजनाका लाभ भी नहीं मिल पाता है। अगर समायोजन हो जाता है तो लोगों को राहत मिलेगी। भूपनारायण झा, पंकज मिश्रा, जयप्रकाश यादव, मेराज खान, सुनील मिश्रा, विष्णु, रिजवान अहमद, निधिकांत, आशीष यादव, सलीम खान, आशीष विश्वकर्मा, लालजी यादव, विश्वनाथ सेठ, मोतीलाल, विजय प्रजापति उपस्थित थे।

यह जिले के राजनेताओं व अफसरों के लिए एक चुनौती जैसा है। इनकी बातों को सुनकर इनको होने वाली असुविधाओं के बारे में बात करनी चाहिए, ताकि यह आंदोलन जोर न पकड़े।