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382 सैयदराजा विधानसभा : विधायक बनकर कुछ अलग कराना चाहते हैं सुधाकर कुशवाहा
चंदौली जिले की सैयदराजा विधानसभा सीट के एक प्रबल दावेदार कर रहे हैं, जिन्होंने अब तक अपनी राजनीतिक पारी में कई नेताओं को मदद करते हुए विधानसभा में पहुंचाया है।
 

382 सैयदराजा विधानसभा 2022

चंदौली जिले की राजनीति में अबकी बार कई नए चेहरे विधायक बनने की रेस में शामिल हो रहे हैं। पहले यह लोग किसी और के साथ सहयोग करके उनको चुनाव जिताने में मददगार साबित होते थे, लेकिन अब वह अपनी राजनीतिक पहचान बनाने और खुद विधानसभा में पहुंचकर एक बड़ा राजनीतिक कद हासिल करना चाहते हैं, ताकि वह अपनी प्रतिभा और क्षमता के अनुसार अपने विधानसभा क्षेत्र में कार्य करते हुए अपनी एक अलग पहचान बना सकें। कुछ ऐसे ही तैयारी आजकल चंदौली जिले की सैयदराजा विधानसभा सीट के एक प्रबल दावेदार कर रहे हैं, जिन्होंने अब तक अपनी राजनीतिक पारी में कई नेताओं को मदद करते हुए विधानसभा में पहुंचाया है।

 हम आज बात कर रहे हैं समाजवादी पार्टी के टिकट पर सैयदराजा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे बहुजन समाज पार्टी छोड़कर आए समाजवादी पार्टी में लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव बनाए गए युवा नेता सुधाकर मौर्या की। सुधाकर मौर्या मूल रूप से तो चकिया विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले हैं, लेकिन अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को देखते हुए उन्होंने अपना एक नया ठिकाना सैयदराजा विधानसभा क्षेत्र के नौबतपुर में भी बना लिया है, जहां वह पिछले 9-10 सालों से सैयदराजा विधानसभा क्षेत्र में सामाजिक और राजनीतिक आयोजनों के जरिए जुड़ने और कार्य करने की कोशिश कर रहे हैं। 

 सुधाकर मौर्या ने चंदौली समाचार के एडिटर विजय तिवारी के साथ खास मुलाकात और बातचीत की, जिस दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक करियर और भावी योजनाओं पर खुलकर चर्चा की...

राजनीति सफर की शुरुआत


 
सुधाकर कुशवाहा ने बताया कि राजनीति उन्हें विरासत में मिली है और उनके परिवार के लोग अपनी ग्राम पंचायत में एक दशक से अधिक समय तक ग्राम प्रधान रहे हैं। साथ ही उनकी पत्नी भी चकिया क्षेत्र पंचायत के ब्लाक प्रमुख के पद पर सेवा कर चुकी है। वह खुद भी कई बड़े राजनीतिक पदों पर रह चुके हैं। साथ ही साथ कई राजनेताओं के साथ काम करते हुए उन्हें बड़ी जीत दिला चुके हैं। सुधाकर कुशवाहा ने कहा कि राजनीतिक पारिवारिक पृष्ठभूमि से होने के कारण उनके घर परिवार में राजनेताओं का आना जाना लगा रहता था। उनको देखकर ही उनके मन में राजनीति के प्रति थोड़ी दिलचस्पी पैदा हुई। लेकिन जब वह कक्षा 9 में पढ़ाई कर रहे थे, तो उसी समय चकिया विधानसभा से जोशीले नेता के रूप में सत्य प्रकाश सोनकर अपनी राजनीतिक पारी शुरू कर रहे थे। 1989 में सत्य प्रकाश सोनकर की चुनावी तैयारियों में वह शामिल होते रहे और इसी से उनके राजनीति में शिरकत तथा सक्रियता बढ़ती रही।

सत्य प्रकाश सोनकर के साथ की शुरुआत

हालांकि वह सक्रिय रुप से उन्होंने 1991 में राजनीति शुरू की, लेकिन 1993 के विधानसभा चुनाव में सत्य प्रकाश सोनकर ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी तो उन्होंने उनकी मदद करते हुए उन्हें विधानसभा में पहुंचाने की पूरी कोशिश की। सुधाकर कुशवाहा ने बताया कि इसी तरह व धीरे-धीरे समाजवादी पार्टी के निकट आते गए है और समाजवादी पार्टी के नेता के रूप में उन्होंने लगभग 16 साल तक सेवा की। लेकिन 2007 में उन्हें समाजवादी पार्टी कुछ राजनीतिक कारणों से छोड़नी पड़ी और उन्होंने उस समय बहुजन समाज पार्टी की सदस्यता हासिल कर ली।

बसपा में भी बड़ी भूमिका निभाई

 2007 में बहुजन समाज पार्टी की सदस्यता हासिल करने के बाद लगभग 13-14 सालों तक वह बहुजन समाज पार्टी के सक्रिय सदस्य के रूप में कई जिम्मेदारियों का निर्वहन करते रहे। इस दौरान उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर चकिया विधानसभा सीट से जितेंद्र कुमार एडवोकेट को विधायक बनाने में भी मदद की। बहुजन समाज पार्टी के प्रभारी के रूप में अन्य जिलों में भी काम किया। इस तरह से उनको राजनीतिक दलों में जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे उन्होंने बखूबी निभाने की कोशिश की।

 2021 में बहुजन समाज पार्टी की नीतियों से उनका मोहभंग हो गया और वह एक बार फिर समाजवादी पार्टी की ओर चल पड़े और उन्होंने सपा में घर वापसी करते हुए अखिलेश यादव की नेतृत्व पर भरोसा किया तो अखिलेश यादव ने उन्हें पार्टी में एक अहम जिम्मेदारी देते हुए समाजवादी लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव बना दिया। अब समाजवादी पार्टी में लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव की हैसियत से कार्य करते हुए अपनी चुनावी तैयारी कर रहे हैं और फिलहाल वह सैयदराजा विधानसभा सीट से विधायक बनने की तैयारी में हैं। 

न कोई गुरू न कोई आदर्श

 सुधाकर कुशवाहा ने कहा कि राजनीति में न तो उनका कोई गुरू है और ना ही कोई आदर्श है, क्योंकि वह अपने हिसाब से और अपनी सोच और समझ के जरिए लगातार आगे बढ़ते रहे हैं। राजनीति में भले ही कुछ दिनों तक वह सत्य प्रकाश सोनकर के साथ कुछ सीखने की कोशिश की, लेकिन जब वह अपने कार्य क्षेत्र में सक्रिय हो गए तो लोगों ने उनका सहयोग करने के बजाय उपयोग ज्यादा किया। इसीलिए वह पार्टी की गुटबंदी के शिकार होते रहे, जिसके चलते उन्हें समाजवादी पार्टी और उसके बाद बहुजन समाज पार्टी छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। 

धीरे धीरे लगभग 30 साल की राजनीति में बहुत कुछ सीख गए हैं और उनको भी राजनीतिज्ञों की अच्छे से पहचान हो गई है। वह अपने वसूलों और अपने नियम कानून के अनुसार राजनीति में एक नई पारी शुरू करना चाहते हैं। ताकि एक अलग पहचान बनायी जा सके।

राजनीति में आने का उद्देश्य भी स्पष्ट

 सुधाकर मौर्या ने बताया कि राजनीति में आने का उद्देश्य अपनी क्षमता के अनुसार लोगों के लिए कुछ ऐसा काम करना है, जिससे वह अपनी एक अलग किस्म की पहचान बना सकें। वह फिलहाल समाजवादी पार्टी के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ना चाहते हैं।  अगर समाजवादी पार्टी उन्हें इसके लिए उचित समझती है और सहयोग करती है तो वह पार्टी की अपेक्षाओं पर खरा उतरेंगे और सैयदराजा विधानसभा सीट के साथ-साथ जिले की सभी 4 विधानसभा सीटों को जीतने में समाजवादी पार्टी की यथासंभव मदद करेंगे। 


सुधाकर कुशवाहा का मानना है कि चुनाव आने पर पार्टी के अंदर तमाम तरह के लोग अपने राजनीतिक भविष्य को बरकरार रखने के लिए चुनाव लड़ने की इच्छा रखते हैं और टिकट मांगने का कार्य करते हैं। भले ही राजनीति में कुछ लोग इसे गुटबाजी या विरोध का नाम देते हों, लेकिन ऐसा नहीं होता है। पार्टी के अंदर थोड़ा बहुत मनमुटाव सबके पास होता है, लेकिन जब किसी एक उम्मीदवार को टिकट मिल जाता है तो पार्टी के सारे कार्यकर्ता एकजुट होकर उस के पक्ष में काम करते हैं। ऐसा ही कार्य अबकी बार चंदौली जिले में होगा। जिसे समाजवादी पार्टी का टिकट मिलेगा, पार्टी के अन्य दावेदार उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चुनाव लड़ने का काम करेंगे और सब का उद्देश्य 2022 के चुनाव में अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाना होगा।

हर जगह हैं स्वीकार्य

 सुधाकर मौर्या का दावा है कि समाजवादी पार्टी में लगभग 16 सालों तक सेवा दे चुके हैं और सपा के कई नेताओं से उनके पहले से राजनीतिक संबंध है रहे हैं। ऐसे में उन्हें पार्टी के अंदर नया मानना ठीक नहीं है। भले ही कुछ कारणों से वह बीच में बहुजन समाज पार्टी में चले गए थे, लेकिन उस दौरान भी उनका समाजवादी पार्टी ही नहीं बल्कि अन्य दलों के नेताओं से भी तालमेल बहुत ही बेहतर था। वह जनहित के मामलों पर हर दल के नेता और कार्यकर्ता से बातचीत करते थे और जनहित के कामों को करने या कराने की कोशिश करते थे। इसलिए उनकी पहचान और पकड़ हर दल के नेता और कार्यकर्ताओं के बीच है। वह केवल समाजवादी पार्टी में ही नहीं, बल्कि अन्य दलों के समर्थक लोगों में भी स्वीकार्य राजनेता हैं।

इसीलिए सैयदराजा है पहली पसंद

 सुधाकर कुशवाहा ने कहा कि वह 382 सैयदराजा विधानसभा सीट से इसलिए चुनाव लड़ना चाहते हैं, क्योंकि इस विधानसभा सीट में पिछड़े वर्ग के मतदाताओं की संख्या काफी अधिक है और यहां पिछड़ा वर्ग का मतदाता निर्णायक साबित होगा। इस विधानसभा सीट पर पहले दलित राजनेताओं को और उसके बाद से 2 बार से अगड़ी जाति के राजनेता को विधायक बनने का मौका मिला है। अबकी बार सैयदराजा की जनता यह चाहती है कि सैयदराजा विधानसभा सीट से किसी पिछड़े वर्ग के प्रत्याशी को टिकट मिले और जनता उसे चुनकर विधानसभा में भेजेगी। इसीलिए वह सैयदराजा विधानसभा क्षेत्र में पिछड़े, अति पिछड़े और दलित के साथ साथ सर्व समाज की नुमाइंदगी करना चाह रहे हैं।

अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाना है संकल्प

 सुधाकर कुशवाहा ने सभी मतदाताओं से अपील की है कि वह अपने अपने इलाके में अभी से सक्रिय हो जाएं और समाजवादी पार्टी के जनाधार को बढ़ाने के लिए इलाके में चल रहे वोटर लिस्ट संशोधन के तारीख को देखकर वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने का काम करें। ताकि ज्यादा से ज्यादा मतदाता वोटर लिस्ट में जुड़ सकें और समाजवादी पार्टी के पक्ष में माहौल बन सके। हम सब का उद्देश्य 2022 के चुनाव में समाजवादी पार्टी की सरकार बनाना होना चाहिए। इसके लिए हमें आपस में तालमेल के साथ मतभेद को भुलाकर काम करना है और उत्तर प्रदेश में एक बार फिर से अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठना है।