दशम आयुर्वेदिक दिवस पर इलिया में गोष्ठी, आयुर्वेद को बताया रोगों का मूल उपचार

कार्यक्रम के अंत में, उपस्थित लोगों को आयुर्वेदिक औषधियों और औषधीय पौधों की पहचान करने और उनके सही उपयोग के बारे में जानकारी दी गई।
 

आयुर्वेद दिवस के दिन आयुर्वेद पर चर्चा

शहाबगंज में आयुर्वेदिक जीवनशैली पर जोर

दैनिक जीवन में आयुर्वेद के उपयोग पर जोर 

चंदौली जिले के शहाबगंज विकासखंड के इलिया में नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर मंगलवार को 'दशम आयुर्वेद दिवस' के अवसर पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्र के प्रभारी चिकित्सक, डॉ. अरविंद पांडेय ने की, जिसमें आयुर्वेद के महत्व और उसके दैनिक जीवन में उपयोग पर विस्तार से चर्चा की गई।

डॉ. पांडेय ने अपने संबोधन में कहा कि आयुर्वेद केवल एक उपचार पद्धति नहीं, बल्कि एक संपूर्ण जीवनशैली है। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद शरीर और मन के बीच संतुलन स्थापित करके रोगों को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कई गंभीर और पुरानी बीमारियों का स्थायी इलाज आयुर्वेद में मौजूद है, जो अक्सर अन्य चिकित्सा पद्धतियों में संभव नहीं होता।

प्राकृतिक उपचार और रोग प्रतिरोधक क्षमता

डॉ. पांडेय ने आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों, संतुलित आहार, नियमित योग और प्राणायाम को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का सबसे प्रभावी साधन बताया। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, बढ़ते प्रदूषण और असंतुलित खानपान के कारण बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में, आयुर्वेदिक पद्धति को अपनाकर लोग बिना किसी दुष्प्रभाव के लंबे समय तक स्वस्थ रह सकते हैं।

कार्यक्रम के अंत में, उपस्थित लोगों को आयुर्वेदिक औषधियों और औषधीय पौधों की पहचान करने और उनके सही उपयोग के बारे में जानकारी दी गई। इसके साथ ही, सभी को दैनिक जीवन में प्राकृतिक उपचार और आयुर्वेदिक आहार अपनाने की शपथ भी दिलाई गई, ताकि वे एक स्वस्थ और संतुलित जीवन जी सकें।

इस कार्यक्रम में फार्मासिस्ट रविंद्र, लैब टेक्नीशियन बिंदेश्वरी और एएनएम हसीना बानो सहित स्वास्थ्य केंद्र के अन्य कर्मचारी और ग्रामीण भी मौजूद रहे। यह आयोजन लोगों को आयुर्वेद के प्रति जागरूक करने और उसे अपनाने के लिए प्रेरित करने का एक सफल प्रयास था।