भाजपा सरकार की नीतियों ने छीनी मजदूरों की मुस्कान; मनरेगा और वेतन भुगतान न होने से फीकी हुई होली

 

चंदौली में बकाया भुगतान को लेकर भाजपा सरकार की चौतरफा घेराबंदी शुरू हो गई है। AIPF नेता अजय राय ने आरोप लगाया कि मनरेगा मजदूरों की मजदूरी और कर्मचारियों का वेतन न मिलने से हजारों परिवारों की होली बेरंग हो गई है।

 
 

मनरेगा मजदूरों का बकाया भुगतान तत्काल हो

कर्मचारियों का वेतन न मिलने से बाजार सूने

विकास कार्यों की बकाया राशि पर संकट

भाजपा सरकार की कथनी और करनी में अंतर

बच्चों के नए कपड़ों के लिए तरसे मजदूर

चंदौली जिले में  रंगों का त्योहार होली दहलीज पर है, लेकिन उत्तर प्रदेश के चंदौली जनपद सहित पूरे प्रदेश में मनरेगा मजदूरों और विभिन्न विभागों के कर्मचारियों के लिए यह समय आर्थिक संकट का सबब बन गया है। ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट (AIPF) के राज्य कार्य समिति सदस्य अजय राय ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार की गलत नीतियों और भुगतान रोकने की प्रवृत्ति के कारण हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

सरकार के वादे निकले खोखले: अजय राय
एआईपीएफ नेता अजय राय ने प्रेस को जारी बयान में कहा कि सरकार ने वादा किया था कि होली के पूर्व सभी कर्मचारियों का वेतन और विकास कार्यों का बकाया भुगतान कर दिया जाएगा, ताकि लोग हर्षोल्लास के साथ त्योहार मना सकें। लेकिन धरातल पर सच्चाई इसके ठीक उलट है। न तो मनरेगा मजदूरों को उनकी मजदूरी मिली है और न ही ग्राम पंचायतों में प्रधानों द्वारा कर्ज लेकर कराए गए विकास कार्यों (पक्का कार्य) का भुगतान किया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जेब खाली है, तो परिवार के साथ होली की खुशियां कैसे मनाई जाएंगी?

बाजारों में पसरा सन्नाटा, असुरक्षा की भावना
अजय राय ने जमीनी हकीकत बयां करते हुए कहा कि चाहे स्थायी कर्मचारी हों, संविदाकर्मी हों या अस्थायी कर्मचारी, वेतन न मिलने के कारण बाजारों में भी सन्नाटा है। लोग खरीदारी नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि मजदूर अपने बच्चों को नए कपड़े तक नहीं दिला पा रहे हैं और केवल 'कल-परसों' का आश्वासन दे रहे हैं। आर्थिक तंगी का आलम यह है कि लोग अपने परिचितों से मुंह छिपाने को मजबूर हैं क्योंकि उनके पास होली पर घर आए मेहमानों के स्वागत के लिए भी पैसे नहीं हैं।

भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का आरोप
सरकार के 'सबका साथ, सबका विकास' के नारे पर कटाक्ष करते हुए अजय राय ने कहा कि जमीनी हकीकत यह है कि हर वर्ग में रोजी-रोटी का संकट और असुरक्षा की भावना है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार में केवल मुट्ठी भर पूंजीपतियों की चांदी है, जबकि आम जनता नफरत की आग और महंगाई में झुलस रही है। उन्होंने आगे कहा कि लगभग हर सरकारी विभाग में कमीशनखोरी का प्रतिशत बढ़ गया है, जिसके परिणामस्वरूप विकास कार्यों की गुणवत्ता में भारी गिरावट आई है।

मनरेगा को खत्म करने की साजिश?
एआईपीएफ नेता ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार नए-नए नियम बनाकर मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना को धीरे-धीरे खत्म करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि चर्चा है कि नहर और माइनर की सफाई जैसे महत्वपूर्ण कार्यों का भी भुगतान अब तक लटका हुआ है। यह सरकार की असंवेदनशीलता को दर्शाता है।

जल्द भुगतान की मांग
अंत में, अजय राय ने उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि होली के पावन पर्व की संवेदनशीलता को समझते हुए तत्काल प्रभाव से निम्नलिखित कदम उठाए जाएं, ताकि मजदूरों को राहत मिले...

1-मनरेगा मजदूरों की लंबित मजदूरी का भुगतान तुरंत उनके खातों में किया जाए।

2-ग्राम पंचायतों में हुए पक्के विकास कार्यों की बकाया राशि जारी की जाए।

3- सभी स्थायी, संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का वेतन होली से पहले सुनिश्चित किया जाए।

इसके साथ ही साथ अजय राय ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही जनहित में ये फैसले नहीं लिए, तो जनता आने वाले समय में इसका कड़ा जवाब देगी।